
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार(फोटो-ANI)
SIR Form 6: विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के दौरान प्रारूप मतदाता सूची से नाम गायब होने पर पहले से पंजीकृत मतदाताओं को अब दोबारा नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 भरने में कानूनी कार्रवाई का डर नहीं रहेगा। भारत निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी व्यक्ति का नाम पहले मतदाता सूची में दर्ज था, लेकिन एसआइआर के बाद जारी प्रारूप सूची में नहीं है, तो वह अंतिम मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए नए सिरे से फॉर्म-6 जमा कर सकता है। केवल इस आधार पर कि वह पहले भी मतदाता था और अब पहली बार नाम जुड़वाने संबंधी घोषणा कर रहा है, उसे झूठी घोषणा का दोषी नहीं माना जाएगा।
आयोग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को पत्र जारी कर इस संबंध में स्थिति स्पष्ट की है। दरअसल, पुराने मतदाता इस आशंका में फॉर्म-6 जमा करने से हिचक रहे थे कि पहली बार मतदाता सूची में नाम शामिल कराने संबंधी घोषणा करने पर उनके खिलाफ जनप्रतिनिधित्व कानून, 1950 की धारा 31 के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है। आयोग ने इस आशंका को दूर करते हुए कहा है कि ऐसी स्थिति में आवेदन करना अपने आप में गलत घोषणा नहीं है।
आयोग के अनुसार, फॉर्म-6 में पहली बार मतदाता सूची में नाम शामिल कराने संबंधी घोषणा का प्रावधान 1 अगस्त 2022 से लागू है। दिल्ली हाईकोर्ट ने भी 14 अक्टूबर को नीलोत्पल दत्ता एवं अन्य बनाम भारत निर्वाचन आयोग मामले में इस आशंका को गलत माना था कि पहले से मतदाता होने के बावजूद फॉर्म-6 भरने पर झूठी घोषणा का मुकदमा चल सकता है। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को फॉर्म-6 जमा करने की अनुमति देते हुए कहा था कि इस पर कानून के अनुसार कार्रवाई होगी। आयोग ने स्पष्ट किया है कि पहले पंजीकृत रहे मतदाता के खिलाफ केवल दोबारा फॉर्म-6 भरने के आधार पर धारा 31 के तहत कार्रवाई नहीं होगी। हालांकि, शर्त यह है कि उसका नाम किसी अन्य संसदीय या विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में पहले से दर्ज न हो और फॉर्म में की गई अन्य घोषणाएं भी कानून के अनुरूप हों।
Published on:
4 Nov 2026, 1:00 AM IST
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