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शक्ति की पूजा, पर बोर्डरूम अब भी ‘पुरुषों का क्लब’, टॉप 50 कंपनियों के 531 डायरेक्टरों में सिर्फ 106 महिलाएं

women on company boards: टॉप 50 कंपनियों के 531 डायरेक्टरों में सिर्फ 106 महिलाएं, यानी 19.96%। कानून बनने के 13 साल बाद भी बोर्डरूम में महिलाओं की हिस्सेदारी कम है। जानें पूरी रिपोर्ट।
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कंपनियों के बोर्डरूम में महिलाओं की भागेदारी (प्रतिकात्मक तस्वीर -AI)

Women Directors in the Boardroom: नवरात्र पर घरों में शक्ति की पूजा की जा रही है लेकिन जिन कंपनियों के प्रोडक्ट हम रोज इस्तेमाल करते हैं, उनके बोर्डरूम के फैसलों में महिलाओं की आवाज आज भी बहुत धीमी है। बीएसई में सूचीबद्ध देश की टॉप 50 कंपनियों में औसतन हर पांच डायरेक्टर में एक महिला भी नहीं है। जो महिलाएं बोर्ड में हैं, उनमें भी ज्यादातर कंपनी के मालिकों के परिवार से हैं। भागीदारी बढऩे की मौजूदा रफ्तार यही रही तो बोर्ड में 30 फीसदी महिलाओं का लक्ष्य पाने के लिए 2058 तक इंतजार करना पड़ेगा।

साल 2013 में भारत का नया कंपनी कानून बना। इसमें प्रावधान किया गया कि शेयर बाजार में सूचीबद्ध सभी कंपनियों और 100 करोड़ रुपए की पूंजी या 300 करोड़ रुपए या अधिक टर्नओवर वाली कंपनियों के बोर्ड में कम से कम एक महिला डायरेक्टर जरूर हो। पुरानी कंपनियों को इसके लिए एक साल और नई कंपनियों को छह माह की मोहलत दी गई। वर्ष 2018 में सेबी ने कहा कि टॉप 500 सूचीबद्ध कंपनियों में अप्रेल 2019 तक और टॉप 1,000 कंपनियों में अप्रेल 2020 तक कम से कम एक स्वतंत्र महिला डायरेक्टर होनी चाहिए। इसके बावजूद अपेक्षित बदलाव नहीं आया।

531 डायरेक्टर, 106 ही महिलाएं

हकीकत समझने के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय के दयाल सिंह कॉलेज के तीन प्रोफेसरों डॉ. शेषपाल सिंहमार, डॉ. शालिनी अग्रवाल और डॉ. कनिका बजाज ने अप्रेल 2026 तक के आंकड़ों का गहराई से विश्लेषण किया। नतीजे बताते हैं कि कानून बनने के 13 साल बाद भी देश के कॉर्पोरेट बोर्डरूम पुरुषों का क्लब बने हुए हैं। अप्रेल 2026 तक 50 कंपनियों में कुल 531 डायरेक्टर थे, जिनमें केवल 106 महिलाएं थीं, यानी 19.96 फीसदी।

एलएंडटी, एलआइसी में अनुपात सबसे खराब

  • लार्सन एंड टुब्रो: देश की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग कंपनियों में से एक के 17 डायरेक्टरों में सिर्फ एक महिला।
  • एलआइसी और एनटीपीसी: दोनों में 13 में से एक-एक महिला।
  • एसबीआइ: सबसे बड़े बैंक में 12 में से एक।
  • ओएनजीसी: तेल क्षेत्र की दिग्गज कंपनी में 11 में से एक।
  • रिलायंस इंडस्ट्रीज: 14 डायरेक्टरों में दो महिलाएं।

यहां 50 फीसदी महिलाएं

  • हालांकि कंपनियों ने मिसाल भी कायम की है। एचसीएल टेक, हिंदुस्तान जिंक और इटर्नल (पहले जोमैटो) में 50 फीसदी डायरेक्टर महिलाएं हैं।

बाकी दुनिया: दो तरह के देश

  1. सख्ती वाले देश: कोटा पूरा नहीं तो डीलिस्टिंग तक
  • नॉर्वे: 2003 से सूचीबद्ध कंपनियों में 40 फीसदी महिला डायरेक्टर अनिवार्य। नियम न मानने पर कंपनी को स्टॉक एक्सचेंज से डीलिस्ट तक किया जा सकता है।
  • फ्रांस: 2022 में बड़ी कंपनियों में 40 फीसदी महिला डायरेक्टर का कानून बना, जिसके लिए 2031 तक का लक्ष्य दिया है। पालन न करने पर जुर्माना, बोर्ड नियुक्तियां रद्द करने और डायरेक्टरों की फीस रोकने के प्रावधान हैं।
  • अन्य देश: बेल्जियम, जर्मनी, नीदरलैंड्स, फिनलैंड और ऑस्ट्रिया जैसे देशों में महिला डायरेक्टरों का तय कोटा पूरा न होने पर उस पद पर कोई भी नियुक्ति मान्य नहीं होती।
  1. बड़े देश, दिखावटी नियम

-ब्रिटेन: 2025 तक 40 फीसदी महिला प्रतिनिधित्व का लक्ष्य, लेकिन सजा या जुर्माने का प्रावधान नहीं।
-अमरीका: सूचीबद्ध कंपनी में दो विविधता वाले डायरेक्टर रखने का प्रावधान था, जिनमें एक महिला जरूरी थी। अपीलीय अदालत ने दिसंबर 2024 में इसे रद्द कर दिया।
-जापान: टोक्यो स्टॉक एक्सचेंज की सूचीबद्ध कंपनियों के लिए 2030 तक 30 फीसदी महिला अधिकारियों का लक्ष्य तय, लेकिन सजा का प्रावधान नहीं।