
धर्मेंद्र प्रधान को हटाने से पहले सरकार ने दिया था नया मंत्रालय का ऑफर, लेकिन छात्रों की मांग पर नहीं बनी थी बात। फोटो सोर्स-ANI
Dharmendra Pradhan News: पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा देने से पहले सरकार ने विवाद सुलझाने की एक आखिरी कोशिश की थी। सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने उन्हें शिक्षा मंत्रालय से हटाकर किसी दूसरे मंत्रालय की जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव रखा था। उम्मीद थी कि इससे छात्रों का आंदोलन खत्म हो जाएगा, लेकिन आंदोलन का नेतृत्व कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया। संगठन का साफ कहना था कि सिर्फ मंत्रालय बदलने से बात नहीं बनेगी, बल्कि धर्मेंद्र प्रधान को पूरी तरह पद छोड़ना होगा।
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार और आंदोलनकारियों के बीच कई दौर की बातचीत हुई। सरकार की ओर से भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बातचीत की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने आंदोलनकारी छात्रों से कहा कि अगर शिक्षा मंत्री बदल दिए जाते हैं और उनकी बाकी मांगें मान ली जाती हैं, तो आंदोलन खत्म किया जा सकता है। लेकिन छात्र संगठन अपने रुख पर कायम रहा।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि उस समय सरकार छात्रों की दो अहम मांगों पर पहले ही सहमत हो चुकी थी। पहली, आंदोलन के दौरान छात्रों पर दर्ज एफआईआर वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी। दूसरी, नीट पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के बाद आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को आर्थिक सहायता देने की तैयारी भी चल रही थी।
ऐसे में सरकार को उम्मीद थी कि इन फैसलों के बाद छात्र संगठन समझौते के लिए तैयार हो जाएगा और धर्मेंद्र प्रधान को सिर्फ शिक्षा मंत्रालय से हटाकर कैबिनेट में किसी दूसरी जिम्मेदारी दी जा सकेगी। लेकिन आंदोलनकारी इस बात पर अड़े रहे कि शिक्षा मंत्री को पूरी तरह हटाया जाए। उनका मानना था कि केवल विभाग बदलने से जवाबदेही तय नहीं होगी।
बताया जा रहा है कि सरकार और आंदोलनकारियों के बीच लंबे समय तक बातचीत का कोई सीधा रास्ता नहीं बन पाया। इसी वजह से दोनों पक्षों के बीच गतिरोध बढ़ता गया। उधर, देशभर में छात्रों का प्रदर्शन तेज होता गया और सरकार पर दबाव भी लगातार बढ़ने लगा।
आखिरकार लगातार बढ़ते जनदबाव, कई दौर की असफल बातचीत और छात्रों के सख्त रुख के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के कुछ ही समय बाद आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संगठन ने राजधानी दिल्ली में पिछले 36 दिनों से चल रहा अपना धरना खत्म करने का ऐलान कर दिया।
हालांकि इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी से साफ है कि इस्तीफे से पहले समझौते की कई कोशिशें हुईं, लेकिन छात्रों ने अपनी मुख्य मांग से पीछे हटने से इनकार कर दिया। यही वजह रही कि आखिर में सरकार को बड़ा फैसला लेना पड़ा।
Updated on:
28 Jul 2026 09:33 am
Published on:
28 Jul 2026 09:33 am
