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UPI पेमेंट पर 15 अक्टूबर से नया MDR नियम, ग्राहकों से चार्ज वसूलने पर बैंकों की होगी नजर

UPI MDR 2026: 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से ज्यादा के चुनिंदा UPI मर्चेंट पेमेंट पर 0.4% MDR लागू होगा। जानें ग्राहकों से चार्ज वसूली पर सरकार की निगरानी और नए नियम।
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भारत

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Anurag Animesh

Sep 24, 2026

UPI news

UPI(Photo-IANS)

UPI News: 15 अक्टूबर 2026 से मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर Merchant Discount Rate (MDR) लागू होने जा रहा है। हालांकि, इस शुल्क का बोझ सीधे ग्राहकों पर डालने की अनुमति नहीं होगी। सरकार अब बैंकों के जरिए यह सुनिश्चित करने की व्यवस्था कर रही है कि मर्चेंट MDR की रकम ग्राहकों से न वसूलें। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बैंक मर्चेंट्स की निगरानी करेंगे ताकि UPI ट्रांजैक्शन पर लगने वाला MDR ग्राहकों से अलग से न लिया जाए। भारतीय बैंक संघ (IBA) इस संबंध में एक व्यवस्था तैयार करने वाला है। वित्त मंत्रालय IBA के साथ इस मुद्दे पर चर्चा करेगा। इसके अलावा मर्चेंट्स और कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के साथ भी MDR को लेकर बातचीत की जाएगी।

2,000 रुपये से ऊपर के UPI पेमेंट पर लगेगा MDR

नए नियम के तहत 15 अक्टूबर 2026 से चुनिंदा Person-to-Merchant (P2M) UPI ट्रांजैक्शन पर 2,000 रुपये से ज्यादा की रकम पर 0.4 फीसदी MDR लागू होगा। हालांकि, 75,000 रुपये या उससे अधिक के ट्रांजैक्शन पर MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये रखी गई है। 2,000 रुपये तक के P2M भुगतान और Person-to-Person (P2P) ट्रांजैक्शन पर MDR नहीं लगेगा। मसलन, अगर कोई ग्राहक किसी मर्चेंट को UPI से 6,000 रुपये का भुगतान करता है तो 0.4 फीसदी के हिसाब से MDR 24 रुपये होगा। यह शुल्क मर्चेंट की ओर से वहन किया जाना है, ग्राहक से सीधे वसूलने का प्रावधान नहीं है।

ग्राहकों से MDR वसूलने पर होगी निगरानी

सरकार की कोशिश है कि MDR लागू होने के बाद मर्चेंट इस लागत को ग्राहकों पर न डालें। इसके लिए बैंकों और पेमेंट इकोसिस्टम के दूसरे हिस्सेदारों के जरिए निगरानी की व्यवस्था तैयार की जा रही है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि MDR ग्राहक पर लगाया जाने वाला UPI चार्ज नहीं है। हालांकि, मर्चेंट संगठनों की ओर से इस बात को लेकर चिंता जताई गई है कि कम मार्जिन वाले कारोबारियों के लिए MDR की लागत को वहन करना मुश्किल हो सकता है। कुछ रिटेल संगठनों ने आशंका जताई है कि कारोबारी इस लागत को कीमतों या दूसरे तरीकों से ग्राहकों तक पहुंचाने की कोशिश कर सकते हैं।

MDR का पैसा सरकार को नहीं मिलेगा

MDR से मिलने वाली रकम सीधे सरकार के खाते में नहीं जाएगी। इसे UPI इकोसिस्टम में शामिल अलग-अलग हिस्सेदारों के बीच बांटा जाएगा, जिनमें बैंक और अन्य भुगतान सेवा प्रदाता शामिल हैं। इसका उद्देश्य डिजिटल पेमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर और UPI इकोसिस्टम को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाना है। वहीं, MDR पर GST लागू होने का मुद्दा अलग है। GST काउंसिल इस पर आगे फैसला ले सकती है। रिपोर्टों के मुताबिक, MDR पर GST को लेकर कारोबारियों के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट की व्यवस्था भी लागू हो सकती है।

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