
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी (ANI Photo)
TMC 20 MPs letter Lok Sabha Speaker: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने TMC पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जब पार्टी मजबूत स्थिति में थी, तब उसने कांग्रेस के विधायकों से लेकर पंचायत प्रतिनिधियों तक को अपने पाले में लाकर कांग्रेस को कमजोर करने की रणनीति अपनाई थी। उन्होंने कहा कि अब वही तरीका उल्टा पड़ रहा है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि BJP इस राजनीतिक स्थिति को अपने लिए सुनहरा अवसर मान रही है।
TMC की बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया कि TMC के कुल 20 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर NDA को समर्थन देने की इच्छा जताई है। काकोली घोष दस्तीदार ने कहा, 'TMC के कुल 20 सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को औपचारिक रूप से पत्र लिखकर NDA को समर्थन देने की इच्छा जताई है।
अधीर रंजन चौधरी ने आरोप लगाया कि जब TMC मजबूत स्थिति में थी, तब उसने कांग्रेस के नेताओं और जनप्रतिनिधियों को अपने पाले में लाने की नीति अपनाई थी। उन्होंने कहा कि उनकी TMC रणनीति हमारे कांग्रेस विधायकों से लेकर चुने हुए पंचायत प्रतिनिधियों तक, सभी को अपनी पार्टी में शामिल करने की थी, ताकि कांग्रेस को पूरी तरह खत्म करके उसके सदस्यों को अपने साथ मिला लिया जाए। उस समय, TMC में शामिल होने वालों के लिए यह बात फैलाई गई थी कि बंगाल के विकास और तरक्की के लिए उन्हें ममता बनर्जी का साथ देना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि अब, जब वे खुद पार्टी छोड़कर जा रहे हैं, तो वे उसी पुरानी बात को दोहरा रहे हैं। बस इस बार वे बंगाल की तरक्की को देश की तरक्की से जोड़ रहे हैं। उन्होंने ये तरीके ममता बनर्जी और उनकी पार्टी से ही सीखे थे। अधीर रंजन का कहना है कि जो तरीका पहले TMC ने दूसरे दलों के नेताओं को अपने साथ जोड़ने के लिए अपनाया था, अब वही तरीका उसके खिलाफ इस्तेमाल हो रहा है।
कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि BJP इस स्थिति को अपने लिए एक बड़े राजनीतिक अवसर के रूप में देख रही है। BJP इस मौके का इस्तेमाल संसद में अपने लंबित विधेयकों को आगे बढ़ाने के लिए कर सकती है। उन्होंने कहा, 'BJP का मानना है कि उसे सभी लंबित बिलों को पारित कराने के लिए इस सुनहरे मौके का फायदा उठाना चाहिए। शुरू में वे कहते थे कि वे भ्रष्ट लोगों के साथ नहीं जुड़ेंगे, फिर भी उन्होंने इसे समर्थन हासिल करने का जरिया बना लिया।'
बागी सांसदों की संख्या इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। संविधान की 10वीं अनुसूची दल-बदल विरोधी कानून के तहत किसी दल के कम से कम दो-तिहाई सांसद यदि अलग गुट बनाते हैं, तो उन्हें अयोग्यता से राहत मिल सकती है। लोकसभा में TMC के 28 सांसद हैं। ऐसे में कानूनी रूप से सुरक्षित स्थिति हासिल करने के लिए कम से कम 19 सांसदों का समर्थन जरूरी माना जाता है।
Published on:
09 Jun 2026 08:08 pm
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