
CJP's Saurav Das :राहुल गांधी के आरोपों को मिला बड़ा समर्थन! CJP के सौरव दास बोले—'जवाबदेही तय होनी चाहिए (फोटो सोर्स : PTI_News)
Rahul Gandhi Firing Order Claim: राहुल गांधी के आरोपों को आधार बनाते हुए CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरभ दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। दास ने कहा कि 20 जुलाई को हुई पुलिस कार्रवाई में एक छात्र ने हमेशा के लिए अपनी आंखों की रोशनी खो दी। उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले में गृह मंत्री की भूमिका की जांच होनी चाहिए और उनकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
गौरतलब है कि पिछले महीने पेपर लीक विवाद को लेकर छात्रों का प्रदर्शन एक महीने से भी अधिक समय तक चला था, जो केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद खत्म हुआ। हालांकि, 20 जुलाई की रात पुलिस कार्रवाई के बाद से ही विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है।
राजनीतिक बयानों के इतर इस मामले में पुलिस रिकॉर्ड्स ने विवाद को नया मोड़ दे दिया है। संसद मार्ग थाने की 22 जुलाई (समय सुबह 1:24 बजे) की एक 'डायरी एंट्री' के अनुसार, 20 जुलाई की रात दिल्ली पुलिस के एक डिप्टी सुपरिंटेंडेंट के आदेश पर कम से कम दो राउंड पैलेट चलाए गए थे। यह दस्तावेज पहली बार इस बात का संकेत देता है कि प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पैलेट गन का इस्तेमाल हुआ था।
राहुल गांधी के आरोपों पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन में कड़ा एतराज जताया। उन्होंने कहा:
"अगर गृह मंत्री ने फायरिंग के आदेश दिए थे, तो राहुल गांधी उस आदेश की प्रति सदन के सामने रखें। बिना किसी ठोस सबूत के संसद में इस तरह के भ्रामक और गंभीर आरोप लगाना विशेषाधिकार का हनन है।"
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी नियमों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि बिना पूर्व सूचना और पुख्ता सबूत के सदन में किसी मंत्री या सदस्य पर सीधे व्यक्तिगत आरोप नहीं लगाए जा सकते।
एंटी-पेपर लीक बिल पर बहस का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने राहुल गांधी के दावों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि 20 जुलाई को केवल आंसू गैस के गोले छोड़े गए थे और कोई भी गोलीबारी नहीं हुई थी। मंत्री ने तंज कसते हुए कहा, "जब गोली चली ही नहीं, तो आदेश देने का सवाल ही कहां उठता है? वैसे भी कानूनन किसी भी आपात स्थिति में बल प्रयोग या फायरिंग का अधिकार मौके पर मौजूद मजिस्ट्रेट या SDM का होता है, किसी मंत्री का नहीं।"
पेपर लीक कानून और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का यह मामला अब महज कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि पूर्ण रूप से राजनीतिक रंग ले चुका है। एक तरफ जहां दिल्ली पुलिस के आधिकारिक दस्तावेज़ और विपक्ष के दावे सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार इसे विपक्ष का 'प्रचार स्टंट' बता रही है। संसद के मौजूदा सत्र में इस मुद्दे पर आगे भी भारी हंगामे के आसार हैं।
Updated on:
30 Jul 2026 08:58 am
Published on:
30 Jul 2026 08:58 am
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