
प्रियंका गांधी और राहुल गांधी। (फोटो- IANS)
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने रक्षा बंधन पर बहन प्रियंका के साथ तस्वीर शेयर कर सभी को बधाई दी है। यह तस्वीर राखी की नहीं है। तस्वीर भले ही सांकेतिक है, लेकिन दोनों के रिश्तों को बयां करने वाली है। राहुल ने प्रियंका से राखी बंधवाते हुए तस्वीर भले ही शेयर न की हो, लेकिन दोनों के सार्वजनिक जीवन के कई ऐसे पल कैमरे में कैद हैं जो ये दिखते हैं, कि राजनीति में राहुल को हिम्मत देने वाले जो लोग हैं, बहन प्रियंका भी उनमें एक हैं।
1983 में जब राहुल दून स्कूल गए तो प्रियंका को भी वेलहम स्कूल भेजा गया। इस दूरी का भी दोनों के रिश्ते पर गहरा असर हुआ। कुछ साल पहले राहुल ने एक कार्यक्रम में कहा था कि काफी कम उम्र से दोनों अलग-अलग रहे तो इस दूरी ने दोनों को एक-दूसरे का प्राथमिक सपोर्ट सिस्टम बनने में अहम रोल अदा किया।
रशीद किदवई ने गांधी परिवार पर लिखी अपनी किताब में बताया है कि सुरक्षा कारणों से दोनों को ज्यादा समय वहां नहीं रखा गया। फिर घर पर ही दोनों की पढ़ाई हुई। घर पर भी सुरक्षा के चलते बड़ी बंदिशें थीं। इनकी वजह से उन्हें लोगों या दूसरे बच्चों से दूरी बना कर रहना होता था। 10, जनपथ के अहाते में ही राहुल और प्रियंका खेलते रहते और इस दौरान राहुल पिता जैसी भूमिका निभाते थे।
राहुल समय-समय पर प्रियंका से रिश्तों के बारे में सार्वजनिक रूप से बात भी करते रहते हैं। 2019 में सूरत में छात्रों से संवाद के दौरान उन्होंने बताया था, 'वह मेरी सबसे अच्छी दोस्त है। हमारे बीच मतभेद भी होते हैं, पर हमने शुरुआत से ही एक नियम बना लिया है कि हमें एक-दूसरे से कुछ मिनट से ज्यादा गुस्सा नहीं रहना है।'
निजी जीवन में भी प्रियंका, राहुल के लिए बड़ा संबल हैं। 1991 में रक्षा बंधन से कुछ ही महीने पहले की बात थी। राजीव गांधी की हत्या हो चुकी थी। प्रियंका और राहुल गांधी अनाथ हो चुके थे। सोनिया गांधी को यकीन नहीं हो रहा था कि उनकी दुनिया उजड़ चुकी है। वे बुरी तरह टूटी हुई थीं। ऐसे समय में भाई-बहन एक-दूसरे का सहारा बने।
24 मई, 1991 की सुबह। विशाल हॉल में राजीव गांधी की मनमोहक मुस्कान वाली बड़ी सी तस्वीर रखी थी। इस पर सफ़ेद फूलों की माला चढ़ी थी। वह तस्वीर ही अंतिम दर्शन करने वालों के लिए उनकी आखिरी छवि थी, क्योंकि आतंकी हमले की वजह से राजीव के शरीर का बुरा हाल हो गया था। डॉक्टर्स ने अंग जोड़ कर जहां तक हो सके, पार्थिव देह की हालत ठीक करने की भरसक कोशिश की थी, लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिल सकी थी। ज़ेवियर मूर अपनी किताब 'रेड साड़ी' (Red Sari) में बताते हैं किअंगों की हालत इतनी खराब थी कि उन्हें जोड़ने के क्रम में एक डॉक्टर बेहोश हो गए थे। फिर भी रुई, बैंडेज और ढेर सारे बर्फ की मदद से पार्थिव देह को इस लायक बना दिया गया था कि अंतिम संस्कार हो जाए। 43 डिग्री की गर्मी में बर्फ भी तेजी से पिघल जाया करती थी। बड़ी सावधानी से बर्फ की नई परत चढ़ा दी जाती थी।
प्रियंका तब 19 साल की थीं और राहुल गांधी 21वें जन्मदिन (19 जून) से महज एक महीना दूर थे। वह हार्वर्ड में पढ़ाई कर रहे थे। पिता की हत्या की खबर सुन वहां से लौटे। तभी से प्रियंका उनके साथ बड़ी बहन की तरह खड़ी रहीं। प्रियंका उन्हें लेने एयरपोर्ट भी गई थीं। तब से पिता को मुखाग्नि देने तक प्रियंका और राहुल एक-दूसरे का सहारा बन कर रहे।
लंदन स्थित पत्रकार रानी सिंह ने अपनी किताब Sonia Gandhi: An Extraordinary Life, An Uncommon Grace में बताया है जब राजीव की मौत के बाद सोनिया गांधी टूट चुकी थीं। ऊपर से उन पर राजनीतिक काम का बोझ भी बढ़ गया था। तब राहुल और प्रियंका अपने कामों के लिए उन पर निर्भर नहीं रहने लगे थे। दोनों एक-दूसरे की मदद करते थे और इस बात का पूरा ख्याल रखते थे कि उनकी वजह से सोनिया को किसी तरह की परेशानी नहीं हो। उन दिनों दोनों भाई-बहन ने एक-दूसरे की ढाल बनने का एक अलिखित समझौता जैसा कर लिया था।
28 मई को जब राहुल पिता का अस्थि विसर्जन करने के बाद मां से लिपट कर रोने लगे थे, तब भी प्रियंका का हाथ उनके सिर पर था।
1980 में 16 फरवरी को पूर्ण सूर्य ग्रहण लगा था। राजीव ने गार्डेन में एक टेलीस्कोप लगवाया था। राहुल और प्रियंका इससे बड़े उत्साहित थे। दोनों ने मिल कर इस काम में पिता की मदद भी की। पिता ने अपने एक पायलट दोस्त से काला चश्मा भी ले लिया था। इस तरह सूर्य ग्रहण का नजारा देखने को लेकर दोनों भाई-बहन बड़े उत्साहित थे। बचपन में दोनों ननिहाल भी जाते थे तो खूब मस्ती करते थे।
राहुल और प्रियंका के रिश्तों पर विवाद और राजनीतिक बयानबाजी भी होती रही है। भारत जोड़ो यात्रा के दौरान जब उन्होंने मंच पर प्रियंका को किस किया था तब बीजेपी के कई नेताओं ने इसे गलत बताते हुए उन पर विदेशी संस्कृति की छाप होने के आरोप लगाए थे।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने भी हाल ही में उन्हें निशाने पर लिया।
Updated on:
28 Aug 2026 02:06 pm
Published on:
28 Aug 2026 01:21 pm
