
सांसद मनोज तिवारी। फाइल फोटो- पत्रिका
नई दिल्ली। दिल्ली दंगों के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत के फैसले के बाद भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने इसका स्वागत करते हुए कहा कि आज का फैसला सुनने के बाद न्याय का जो भरोसा था, वो पूरा हुआ है।
उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी का पार्षद रहते हुए उसने ऐसा कांड किया। पूरे दिल्ली दंगों का मास्टरमाइंड रहा। आज उस व्यक्ति को और उसके साथियों को उम्रकैद की सजा हुई है। इस निर्णय का हम स्वागत करते हैं और न्याय जीता है। उन्होंने आम आदमी पार्टी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि अरविंद केजरीवाल ने ही तो टिकट दिया था। आम आदमी पार्टी ने ही तो टिकट दिया था। आम आदमी पार्टी के द्वारा जिसको पार्षद बनाया गया, उसी ने इस तरह से दंगे करवाए, योजनाएं बनाईं। अंकित शर्मा, आईबी ऑफिसर की हत्या की। तो ये सब कुछ देखने के बाद निश्चित रूप से आम आदमी पार्टी को तो एक बार अपनी गिरेबान में झांकना ही पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि यह अभी निचली अदालत का फैसला है और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि अभी तो ये ट्रायल कोर्ट का पहला फैसला है, लोअर कोर्ट का और मुझे भी उम्मीद है कि ये जितना जघन्य, जितना संगठित अपराध, जितना दर्दनाक तरीके से मारा गया, योजनाबद्ध तरीके से जैसे नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली का, जहां का मैं सांसद हूं, वहां दंगा कराया गया। इन लोगों ने दंगे को लीड किया और उसमें आम आदमी पार्टी के नेताओं की बड़ी भूमिका थी। अभी तो आगे हमें और भी उम्मीद है कि ये सजा फांसी में तब्दील होनी चाहिए, लेकिन आज उम्रकैद की सजा सभी को हुई है और न्याय होना शुरू हुआ है।
गौरतलब है कि दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन और चार अन्य को 2020 के दंगों के दौरान इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी) के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई है। कड़कड़डूमा अदालत के अपर सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने ताहिर हुसैन और चार अन्य आरोपियों को इस अपराध में इसी महीने दोषी ठहराया था और आज उन्हें उम्रकैद की सजा सुना दी।
ताहिर हुसैन को हत्या, कैद करने के इरादे से अपहरण, घातक हथियारों से दंगा फैलाने, गैर-कानूनी तरीके से एकत्र होने और विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने सहित कई अन्य गंभीर धाराओं में दोषी पाया गया था। हालांकि, उन्हें आपराधिक साजिश रचने और विद्रोह के उकसावे के आरोपों से बरी कर दिया गया था। अदालत ने ताहिर हुसैन के अलावा जावेद, अनस, नाजिम और कासिम को भी इस अपराध के लिए दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई, जबकि मामले में मुकदमे का सामना कर रहे छह अन्य आरोपियों को बरी कर दिया।
Updated on:
31 Jul 2026 07:26 pm
Published on:
31 Jul 2026 07:26 pm
