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‘देश को जेल बनने से बचाने के लिए सलाखों के पीछे हैं उमर खालिद’; अभिनेता प्रकाश राज का बड़ा बयान

Prakash Raj on Umar Khalid: बेंगलुरु में उमर खालिद पर आधारित पुस्तक चर्चा में अभिनेता प्रकाश राज और रामचंद्र गुहा शामिल हुए। प्रकाश राज ने कहा- खालिद देश को जेल बनने से रोकने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

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Prakash Raj on Umar Khalid

उमर खालिद को लेकर अभिनेता प्रकाश राज का बड़ा बयान

Prakash Raj on Umar Khalid: अभिनेता प्रकाश राज ने मंगलवार को बेंगलुरु इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित एक पैनल चर्चा में हिस्सा लिया। यह चर्चा 'उमर खालिद एंड हिज वर्ल्ड' (Umar Khalid and His World) नामक पुस्तक पर आधारित थी। इस दौरान प्रकाश राज ने उमर खालिद की कैद को समाज के लिए एक बड़ा संदेश बताया।

'उमर खालिद हमारे लिए लड़ रहे है'

इसके साथ ही प्रकाश राज ने यह भी कहा कि उमर खालिद देश के हर नागरिक के लिए खड़े थे और संघर्ष कर रहे थे। उन्होंने उमर खालिद की जेल यात्रा पर टिप्पणी करते हुए कहा कि 'उमर खालिद जेल में इसलिए हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पूरा देश जेल न बन जाए।' प्रकाश राज के मुताबिक, उनकी कैद उस समाज के खिलाफ प्रतिरोध का प्रतीक है, जो धीरे-धीरे जेल में तब्दील होता जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जेल जाना खालिद के लिए 'फर्मेंटेशन' यानी निखरने की प्रक्रिया जैसा है, जहां से वे और अधिक गहराई और स्पष्टता के साथ बाहर आएंगे।

'कैसा है उमर खालिद का संसार?'

प्रसिद्ध इतिहासकार और लेखक रामचंद्र गुहा भी इस पैनल चर्चा का हिस्सा रहे। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक उमर खालिद के व्यक्तित्व के आठ अलग-अलग पहलुओं को सामने लाती है। गुहा के मुताबिक, किताब में खालिद को एक विचारक, लेखक और न्याय के प्रति समर्पित नागरिक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने कहा कि जेल की कठिनाइयों के बावजूद उमर खालिद की भावना कभी कमजोर नहीं पड़ी और कैद ने उनकी जिंदगी में कई सकारात्मक बदलाव भी लाए हैं। रामचंद्र गुहा ने इस संग्रह को एक पेचीदा, समझदारी भरी और संतुलित रचना बताया।

सत्ता और 'आजादी' पर कटाक्ष

चर्चा के दौरान प्रकाश राज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनावी बयानों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि एक तरफ शासन के सर्वोच्च नेता वोट के बदले आजादी देने की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जो लोग हकीकत में आजादी के लिए लड़ रहे हैं, उन्हें कैद किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में इतिहासकार जानकी नायर ने भी हिस्सा लिया और उमर खालिद की लेखनी व राजनीतिक संदर्भों पर अपनी राय रखी।