
प्रियंका गांधी और संबित पात्रा। फाइल फोटो- पत्रिका
नई दिल्ली। संसद के मॉनसून सत्र के दौरान नीट पेपर लीक और प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का मुद्दा लगातार गरमाया हुआ है। लोकसभा में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने छात्र आंदोलन के दौरान घायल हुई एक छात्रा का मामला उठाकर सरकार पर सवाल खड़े किए। इसके बाद भाजपा सांसद संबित पात्रा ने उनके बयान को तथ्यात्मक रूप से गलत बताया। वहीं पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने प्रियंका गांधी के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि उन्होंने देश के युवाओं और अभिभावकों की भावनाओं को सदन में रखा।
लोकसभा में चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी ने कहा कि वह हाल ही में राम मनोहर लोहिया अस्पताल गई थीं, जहां पुलिस कार्रवाई में घायल हुई छात्रा का हाल जाना। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बल प्रयोग की जरूरत क्यों पड़ी। उन्होंने कहा कि सरकार को युवाओं की आवाज सुननी चाहिए और पेपर लीक जैसे मामलों में दोषियों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अब तक किसी भी बड़े पेपर लीक माफिया को सजा नहीं मिली है। साथ ही उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में नियुक्तियों को लेकर भी सरकार की आलोचना की।
प्रियंका गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा सांसद संबित पात्रा ने कहा कि संसद में पेपर लीक रोकने के लिए केंद्र सरकार के नए कानून पर चर्चा चल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रियंका गांधी ने अपने भाषण में कुछ तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया। पात्रा ने कहा कि जिस छात्रा का जिक्र किया गया, उसे पुलिस कार्रवाई में चोट नहीं लगी थी। उन्होंने कहा कि छात्रा उस समय बनी भगदड़ जैसी स्थिति में घायल हुई थी, इसलिए पुलिस पर बर्बरता का आरोप लगाना सही नहीं है।
संबित पात्रा ने कहा कि संसद में तथ्यों को सही रूप में रखना सभी जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया को लेकर इस्तेमाल किए गए 'पालतू मीडिया' जैसे शब्द उचित नहीं हैं। उनके अनुसार मीडिया लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है और उसके लिए इस तरह की भाषा का प्रयोग नहीं होना चाहिए।
वहीं पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने प्रियंका गांधी का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि प्रियंका गांधी ने किसी तरह की राजनीति नहीं की, बल्कि देश के युवाओं और उनके परिवारों की भावनाओं को सदन में रखा। उनके अनुसार आज युवाओं के मन में पेपर लीक और रोजगार जैसे मुद्दों को लेकर गहरी चिंता है और नेताओं की जिम्मेदारी है कि वे उनकी आवाज संसद तक पहुंचाएं।
Updated on:
28 Jul 2026 07:34 pm
Published on:
28 Jul 2026 07:30 pm
