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Tumba Farming Rajasthan: रेगिस्तान का ‘कड़वा सोना’ बदलेगा किसानों की तकदीर! तुम्बा से कमाई की नई उम्मीद

ICAR Research 2026: रेगिस्तान में बिना ज्यादा संसाधनों के उगने वाली इस बेल का सही इस्तेमाल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकता है। सवाल यह है कि प्राकृतिक रूप से उपलब्ध तुम्बा को बाजार तक पहुंचाने के लिए किसानों को किन तैयारियों की जरूरत होगी?
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भारत

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Manoj Vashisth

•

Oct 12, 2026

Tumba Farming Rajasthan

Tumba Farming Rajasthan: तुम्बा की खेती (फोटो सोर्स:@Cotton Farmers Official)

Rajasthan Desert Farming: राजस्थान के रेतीले धोरों में उगने वाला तुम्बा अब तक भले ही आम लोगों के लिए एक जंगली और कड़वा फल रहा हो, लेकिन आने वाले समय में यही वनस्पति किसानों की आमदनी बढ़ाने का माध्यम बन सकती है। भीषण गर्मी, पानी की कमी और कमजोर मिट्टी में भी जीवित रहने वाला यह पौधा उन इलाकों के लिए खास उम्मीद जगाता है, जहां पारंपरिक खेती करना चुनौतीपूर्ण है। वैज्ञानिक शोध ने इसके औषधीय महत्व और व्यावसायिक संभावनाओं की ओर ध्यान खींचा है।

खेती की मुश्किलों के बीच प्रकृति का अनमोल विकल्प

राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में प्राकृतिक रूप से उगने वाला तुम्बा अब किसानों की अतिरिक्त कमाई का जरिया बन सकता है। कड़वे फल वाली इस जंगली बेल को स्थानीय स्तर पर इंद्रायण भी कहा जाता है। कम पानी, अत्यधिक तापमान और कम उपजाऊ मिट्टी में जीवित रहने की क्षमता के कारण यह शुष्क क्षेत्रों के लिए उपयोगी फसल बन सकती है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आइसीएआर) का इंडियन हार्टिकल्चर के सितंबर-अक्टूबर 2026 के अंक में पब्लिश रिसर्च में तुम्बा की औषधीय उपयोगिता और आर्थिक संभावनाओं को रेखांकित किया गया है।

शोध के अनुसार, तुम्बा शुष्क और अर्द्धशुष्क पारिस्थितिकी तंत्र में पाया जाने वाला कम उपयोग में लिया जाने वाला औषधीय पौधा है। यह सूखे और अत्यधिक गर्मी को सहन कर सकता है तथा कम उर्वरता वाली जमीन में भी उगने की क्षमता रखता है। ऐसे गुण पश्चिमी राजस्थान जैसे क्षेत्रों में इसके व्यवस्थित उत्पादन की संभावनाएं बढ़ाते हैं।

औषधीय गुणों पर वैज्ञानिक रुचि

शोध के अनुसार तुम्बा में विभिन्न जैव सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं। इसके अर्क में मधुमेहरोधी, रेचक, सूजनरोधी और रोगाणुरोधी गुणों की संभावनाएं सामने आई हैं। आयुर्वेद और अन्य पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में भी इसका उपयोग होता रहा है। हालांकि, इन गुणों को आधुनिक चिकित्सा में प्रमाणित उपचार मानने से पहले प्रभावशीलता, सुरक्षित मात्रा और दुष्प्रभावों का वैज्ञानिक आकलन जरूरी है। मधुमेह या किसी अन्य बीमारी के इलाज में इसका इस्तेमाल चिकित्सकीय सलाह के बिना नहीं करना चाहिए।

किसानों के लिए ऐसे खुलेगा कमाई का रास्ता

तुम्बा की व्यावसायिक खेती को बढ़ावा देने से प्राकृतिक रूप से उपलब्ध इस वनस्पति का आर्थिक मूल्य बढ़ सकता है। इसके लिए उपयुक्त किस्मों, खेती की तकनीक, उपज, प्रसंस्करण और बाजार की मांग पर काम करना होगा। औषधीय पौधों के उपयोगी घटकों का मूल्यवर्धन होने पर किसानों और स्थानीय स्तर पर काम करने वाले लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बन सकते हैं।