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BRICS Summit India: ब्रिक्स बिजनेस फोरम में पुतिन की पश्चिम को खुली चुनौती, पीएम मोदी ने रखा रोडमैप

दिल्ली में ब्रिक्स बिजनेस फोरम में पुतिन ने पश्चिम को चुनौती देते हुए कहा- जीडीपी में ब्रिक्स का हिस्सा 40%, जी-7 का सिर्फ 29%। पीएम मोदी ने दिया व्यापार बढ़ाने का 3 सूत्री फॉर्मूला।
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नई दिल्ली

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Anand Prakash Yadav

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Updated: 12 Sep 2026, 3:44 AM IST

BRICS Business Forum 2026

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले प्रमुख सदस्य देशों ने अपने आर्थिक और रणनीतिक तेवर दिखाए; photo: ChatGpt

दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन शुरू होने से ठीक पहले शुक्रवार को आयोजित ब्रिक्स बिजनेस फोरम में सदस्य देशों ने अपनी आर्थिक और रणनीतिक मंशा साफ जाहिर कर दी। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के भाषणों से यह संदेश गया कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और कूटनीति का पलड़ा अब पश्चिम से पूरब की तरफ खिसक रहा है। फोरम में डॉलर और वैश्विक वित्तीय प्रणाली पर पश्चिमी देशों के दबदबे को चुनौती देने पर गहन चर्चा हुई।

पुतिन बोले- जी-7 नहीं, अब ब्रिक्स की बारी

राष्ट्रपति पुतिन ने मंच से सीधे पश्चिम पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में वैश्विक जीडीपी में ब्रिक्स देशों की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से अधिक रही है, जबकि जी-7 देशों की हिस्सेदारी सिर्फ 29 प्रतिशत तक सिमट गई है। पुतिन ने कहा कि दुनिया में गहरे बदलाव हो रहे हैं और 20वीं सदी में विकास में अग्रणी रहे देशों की जगह अब ब्रिक्स जैसे नए इंजन ले रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्रिक्स किसी के खिलाफ नहीं बल्कि अपने हितों को ध्यान में रखकर आगे बढ़ रहा है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने भी पुतिन के सुर में सुर मिलाते हुए सदस्य देशों के बीच स्थानीय मुद्रा में व्यापार बढ़ाने की जरूरत बताई।

मोदी का तीन-सूत्री फॉर्मूला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स देशों को व्यापार बढ़ाने के लिए तीन स्पष्ट लक्ष्य दिए — हर साल 10 व्यापारिक बाधाएं दूर करना, 100 स्टार्टअप को समर्थन देना और 1000 नई कारोबारी साझेदारियां बनाना। मोदी ने कहा कि सदस्य देशों को हर साल इन तीन मापदंडों पर अपनी प्रगति परखनी चाहिए। उन्होंने बिना नाम लिए होर्मुज संकट का जिक्र करते हुए समुद्री मार्गों की सुरक्षा को वैश्विक व्यापार के लिए अनिवार्य शर्त बताया -सुरक्षित सी-लेन, खुले सप्लाई रूट और सुरक्षित नाविक ही व्यापार को आगे बढ़ा सकते हैं। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी फोरम में सदस्य देशों के बीच स्थानीय मुद्रा में भुगतान प्रणालियों को जोड़ने की अपील की।

वित्तीय एकीकरण की दिशा में ठोस कदम

ब्रिक्स देश सीमा पार भुगतान, स्थानीय मुद्रा निपटान और वित्तीय लचीलेपन पर सहयोग गहरा करने पर सहमत हुए हैं। भारत की अध्यक्षता में समूह अधिक व्यावहारिक वित्तीय एकीकरण की बुनियाद रखने जा रहा है। वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की जयपुर (12-13 अगस्त) और मुंबई (10 सितंबर) बैठकों में इस पर सहमति बनी थी। सम्मेलन की थीम 'लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण' के तहत आर्थिक सहयोग मजबूत करने का संकल्प दोहराया गया।

शनिवार से शुरू होगा असली एजेंडा

फोरम में दिखी झलक से साफ है कि शनिवार से शुरू हो रहा ब्रिक्स सम्मेलन सिर्फ आर्थिक साझेदारी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि व्यापार, ऊर्जा, सुरक्षा और बदलते वैश्विक शक्ति-संतुलन पर नए समीकरण गढ़ने की मंच बनेगा।