
लोकसभा(फोटो-ANI)
Sansad Bhashini: संसद की कार्यवाही को मणिपुरी भाषा में भी समझना आसान होगा। राज्यसभा सचिवालय ने मणिपुरी को Sansad Bhashini में शामिल करने की जानकारी दी है। इससे संसद की कार्यवाही का रियल-टाइम अनुवाद और ट्रांसक्रिप्शन यानी बोले गए शब्दों को लिखित रूप में बदलने की सुविधा उपलब्ध कराने का रास्ता खुलेगा। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। राज्यसभा सचिवालय ने मणिपुर बीजेपी अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद अधिकारिमायुम शारदा देवी को पत्र लिखकर इस बारे में बताया। शारदा देवी ने पहले उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन से मणिपुरी भाषा को इस सुविधा में शामिल करने का आग्रह किया था।
सचिवालय ने अपने पत्र में कहा कि वह भाषाई समावेशिता को बढ़ावा देने और संसद की कार्यवाही तक ज्यादा लोगों की पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शारदा देवी के सुझाव को महत्व देता है। पत्र के मुताबिक, 20 जुलाई 2026 को मानसून सत्र की शुरुआत के दौरान सभापति ने सदन को बताया था कि सांसदों की सीटों पर लगे मल्टीमीडिया उपकरणों के जरिए नौ भाषाओं में एआई आधारित लाइव सिमल्टेनियस इंटरप्रिटेशन की सुविधा शुरू की गई है। इस सुविधा का धीरे-धीरे संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी 22 भाषाओं तक विस्तार करने की योजना है।
राज्यसभा सचिवालय ने बताया कि संपूर्ण डिजिटल संसद (Sampurna Digital Sansad) परियोजना के तहत 'वाणी सेतु' पहल पर काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य आठवीं अनुसूची में शामिल सभी भाषाओं में रियल-टाइम अनुवाद की सुविधा उपलब्ध कराना है। इसमें मणिपुरी भी शामिल है। पत्र में कहा गया कि अतिरिक्त भाषाओं को जोड़ने के लिए शुरुआती परीक्षण किए जा चुके हैं। मणिपुरी को शामिल करने के शारदा देवी के अनुरोध को भी आगे विस्तार की प्रक्रिया में विचार के लिए दर्ज किया गया है।
मणिपुर में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने इस घटनाक्रम पर खुशी जताई है। पार्टी ने इसे मणिपुरी भाषा को अधिक पहचान दिलाने और राज्य की भाषाई व सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने की दिशा में अहम कदम बताया। मणिपुर बीजेपी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि राज्यसभा सचिवालय ने सांसद और प्रदेश अध्यक्ष ए. शारदा देवी के अनुरोध पर ध्यान दिया है। पार्टी ने इसे मातृभाषा के संरक्षण, सांस्कृतिक विरासत के सम्मान और मणिपुरी भाषा की पहचान मजबूत करने की दिशा में सार्थक पहल बताया।
Sansad Bhashini के विस्तार से अलग-अलग भाषाएं बोलने वाले लोगों के लिए संसदीय कार्यवाही को समझना आसान बनाने की कोशिश की जा रही है। आठवीं अनुसूची की सभी 22 भाषाओं तक इस सुविधा का विस्तार डिजिटल तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए संसद की कार्यवाही को अधिक सुलभ बनाने की व्यापक योजना का हिस्सा है।
Published on:
19 Oct 2026 01:00 am
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