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‘गलवान के शहीदों को भूल गए क्या? लद्दाख-अरुणाचल का क्या हुआ?’ कांग्रेस ने पीएम मोदी-जिनपिंग की मुलाकात पर उठाए सवाल

Xi Jinping: BRICS सम्मेलन में पीएम मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने उठाए सवाल। जानिए लद्दाख, अरुणाचल और आतंकवाद पर उन्होंने क्या कहा।
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BRICS Summit 2026, PM Modi Xi Jinping Meeting

पवन खेड़ा ने पीएम मोदी-जिनपिंग की मुलाकात पर उठाए सवाल (फोटो सोर्स- ANI)

Pawan Khera: BRICS शिखर सम्मेलन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की द्विपक्षीय वार्ता को लेकर कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि क्या भारत ने चीन के साथ बातचीत में लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश से जुड़े मुद्दे उठाए और क्या लद्दाख में मई-जून 2020 से पहले की स्थिति बहाल हुई है। खेड़ा ने गलवान में शहीद हुए 20 भारतीय जवानों का भी जिक्र किया। उन्होंने BRICS घोषणा में पहलगाम हमले और पश्चिम एशिया के मुद्दे पर इस्तेमाल की गई भाषा की आलोचना की।

क्या 2020 की स्थिति बहाल हुई?

पवन खेड़ा ने कहा कि सिर्फ कागजी बयानों से काम नहीं चलेगा, भारत को अपने मुख्य मुद्दों पर ध्यान देना होगा। उन्होंने सवाल किया कि क्या मई/जून 2020 से पहले लद्दाख में जो स्थिति थी, वह वापस बहाल हो पाई है। खेड़ा ने गलवान घाटी के शहीद 20 जवानों की शहादत का जिक्र करते हुए कहा कि देश उन्हें कभी नहीं भूल सकता। इसके साथ ही उन्होंने पूछा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान पाकिस्तान को मदद पहुंचाने में चीन की जो भूमिका रही, क्या उस पर द्विपक्षीय वार्ता में कोई जवाब मांगा गया।

घोषणापत्र की भाषा पर उठाए सवाल

कांग्रेस नेता ने नई दिल्ली घोषणापत्र में इस्तेमाल की गई भाषा पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि घोषणापत्र में 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम आतंकी हमले की निंदा तो की गई है, लेकिन इसमें सीधे तौर पर पाकिस्तान का नाम शामिल नहीं किया गया। इसी तरह पश्चिम एशिया के हालातों का जिक्र तो है, पर स्पष्ट रूप से कड़े शब्दों में निंदा गायब है। खेड़ा ने पूछा कि आखिर हम खुलकर अपनी बात क्यों नहीं रखते।

व्यापार और चाबहार पोर्ट का उठाया मुद्दा

विदेश नीति और आर्थिक मोर्चे पर सरकार को घेरते हुए खेड़ा ने पूछा कि ईरान के चाबहार बंदरगाह को लेकर रुकी हुई चर्चाएं क्या आगे बढ़ पाई हैं। इसके अलावा उन्होंने BRICS के आर्थिक तंत्र पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि BRICS व्यापार से एक पल के लिए चीन को हटा दिया जाए, तो भारत का व्यापार कहां टिकता है। आज यह समझना बहुत जरूरी है कि इस मंच से भारत को वास्तव में कितना फायदा मिल रहा है।

नई दिल्ली घोषणापत्र और कूटनीतिक पहलू

दूसरी ओर, सितंबर 2026 में भारत की अध्यक्षता में आयोजित 18वें BRICS सम्मेलन में सर्वसम्मति से पारित 'नई दिल्ली घोषणापत्र' को कूटनीतिक मोर्चे पर एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। इसमें पहलगाम हमले की स्पष्ट निंदा करते हुए सीमा पार आतंकवाद, टेरर फंडिंग, साइबर धोखाधड़ी और आतंकियों के सुरक्षित ठिकानों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने की बात कही गई है।