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रिकर्सिव सेल्फ-इम्प्रूवमेंट: इंसानी दिमाग की सीमाओं से आगे निकल सकती है तकनीक की रफ्तार

self-improving AI: एंथ्रोपिक के सह-संस्थापक जैक क्लार्क के अनुसार 2027 तक एआइ खुद को बेहतर बना सकता है। जानें रिकर्सिव सेल्फ-इम्प्रूवमेंट क्या है और इसके क्या खतरे हैं।
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI- प्रतिकात्मक तस्वीर)

Recursive self-improvement AI: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) की दुनिया में एक ऐसा मोड़ आने वाला है, जो अब तक केवल हॉलीवुड फिल्मों का हिस्सा लगता था। एआइ कंपनी एंथ्रोपिक के सह-संस्थापक जैक क्लार्क का नया अनुमान है कि एआइ की इंसानों की मदद के बिना खुद को और बेहतर एआइ में बदलने की क्षमता वर्ष 2027 तक हकीकत बन सकती है।

यह उनके पिछले अनुमान 2028 से से पूरा एक साल पहले है। अभी तक एआइ का विकास इस बात पर निर्भर माना जाता है कि दुनिया में कितने मानव वैज्ञानिक उस पर काम कर रहे हैं। लेकिन 'रिकर्सिव सेल्फ-इम्प्रूवमेंट' (आरएसआइ) के आते ही तकनीकी प्रगति की रफ्तार इंसानी दिमाग की सीमाओं से पूरी तरह आजाद हो जाएगी। हालांकि, अभी भी यह एक संभावना है, हकीकत नहीं।

एआइ की शोध क्षमता में उछाल:

'पी-जीरो रिसर्च' के नए टेस्ट 'टेस्टवल' से पता चला है कि दिसंबर 2025 के बाद से एआइ की 'प्रयोगात्मक शोध क्षमता' हर तीन महीने में दोगुनी हो रही है।

मानव विशेषज्ञों को पछाड़ रहा:

इस टेस्ट में एंथ्रोपिक के ओपस 5.5 मॉडल ने कथित रूप से 24 मानव वैज्ञानिकों के स्तर का प्रदर्शन किया और वह भी इनकी लागत के मात्र 1/30वें हिस्से में!

यह है 'रिकर्सिव सेल्फ-इम्प्रूवमेंट'

  1. एआइ मॉडल अपने जैसी या उससे बेहतर एआइ तकनीक पर रिसर्च करता है।
  2. वह खुद से एक अधिक शक्तिशाली और स्मार्ट एआइ का निर्माण करता है।
  3. नई एआइ उससे भी बेहतर अगली जनरेशन की एआइ को जन्म देती है।

क्या है इसका खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार रिकर्सिव सेल्फ-इम्प्रूवमेंट (आरएसआइ) का सबसे बड़ा खतरा यह है कि सुरक्षा की रफ्तार तकनीक के विकास से पीछे छूट सकती है। जब एआइ इंसानों के बिना खुद एक दिन में कई जनरेशन आगे बढ़ जाएगा तो इंसानी वैज्ञानिकों के पास उसके फैसलों, कोड और सोच को समझने का समय ही नहीं बचेगा। जब सिस्टम पूरी तरह 'ब्लैक बॉक्स' बन जाएगा, तो उसमें कोई 'ऑफ स्विच' बनाना भी मुश्किल हो सकता है।

तार्किक सोच विकसित कर रहा

शुरुआत में माना जा रहा था कि एआइ में मौलिक रचनात्मकता आने में लंबा समय लगेगा। लेकिन हाल में एआइ ने गणित के कठिन और नए सवालों को जिस रचनात्मक ढंग से सुलझाया गया है, उसने साबित कर दिया है कि एआइ अब केवल दिए गए निर्देशों का पालन नहीं कर रहा, बल्कि उसमें तार्किक सोच विकसित हो रही है।