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West Bengal By Election 2026: ममता बनर्जी की TMC में टूट के बाद पहला बड़ा इम्तिहान, नंदीग्राम-रेजीनगर में किसका बढ़ेगा दबदबा?

West Bengal By Election 2026: तृणमूल कांग्रेस के टुकड़े होने के बाद पश्चिम बंगाल के दो विधानसभा क्षेत्रों में छह अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव का महत्व बढ़ गया है। भाजपा विरोधी दलों के लिए खुद को विपक्ष के मुख्य चेहरे के रूप में स्थापित करने की बड़ी सियासी लड़ाई शुरू हो गई है।
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भारत

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kamlesh sharma

Sep 23, 2026

Nandigram Bypoll 2026

बंगाल की पूर्व सीएम ममता बनर्जी (Photo-ANI)

West Bengal By Election 2026 : कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस के टुकड़े होने के बाद पश्चिम बंगाल के दो विधानसभा क्षेत्रों में छह अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव का महत्व बढ़ गया है। भाजपा विरोधी दलों के लिए खुद को विपक्ष के मुख्य चेहरे के रूप में स्थापित करने की बड़ी सियासी लड़ाई शुरू हो गई है। एक ओर जहां कांग्रेस और वामदल राज्य में अपनी खोई हुई सियासी जमीन वापस पाने की कोशिशों में जुटे हैं।

वहीं, दूसरी तरफ तृणमूल के दोनों गुटों में खुद को भाजपा के मुख्य प्रतिद्वंद्वी के तौर पर स्थापित करने की होड़ मची हुई है। पूर्व मेदिनीपुर के नंदीग्राम और मुर्शिदाबाद के रेजीनगर में होने वाले उपचुनाव से यह भी साफ हो जाएगा कि कौन-सा राजनीतिक दल उन मतदाताओं की आवाज बनकर उभरता है, जो सत्ताधारी भाजपा के तो खिलाफ हैं, लेकिन तृणमूल के साथ भी नहीं हैं। ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल 1990 के दशक के अंत में अपनी स्थापना के बाद से सबसे बड़े सियासी संकट से गुजर रही है।

मतदाताओं को फिर से अपने पाले में लाने की कोशिश

निर्वाचन आयोग ने उपचुनाव के लिए तृणमूल कांग्रेस के किसी भी गुट को पार्टी के नाम और जोड़ा फूल चुनाव चिह्न के इस्तेमाल की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। आयोग ने ममता गुट को ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस नाम और फुटबॉल खिलाड़ी चुनाव चिह्न आवंटित किया है, जबकि अरूप रॉय और ऋतुव्रत बनर्जी नीत बागी गुट को डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस नाम और लिफाफा चुनाव चिह्न दिया गया है।

ममता बनर्जी और अरूप रॉय के नेतृत्व वाले गुटों के बीच पार्टी की संगठनात्मक और चुनावी विरासत पर नियंत्रण को लेकर जारी खींचतान के बीच, कांग्रेस और वामपंथी दल उन मतदाताओं को फिर से अपने पाले में लाने की कोशिश कर रहे हैं, जिन्हें उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के हाथों गंवा दिया था। विपक्षी मतों में विभाजन का फायदा भाजपा को मिल रहा है।

दूसरे स्थान पर रहने वाली पार्टी पर नजर

राजनीतिक विश्लेषक विश्वनाथ चक्रवर्ती कहते हैं कि यह उपचुनाव इस बारे में है कि कौन-सा दल भाजपा के मुख्य प्रतिद्वंद्वी के तौर पर उभरता है। नंदीग्राम में भाजपा मजबूत स्थिति में है और यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन-सी पार्टी दूसरे स्थान पर रहती है। ममता गुट ने नंदीग्राम से संचिता प्रधान दे को चुनाव मैदान में उतारा था। हालांकि, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद संचिता उपचुनाव से पीछे हट गईं। इसके बाद ममता ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान के समर्थन की घोषणा की।

हालांकि, प्रधान को नंदीग्राम में 2007 में हुए भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन के दौरान उनके खिलाफ दर्ज मामलों के सिलसिले में गिरफ्तार कर लिया गया। अदालत ने प्रधान को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। चक्रवर्ती ने कहा कि अलपसंख्यकों के दबदबे वाले रेजीनगर में उपचुनाव के नतीजों से यह संकेत मिलने की संभावना है कि विधानसभा चुनावों के बाद अल्पसंख्यक मतदाताओं का रुझान किस तरफ है।