
Election Commission Protest: राहुल गांधी को रोकने पर क्यों भड़के सचिन पायलट? चुनाव आयोग को लेकर कही बड़ी बात (फोटो सोर्स: ANI)
Sachin Pilot News: मोहाली, पंजाब में कांग्रेस नेता सचिन पायलट चुनाव आयोग और विपक्षी दलों के बीच बढ़ते तनाव को लेकर नाराज दिखे। उनका सवाल सीधा था अगर 200-250 सांसद चुनाव आयुक्त से अपनी चिंता जताना चाहते हैं, तो आखिर उन्हें मिलने का मौका क्यों नहीं मिल रहा? सचिन पायलट ने इसे लोकतंत्र में संवाद की जरूरत से जोड़ते हुए केंद्र सरकार पर भी उंगली उठाई।
सांसदों को हिरासत में लिए जाने पर सचिन पायलट खुलकर विरोध में उतर आए। उन्होंने चुनाव आयोग से साफ-साफ पूछा जब भी सांसद चुनावी प्रक्रिया के मुद्दे पर सवाल उठाते हैं, आखिर बात करने से क्यों बचा जा रहा है?
मोहाली में पत्रकारों से बात करते हुए सचिन पायलट ने बताया, विपक्ष के करीब 200-250 सांसद चुनाव आयुक्त से मिलना चाहते थे, शिकायतें रखना चाहते थे। लेकिन उन्हें वक्त नहीं दिया गया। सचिन पायलट का कहना है कि जनप्रतिनिधियों की चिंताओं को सुनना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का जरूरी हिस्सा है, लेकिन यहां तो पुलिस कार्रवाई कर दी जाती है और संवाद की बजाय रोक लगाई जा रही है।
उनके सवाल में साफ नाराजगी दिखी जब सांसद चुनाव से जुड़ी अहम बातों पर स्पष्टीकरण चाहते हैं, तो चुनाव आयोग आखिर उनसे मुलाकात क्यों नहीं करता
पायलट ने आरोप लगाया कि विपक्षी सांसदों को बसों में बैठाकर पुलिस थानों तक ले जाया गया। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि उनके वहां पहुंचने पर भारी पुलिस बल तैनात किया जाता है और उन्हें मौके से हटा दिया जाता है। पायलट के अनुसार, राजनीतिक सवालों का जवाब संवाद के जरिए दिया जाना चाहिए, न कि केवल पुलिस कार्रवाई के माध्यम से।
उन्होंने केंद्र सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाए। पायलट का आरोप है कि जब मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य अधिकारियों से सवाल किए जाते हैं, तो जवाब देने के लिए भाजपा के प्रवक्ता सामने आते हैं। उनके मुताबिक, इससे स्वतंत्र संवैधानिक संस्था की जवाबदेही को लेकर बहस और तेज होती है।
कांग्रेस नेता ने चुनावी अनियमितताओं से जुड़े आरोपों का उल्लेख करते हुए कहा कि सामने आए मामलों पर सवाल उठाना विपक्ष की जिम्मेदारी है। उन्होंने यह दावा भी किया कि निर्वाचन आयोग के भीतर के कुछ लोगों ने कानून बनाने की प्रक्रिया में परामर्श नहीं लिए जाने की बात कही है। पायलट ने संबंधित प्रक्रिया की संवैधानिक वैधता पर भी सवाल उठाए।
हालांकि, इन आरोपों और दावों की स्वतंत्र पुष्टि तथा संबंधित पक्षों का जवाब इस बयान के आधार पर स्थापित नहीं होता। इसलिए इन्हें कांग्रेस नेता के आरोपों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
भारत में निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक संस्था है, जिसकी जिम्मेदारी चुनावों का संचालन और चुनावी प्रक्रिया की निगरानी करना है। ऐसे में चुनावों से जुड़े सवालों पर पारदर्शिता, संस्थागत संवाद और तथ्यों के आधार पर जवाब देना सार्वजनिक विश्वास बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
विपक्ष को चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाने और सरकार की नीतियों की आलोचना करने का अधिकार है। वहीं, लगाए गए आरोपों की जांच और उनके निष्कर्ष तथ्यों, दस्तावेजों तथा संबंधित संस्थाओं के आधिकारिक पक्ष के आधार पर तय होने चाहिए। फिलहाल, सचिन पायलट के बयान ने चुनाव आयोग की जवाबदेही, विपक्ष के विरोध और राजनीतिक संवाद की सीमाओं पर बहस को फिर चर्चा में ला दिया है।
Updated on:
09 Oct 2026 09:27 am
Published on:
09 Oct 2026 08:44 am
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
