
आस्था कुंज पार्क की टूटी दीवारें और अंधेरा बनी अपराधियों की ढाल (Photo: IANS)
Delhi Gangrape Case: दिल्ली के प्रसिद्ध कालकाजी मंदिर के पास स्थित 142 एकड़ में फैले आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ हुई गैंगरेप की घटना ने पूरे इलाके को दहला कर रख दिया है। इस वारदात के बाद पार्क की सुरक्षा व्यवस्था पर फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस के अनुसार, सोमवार शाम करीब 7:30 से 8:30 बजे के बीच तीन आरोपियों ने फर्जी पुलिस बनकर वारदात को अंजाम दिया। तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया है। जांच के दौरान पुलिस को यह भी पता चला है कि आरोपियों ने इसी पार्क में पहले भी ऐसी वारदातों को अंजाम दिया है। हालांकि, पहले की घटनाओं में बदनामी के डर से किसी पीड़िता ने पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं कराई।
करीब 142 एकड़ में फैला आस्था कुंज पार्क दिल्ली के बड़े और हरियाली से घिरे पार्कों में शामिल है। इसमें आने-जाने के लिए कुल 29 गेट है। दिन के समय यहां बड़ी संख्या में लोग टहलने और समय बिताने आते हैं। लेकिन शाम ढलने के बाद पार्क के कई हिस्सों में घना अंधेरा छा जाता है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि रात के समय पार्क के सुनसान और अंधेरे हिस्से असामाजिक तत्वों के लिए सुरक्षित ठिकाने बन जाते हैं। पार्क के आसपास छिनैती और चोरी की कई घटनाएं हो चुकी हैं।
गैंगरेप की घटना के बाद पार्क की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे है। मंगलवार को शाम के समय 'हिंदुस्तान टाइम्स' द्वारा किए गए एक निरीक्षण में पार्क के सात प्रवेश द्वारों में से केवल एक गेट पर दो सुरक्षाकर्मी दिखाई दिए। गेट नंबर-1 पर एक गार्ड तैनात था, जबकि गेट नंबर-3 के पास भी एक सुरक्षाकर्मी मौजूद था। गेट नंबर-3 उस स्थान से कुछ दूरी पर है, जहां कथित गैंगरेप की घटना हुई थी।
इस निरीक्षण के दौरान गेट नंबर-3 के आसपास अंधेरा भी पाया गया। एक अन्य सुरक्षाकर्मी मोटरसाइकिल से पार्क के भीतर गश्त करता दिखाई दिया। वह सुनसान जगहों पर बैठे लोगों को वहां से हटकर रोशनी वाले और खुले स्थानों पर जाने के लिए कह रहा था।
हालांकि, दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अलग जानकारी दी है। DDA के मुताबिक, पार्क में कुल 27 सुरक्षाकर्मी तैनात हैं और वे तीन शिफ्टों में काम करते हैं। हर समय कम से कम नौ गार्ड ड्यूटी पर होने चाहिए।
एक सुरक्षाकर्मी के मुताबिक, 142 एकड़ में फैले इतने बड़े और घने पार्क के हर हिस्से पर लगातार निगरानी रखना बेहद मुश्किल है। उसने बताया कि पार्क में आने वाले कुछ लोग सुनसान और कम रोशनी वाले हिस्सों में बैठते हैं। ऐसे लोगों को वहां से हटाने पर कई बार वह सुरक्षाकर्मियों से ही भिड़ जाते हैं।
सुरक्षाकर्मियों के पास भी सिर्फ लाठी और टॉर्च ही होती है। पार्क में पुलिस भी गश्त करती है, लेकिन रात के समय अंधेरे और घने पेड़ों वाले हिस्सों में लगातार पेट्रोलिंग करना बेहद कठिन है।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने भी कहा कि पार्क का आकार और घनी हरियाली ऐसी है कि पूरे इलाके में लगातार पुलिसकर्मियों की तैनाती करना मुश्किल है। अधिकारी के अनुसार, पुलिस की तैनाती बढ़ाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन पार्क की सुरक्षा के लिए DDA को टूटी हुई बाहरी दीवारों की मरम्मत और सुरक्षाकर्मियों की संख्या बढ़ाने की जरूरत है।
पुलिस अधिकारी के अनुसार, आस्था कुंज पार्क के आसपास श्रीनिवासपुरी, गढ़ी गांव, गोविंदपुरी, ओखला मंडी और कालकाजी जैसी बस्तियां हैं। इन इलाकों की तरफ पार्क की बाहरी दीवार कई जगह से टूटी हुई है। इसलिए लोग अलग-अलग जगहों से पार्क में आसानी से प्रवेश कर सकते हैं। ऐसे में केवल मुख्य गेटों पर सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त होने से वारदातों को रोकना मुश्किल है।
आस्था कुंज पार्क में सुरक्षा को लेकर सवाल पहली बार नहीं उठे हैं। पिछले साल 26 जून को दो दोस्त पार्क में टहल रहे थे, तभी उन पर दो युवकों ने हमला किया था। उस समय मौके पर पर्याप्त सुरक्षा मौजूद नहीं थी और आरोपी फरार हो गए थे।
घटना के तीन दिन बाद दोनों आरोपियों ने कथित तौर पर एक जॉगर को लूटने की कोशिश की। इस बार पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया था। अब एक साल से अधिक समय बाद नाबालिग से गैंगरेप की घटना ने एक बार फिर पार्क की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पार्क में पहले हुई कथित आपराधिक घटनाओं की भी जानकारी जुटाई जा रही है।
Updated on:
23 Sept 2026 09:49 am
Published on:
23 Sept 2026 09:12 am
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