
सीपीआई (एम) सांसद जॉन ब्रिटास (फोटो-IANS)
Digital Payment: UPI के 2,000 रुपये से ज्यादा के कारोबारी लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने के फैसले को लेकर विवाद बढ़ गया है। इसी बीच CPI(M) सांसद जॉन ब्रिटास ने कहा कि जनता, व्यापारी संगठनों के साथ-साथ संघ परिवार के संगठन भी यूपीआई पर लगाए गए चार्ज को वापस लेने का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने इसका विरोध करते हुए कहा कि इसका बोझ आखिरकार दुकानदारों के जरिए ग्राहकों पर ही पडे़गा।
उन्होंने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटलाइजेशन पर जोर देने के कारण जनता ने इसे अपनाया। साथ ही उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने न केवल घरेलू बैठकों में बल्कि जी20 जैसे मंच पर भी यह कहा था कि यूपीआई पर कोई चार्ज नहीं लगेगा यह मुफ्त रहेगा। फिर इस पर चार्ज क्यों लगाया गया? इससे पहले वित्त मंत्री ने कहा था कि UPI लेनदेन पर ग्राहकों को कोई शुल्क नहीं देना होगा।
ब्रिटास ने कहा कि सरकार का कहना है कि सिर्फ 4 फीसदी लेनदेन ही नए शुल्क के दायरे में आएंगे। लेकिन उनके मुताबिक ये 4 फीसदी लेनदेन कुल लेनदेन की करीब 67 फीसदी रकम के बराबर हैं। मौजूदा ढांचे के अनुसार 2,000 रुपये से ऊपर के कुछ मर्चेंट UPI लेनदेन पर 0.4 फीसदी MDR लागू होगा।
ब्रिटास ने यह भी आरोप लगाया कि इस फैसले के पीछे अमेरिका का दबाव है। उनका दावा है कि यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव ने ऑन रिकॉर्ड कहा है कि भारत को एमडीआर चार्ज लगाने चाहिए। इसी दबाव के कारण भारत ने UPI पर MDR लगाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अमेरिकी कंपनियों के हितों के आगे झुक गई है।
UPI के नए MDR ढांचे को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में PIL दाखिल की गई है। याचिका में सरकार, वित्त मंत्रालय, RBI और NPCI को पक्ष बनाया गया है। याचिकाकर्ता ने MDR व्यवस्था और इससे जुड़े नोटिफिकेशन को रद्द करने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि इसका आर्थिक बोझ आखिरकार आम लोगों पर पड़ सकता है।
Updated on:
18 Sept 2026 09:22 pm
Published on:
18 Sept 2026 09:22 pm
