
Rahul Gandhi President meeting : राहुल गांधी को राष्ट्रपति से मिलने का हक, लेकिन बातचीत बताने पर रूडी ने क्यों जताई नाराजगी? (फोटो सोर्स: ANI)
Rahul Gandhi President Meeting: राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद राहुल गांधी के बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस शुरू कर दी। बीजेपी सांसद राजीव प्रताप रूडी ने इस पर सवाल उठाए कि राष्ट्रपति के साथ क्या बात हुई, इसे सार्वजनिक करना कितना ठीक है। उनका कहना है कि विपक्ष के नेता के तौर पर ज्ञापन देना तो ठीक है, लेकिन बिना पक्के सबूत के राष्ट्रपति के हवाले से बयान देना सही नहीं है। दिल्ली में CJP के प्रदर्शन से पहले सुरक्षा इंतजाम को लेकर भी रूडी ने सरकार पर बात रखी।
रूडी ने कहा, देश के सबसे बड़े संवैधानिक पद पर बैठे शख्स के साथ क्या बात हुई, ये सार्वजनिक करना कितनी समझदारी है, इस पर सोचना चाहिए। उनके हिसाब से आम लोग तो छोड़िए, राजनीतिक नेता भी राष्ट्रपति से जाकर यह नहीं पूछ सकते कि बैठक के दौरान असल में क्या कहा गया।
रूडी ने ये भी साफ किया कि नेता प्रतिपक्ष होने के नाते राहुल गांधी को राष्ट्रपति से मुलाकात और अपनी बात रखने का हक है। ज्ञापन देना लोकतंत्र का हिस्सा है। लेकिन, उन्हें एतराज इस बात पर है कि राष्ट्रपति ने क्या कहा, उसे सार्वजनिक मंच से राहुल गांधी के बयान की तरह पेश किया जाए।
रूडी का कहना था कि बातचीत का जो ब्यौरा राहुल गांधी ने दिया, वह सही भी हो सकता है और गलत भी। लेकिन, सिर्फ ज्ञापन सौंपे जाने की पुष्टि और राष्ट्रपति की तरफ से किसी खास टिप्पणी की पुष्टि ये दो अलग बातें हैं। उनका मानना है, इस तरह की बातें राष्ट्रपति के पद की गरिमा पर असर डाल सकती हैं।
दरअसल, 9 अक्टूबर को राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी दलों के एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की थी। इस दौरान चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष की चिंताओं के संबंध में ज्ञापन सौंपा गया। राहुल गांधी ने मुलाकात के बाद दावा किया कि राष्ट्रपति ने विपक्ष के आरोपों को खारिज नहीं किया और उनसे अपने आरोपों के समर्थन में सबूत पेश करने को कहा।
विपक्ष की ओर से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। विपक्षी नेताओं ने चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच और जवाबदेही की मांग की है। वहीं, इन आरोपों को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है।
राजीव प्रताप रूडी ने दिल्ली में CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले किए गए व्यापक सुरक्षा इंतजामों को असामान्य नहीं बताया। उन्होंने बिहार में आगजनी की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार की जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। यदि कोई सरकार को चुनौती देता है या शांति व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करता है, तो प्रशासन को जरूरी कदम उठाने पड़ते हैं।
दिल्ली में 10 अक्टूबर को प्रस्तावित CJP प्रदर्शन के मद्देनजर पुलिस ने सुरक्षा बढ़ाई है। प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने और सार्वजनिक व्यवस्था को लेकर प्रशासन तथा प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है।
इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षा के नाम पर राजधानी की आवश्यक परिवहन सेवाओं को पूरी तरह रोकने के बजाय उन्हें नियंत्रित तरीके से जारी रखने की जरूरत पर जोर दिया। इससे साफ है कि इस पूरे मामले में कानून-व्यवस्था के साथ आम नागरिकों की आवाजाही और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार पर भी चर्चा हो रही है।
दरअसल, 9 अक्टूबर को राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी दलों के एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की थी। इस दौरान चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष की चिंताओं के संबंध में ज्ञापन सौंपा गया। राहुल गांधी ने मुलाकात के बाद दावा किया कि राष्ट्रपति ने विपक्ष के आरोपों को खारिज नहीं किया और उनसे अपने आरोपों के समर्थन में सबूत पेश करने को कहा।
विपक्ष की ओर से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। विपक्षी नेताओं ने चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच और जवाबदेही की मांग की है। वहीं, इन आरोपों को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है।
Updated on:
10 Oct 2026 10:28 am
Published on:
10 Oct 2026 10:08 am
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