
टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी की बढ़ रही मुश्किलें (Photo-IANS)
TMC Political Crisis 2026: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) इस समय अपने सबसे बड़े राजनीतिक संकट से गुजर रही है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। हाल ही में पार्टी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसदों ने बगावत कर दी और खुद को पार्टी से अलग कर लिया।
इसके बाद बंगाल की एक छोटी पार्टी नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय की घोषणा कर दी। इन सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर अलग गुट के रूप में मान्यता देने की मांग की है। साथ ही सदन में एनडीए का समर्थन देने की बात भी कही है।
इसके जवाब में अभिषेक बनर्जी ने शुक्रवार को लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर बागी सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग वाली याचिका सौंपी।
लोकसभा सांसदों से पहले विधानसभा में चुनाव में मिली हार के बाद विद्रोह सामने आया था। टीएमसी के 80 विधायकों में से करीब 60 विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में अगल गुट बना लिया। पार्टी नेतृत्व द्वारा नेता प्रतिपक्ष के लिए चुने गए शोभनदेव चट्टोपाध्याय का विरोध करते हुए ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता घोषित कर दिया।
इन घटनाओं ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली TMC के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा कर दिया है, लेकिन सबसे अधिक दबाव अभिषेक बनर्जी पर दिखाई दे रहा है।
बागी सांसदों और विधायकों के निशाने पर अभिषेक बनर्जी है। इनका आरोप है कि अभिषेक बनर्जी की एकतरफा कार्यशैली, अहंकार और पार्टी नेताओं से दूरी ही इस विद्रोह की मुख्य वजह है।
बता दें कि मई में विधानसभा चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी ने समीक्षा बैठक बुलाई थी। इस दौरान कई विधायकों ने खुलकर चुनावी हार के लिए अभिषेक के नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया था।
बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि वे ममता बनर्जी का सम्मान करते हैं, लेकिन अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को स्वीकार नहीं करेंगे।
TMC के वरिष्ठ नेता और सांसद कल्याण बनर्जी ने भी अभिषेक बनर्जी के अहंकारी रवैये पर सवाल उठाए थे। उन्होंने यहां तक कह दिया था कि ममता बनर्जी को तय करना होगा कि वे अभिषेक के साथ खड़ी हैं या उन नेताओं के साथ जो उनसे नाराज हैं। हालांकि बाद में कल्याण बनर्जी और अभिषेक के बीच मतभेद कम होते दिखाई दिए।
चुनाव नतीजों के बाद कोलकाता नगर निगम ने अभिषेक बनर्जी, उनके परिवार और उनकी कंपनी लीप्स एंड बाउंड्स से जुड़े 17 परिसरों को कथित अवैध निर्माण के मामले में नोटिस जारी किए हैं।
इसके अलावा चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए कुछ कथित भड़काऊ बयानों को लेकर भी उनके खिलाफ मामले दर्ज हुए हैं, जिनकी जांच सीआईडी कर रही है।
अभिषेक का नाम कथित कोयला और पशु तस्करी मामलों में भी सामने आ चुका है। इन मामलों में सीबीआई और ईडी कई बार उनसे पूछताछ कर चुकी हैं।
8 जून को विपक्षी गठबंधन INDIA की बैठक में हिस्सा लेने के बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी से मुलाकात की, जबकि अभिषेक बनर्जी ने राहुल गांधी से मुलाकात की।
इन बैठकों के बाद अटकलें तेज हो गई हैं कि मौजूदा संकट से निकलने के लिए TMC कांग्रेस के साथ अपने रिश्तों को और मजबूत कर सकती है।
अभिषेक बनर्जी ने 2014 में डायमंड हार्बर सीट से जीत के साथ अपनी चुनावी राजनीति की शुरुआत की थी। बाद में वे पार्टी में तेजी से मजबूत हुए, लेकिन उनकी बढ़ती ताकत से कई वरिष्ठ नेता असहज हो गए। शुभेन्दु अधिकारी और मुकुल रॉय जैसे कई बड़े नेता अभिषेक के बढ़ते प्रभाव को स्वीकार नहीं कर सके और पार्टी छोड़कर भाजपा में चले गए।
2021 के विधानसभा चुनाव में राजनीतिक रणनीतिकार संस्था I-PAC के जरिए TMC को बड़ी जीत मिली थी, लेकिन पार्टी में I-PAC की बढ़ती भूमिका और अभिषेक के बढ़ते प्रभाव ने पुराने नेताओं और नए नेतृत्व के बीच दूरी भी बढ़ा दी।
Published on:
21 Jun 2026 11:06 am
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