
शिवसेना (यूबीटी) के नेता आनंद दुबे। फोटो- आईएएनएस
Mumbai Politics: शिवसेना (यूबीटी) के नेता आनंद दुबे ने कोलकाता स्थित कालीघाट मंदिर में पूजा करने के बाद पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के मछली खाने, गरबा विवाद और सपा नेता अबू आसिम आजमी की टिप्पणियों को लेकर प्रतिक्रिया दी। आनंद दुबे ने कहा कि चाहे अबू आजमी हों, एआईएमआईएम के वारिस पठान हों या मंत्री नितेश राणे, सभी की भाषा एक जैसी है। सभी नफरत की बात करते हैं।
उन्होंने कहा कि गरबा सनातनियों का पवित्र त्योहार है। इसमें माताएं और बहनें मां की प्रतिमा के सामने नृत्य करती हैं। ऐसे में समझ नहीं आता कि जिस इस्लाम में मूर्ति पूजा की अनुमति नहीं है, वहां आकर वे क्या करेंगे। अबू आजमी की ओर से कहा जा रहा है कि उन्हें गरबा में नहीं जाना चाहिए, तो यह सही बात है। सुवेंदु अधिकारी के मछली खाने को लेकर आनंद दुबे ने कहा कि धीरेंद्र शास्त्री हिंदू और सनातन के कथावाचक हैं।
उनका कहना है कि मंदिर परिसर में सात्विक होकर जाना अच्छा है, जबकि सुवेंदु अधिकारी मंदिर में बैठकर मछली खा रहे हैं। दोनों अपने-अपने तर्क दे रहे हैं। अगर किसी की संस्कृति के अनुसार वह मंदिर में मछली खा रहा है तो उसे क्या कहा जा सकता है और अगर कोई सात्विक रहने की बात कह रहा है तो उसे भी क्या कहा जा सकता है। हमारा मानना है कि इसे विवादित नहीं बनाना चाहिए। सनातन धर्म में सब चलता है। आनंद दुबे ने आगे कहा कि सनातन धर्म में हर व्यक्ति की अपनी भावना है। किसी को पत्थर में भगवान दिखाई देते हैं और किसी को भगवान में भी पत्थर दिखाई देता है। यही हिंदुओं की खूबसूरती है। हिंदू इतना विशाल है कि जो भगवान को नहीं मानता, वह भी हिंदू है।
उन्होंने कहा कि हमारा मानना है कि जीवों का सम्मान होना चाहिए। पर्यावरण को भी हम भगवान की तरह पूजते हैं। पहले साधु-संत वृक्षों से भी बात करते थे, लेकिन अब यह परंपरा धीरे-धीरे विलुप्त हो रही है। कई देशों में जिन पशु-पक्षियों का हम सम्मान करते हैं और भगवान की तरह पूजा करते हैं, उन्हें भी लोग खा जाते हैं। आनंद दुबे ने कहा कि जिसे खाना है, वह खाए। यह उसका व्यक्तिगत विषय है, लेकिन जो नहीं खा रहा है, उसके सामने तो नहीं खाना चाहिए। जो सात्विक है, उसे सात्विक रहने देना चाहिए और जो तामसी है, उसे तामसी रहने दें। एक ही देश में सभी लोग रहते हैं। ब्रिक्स सम्मेलन को लेकर आनंद दुबे ने कहा कि ब्रिक्स कई देशों का समूह है, जिसमें भारत, चीन और रूस जैसे बड़े देश शामिल हैं। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत के साथ रिश्ते बहुत अच्छे हैं। मेरा मानना है कि सकारात्मक चर्चा हो रही है। हमें इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि रूस से हमारे देश को क्या-क्या लाभ मिल सकता है।
Updated on:
12 Sept 2026 05:43 pm
Published on:
12 Sept 2026 05:38 pm
