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अफगानिस्तान से लौटे एयर इंडिया के कंट्री मैनेजर की आपबीती- दूतावास में हथियारबंद तालिबानी लड़ाके थे, डरते-डरते पहुंचे काबुल एयरपोर्ट

taliban : अफगानिस्तान से भारतीय दल के साथ आए एयर इंडिया के कंट्री मैनेजर ने साझा किए 36 घंटे के वो डरावने अनुभव, जिसमें सिर्फ अनहोनी की आशंका थी।
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नई दिल्ली

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Vikas Gupta

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Updated: 19 Aug 2021, 1:26 PM IST

अफगानिस्तान से लौटे एयर इंडिया के कंट्री मैनेजर की आपबीती- दूतावास में हथियारबंद तालिबानी लड़ाके थे, डरते-डरते पहुंचे काबुल एयरपोर्ट

अफगानिस्तान से लौटे एयर इंडिया के कंट्री मैनेजर की आपबीती- दूतावास में हथियारबंद तालिबानी लड़ाके थे, डरते-डरते पहुंचे काबुल एयरपोर्ट

taliban : नई दिल्ली । अफगानिस्तान Afghanistan से मंगलवार को वायुसेना के विमान सी-17 में आए भारतीय दल को काबुल में तालिबानियों Talibanis ने हवाई अड्डे तक सुरक्षा दी थी। काबुल में तैनात एयर इंडिया के प्रबंधक (कंट्री मैनेजर) सुदीप्तो मंडल ने अपने उन 36 घंटे के डरावने अनुभव को साझा किया, जब हथियारबंद तालिबानियों के बीच रहकर अनहोनी की आशंका से घिरे हुए थे। सबकी सांसें एक तरह से ठहरी हुई थीं।

3 खोजी श्वान आए, दूतावास की सुरक्षा में थे तैनात-
अफगानिस्तान से राजनयिकों व अन्य को लेकर भारत आए विमान में तीन खोजी श्वान भी थे। ये काबुल में भारतीय दूतावास की सुरक्षा में तैनात थे। इनका नाम माया, रूबी व बॉबी है। कमांडो की टुकड़ी के साथ ये मंगलवार को गाजियाबाद के हिंडन वायुसेना अड्डे पर उतरे थे।

जैसे-जैसे रात होती गई, बेचैनी भी बढ़ती गई...
मंडल कहते हैं, तालिबान के कब्जे के बाद काबुल में स्थिति काफी भयावह हो गई थी। 15 अगस्त को काबुल से एयर इंडिया की अंतिम उड़ान को विदाई देने के बाद मैं हवाई अड्डे के कार्यालय लौट आया था। मैंने अपने ड्राइवर को खुद को लेने के लिए बुलाया। लेकिन ड्राइवर ने अवरुद्ध सड़कों और शहर में तनावपूर्ण माहौल का हवाला देते हुए आने में असमर्थता व्यक्त की। इससे दिमाग में अनिश्चितता के बादल छा गए। किस्मत से उन्हें हवाई अड्डे पर एक भारतीय दूतावास की कार मिली, जो एक अधिकारी को लेने आई थी। वह तुरंत उसमें बैठ गए। इस कार में दूतावास के अधिकारी थे, जो ड्यूटी पर थे। उनके साथ भारतीय दूतावास आया, जहां एक और हैरानी मेरा इंतजार कर रही थी। दूतावास में लंंबे कुर्ते पहने कई तालिबानी हथियारों के साथ बैठे थे। अहसास हो गया था कि बचना आसान नहीं होगा।

मंडल के अनुसार, दूतावास में एक और तालिबानी की बातें सुनकर हैरानी हुई। उसने कहा था, हम आपको कोई नुकसान नहीं पहुंचाएंगे। आप क्यों वापस जाना चाह रहे हैं, आप लोग यहीं रुकें। हम आपकी सुरक्षा करेंगे। तालिबानियों की यह बात थोड़ी राहत पहुंचाने वाली थी, लेकिन अंदरूनी तौर पर दहशत बढ़ गई थी। जैसे-जैसे रात होती गई, बेचैनी भी बढ़ती गई। 16 अगस्त को उन्हें और दूतावास के अन्य अधिकारियों को बताया गया कि उन्हें हवाई अड्डे तक ले जाया जाएगा। लेकिन तालिबानियों से आगे की कोई भी जानकारी नहीं मिलने से समय काटना बहुत ही कठिन था। अंत में आधी रात के आसपास तालिबानी बोले, हम हवाई अड्डे की ओर जा रहे हैं, इसलिए पांच मिनट में अपना सामान पैक करें। सभी कारों की ओर दौड़ पड़े। करीब 24 कारों (लैंड क्रूजर) में अधिकारियों के साथ एक तालिबानी वाहन भी था।

सात किमी पहुंचने में चार घंटे लगे -
मंडल बताते हैं, दूतावास से एयरपोर्ट तक का 7-8 किमी का सफर कभी खत्म नहीं होता मालूम हो रहा था। इस दूरी को तय करने में चार घंटे लग गए। तालिबानियों ने अनेक जगह जांच के लिए कारों को रोका। हम एयरपोर्ट के उस हिस्से में पहुंच गए, जहां भारतीय वायुसेना का विमान सभी को स्वदेश ले जाने के लिए तैयार था। तालिबानियों के कब्जे से निकल कर स्वदेश की राह पकडऩा हमारे लिए सुकून भरा था।