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अब न्यूजीलैंड में अपनी मर्जी से मर सकेंगे लोग, आज से लागू हुआ इच्छा मृत्यु कानून

न्यूजीलैंड में आज सुबह से इच्छा मृत्यु कानून लागू हो गया है, यानि अब यहां लोग अपनी मर्जी से मर सकेंगे। हालांकि इच्छा मृत्यु के लिए शख्स को एक शर्त भी रखी गई है।
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नई दिल्ली

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Nitin Singh

•

Updated: 7 Nov 2021, 4:46 PM IST

new zealand right to die bill makes euthanasia legal today

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नई दिल्ली। लंबे समय से चल रही बहस और मंथन के बाद अब न्यूजीलैंड में लोगों को उनकी मर्जी से मरने की अनुमति दे दी गई है। दरअसल, आज सुबह से इच्छा मृत्यु कानून लागू हो गया है। हालांकि इच्छा मृत्यु के लिए शख्स को एक शर्त को पूरा करना होगा। बताया गया कि यहां केवल उन्हीं लोगों को अपनी मर्जी से मरने की अनुमति मिलेगी, जो टर्मिनल इलनेस यानि ऐसी बीमारी के ग्रसित है जो अगले छह महीने में उनकी जिंदगी खत्म कर देती है।

इन देशों में पहले से लागू है ये कानून
बता दें कि न्यूजीलैंड अपने देश के नागरिकों को इच्छा मृत्यु देने वाला पहला देश नहीं है। इससे पहले कोलंबिया, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, लग्जमबर्ग, स्पेन, नीदरलैंड और स्विटरजलैंड जैसे देशों में इच्छा मृत्यु को कानूनी दर्जा दिया गया था। इन सभी देशों में मौत में सहयोग से जुड़े अलग-अलग नियम और शर्तें हैं।

65 फीसदी लोगों ने किया पक्ष में मतदान
न्यूजीलैंड में इच्छा मृत्यु के लिए आवेदन करने वाले शख्स को टर्मिनल इलनेस के साथ कम से कम दो डॉक्टरों की सहमति अनिवार्य है। इस कानून को लागू करने के लिए न्यूजीलैंड में जनमत संग्रह कराया गया था, जिसमें 65 फीसदी से अधिक लोगों ने इसके पक्ष में वोट दिया। न्यूजीलैंड में इस मुद्दे पर लंबे समय से बहस चल रही है और आखिरकार कानून आज से लागू भी हो रहा है।

न्यूजीलैंड में लोग कर रहे विरोध
इस कानून को मंजूरी मिलने के बाद से न्यूजीलैंड में कई लोग इसका विरोध भी कर रहे हैं। विरोध करने वाले लोगों का कहना है कि इच्छा मृत्यु से समाज का इंसानी जीवन और मूल्यों को प्रति सम्मान कमजोर होगा। वहीं इससे कमजोर लोगों, खासकर विकलांग या जीवन के अंतिम दिनों में रह रहे लोगों की देखभाल में भी कमी आएगी। 61 साल के स्टुअर्ट आर्म्सट्रॉन्ग प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित हैं, जो लाइलाज है। आर्म्सट्रॉन्ग का कहना है कि अब उन्हें चिंता नहीं है कि उनकी मौत कैसे होगी क्योंकि इच्छा मृत्यु में दर्द नहीं होगा।

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अगर भारत की बात करें तो यहां इच्छा-मृत्यु और दया मृत्यु दोनों ही अवैधानिक कृत्य हैं, ये भारतीय दंड विधान (आईपीसी) की धारा 309 के अंतर्गत आत्महत्या का अपराध है। वहीं अब सुप्रीम कोर्ट ने निष्क्रिय इच्छामृत्यु को अनुमति प्रदान की है।