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उज्जैन के हरसिद्धि मंदिर में क्यों जलाए जाते हैं हजारों दीप? राजा विक्रमादित्य और मां सती से जुड़ी है मान्यता

Harsiddhi Temple Ujjain: उज्जैन का मां हरसिद्धि मंदिर 51 शक्तिपीठों में शामिल है। मान्यता है कि यहां माता सती की कोहनी गिरी थी। जानिए राजा विक्रमादित्य से जुड़ी कथाएं, मंदिर के दो विशाल दीपस्तंभ, मराठा वास्तुकला और शारदीय नवरात्र में होने वाले विशेष अनुष्ठानों का महत्व।
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Harsiddhi Mata

हरसिद्धि मंदिर, उज्जैन

Harsiddhi Mata Mandir: शक्ति की आराधना के महापर्व शारदीय नवरात्र में बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में मां हरसिद्धि मंदिर का विशेष महत्व है। देश के 51 शक्तिपीठों में से एक इस धाम में माता सती की कोहनी गिरी थी, जिससे यह स्थान सनातन आस्था का एक प्रमुख केंद्र बन जाता है। पौराणिक मान्यताओं और इतिहास के पन्नों में रचे-बसे इस मंदिर की महिमा निराली है।

क्या है मान्यता?


पुजारी राजू गोस्वामी ने बताया कि यह मंदिर उज्जयिनी के प्रतापी और न्यायप्रिय सम्राट विक्रमादित्य की आराध्या देवी मां हरसिद्धि का दरबार है। राजा विक्रमादित्य मां के अनन्य भक्त थे। किंवदंतियों के अनुसार राजा ने माता को प्रसन्न करने के लिए अपने जीवनकाल में 11 बार अपना शीश काटकर अर्पित किया था और माता की कृपा से हर बार उनका शीश पुन: जुड़ जाता था। मंदिर परिसर में उस त्याग और बलिदान की गाथा आज भी जीवंत है। शक्तिपीठ होने के कारण इस मंदिर का महत्व बढ़ जाता है। यहां जो भी आता है उसकी मनोकामनापूर्ण होती है। इस मंदिर और देवी का पुराणों में उल्लेख मिलता है। यहां की देवी का तांत्रिक महत्व भी है। यहां श्रीसूक्त और वेदोक्त मंत्रों के साथ पूजा होती है।

मंदिर की विशेषताएं


दो विशाल दीपस्तंभ: मंदिर प्रांगण में दो भव्य और प्राचीन दीपस्तंभ (दीपावली स्तंभ) स्थित हैं, जिन पर हजारों दीप प्रज्ज्वलित किए जाते हैं। नवरात्रि के दिनों में इन दीपस्तंभों का जगमगाता हुआ स्वरूप देखते ही बनता है।

मराठा कालीन वास्तुकला: वर्तमान मंदिर का जीर्णोद्धार मराठा काल के दौरान हुआ था, जिसकी वास्तुकला मराठा शैली की सुंदर झलक पेश करती है।

विशेष अनुष्ठान होते हैं


नवरात्र के दौरान यहां प्रतिदिन विशेष श्रृंगार, महाआरती और अनुष्ठान होते हैं, जिसके दर्शन के लिए देश-कोने से लाखों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। महाकाल की नगरी आने वाले श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के साथ-साथ मां हरसिद्धि के दरबार में हाजिरी लगाना अवश्य पूर्ण मानते हैं, जहां आज भी दिव्यता और आध्यात्मिकता का अनूठा संगम देखने को मिलता है।

हरसिद्धि मंदिर की खास बातें और महत्व

हरसिद्धि मंदिर की चारदीवारी के अंदर 4 प्रवेश द्वार हैं। मंदिर का मुख्य द्वार पूर्व दिशा की ओर है। जिस पर सुंदर बंगले बने हुए हैं। बंगले के निकट दक्षिण-पूर्व के कोण में एक बावड़ी बनी हुई है, जिसके अंदर एक स्तंभ है। यहां श्रीयंत्र बना हुआ स्थान है। इसी स्थान के पीछे भगवती अन्नपूर्णा की सुंदर प्रतिमा है। मंदिर के पूर्व द्वार से लगा हुआ सप्तसागर रुद्रसागर तालाब है। रुद्रसागर के सुरम्य तट पर चारों ओर मजबूत प्रस्तर दीवारों के बीच यह सुंदर मंदिर बना हुआ है। मंदिर के ठीक सामने दो बड़े दीप-स्तंभ खड़े हुए हैं। नवरात्र के अलावा वर्तमान में वर्षभर इन पर दीप मालाएं लगाई जाती हैं। मंदिर के पीछे 84 महादेव में सर्वप्रथम क्रम पर आने वाले अगस्तेश्वर महादेव और संतोषी माता का प्राचीन सिद्ध स्थान है।