30 अक्टूबर 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

रोगों का भी है ग्रहों से खास संबंध! क्या आप जानते हैं, क्या है आपकी बीमारियों का कारण और उपाय

कौन से ग्रह देते हैं कौन से रोग साथ ही जानिये इन रोगों से बचने के उपाय...
4 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

भोपाल

•

image

Deepesh Tiwari

•

Updated: 5 May 2019, 4:23 PM IST

Special jyotish Artical

रोगों का भी है ग्रहों से खास संबंध! क्या आप जानते हैं, क्या है आपकी बीमारियों का कारण और उपाय

भोपाल। हमारे जीवन को कुंडली के ग्रह कई प्रकार से प्रभावित करते हैं। जहां एक ओर तरक्की, यश या भाग्य के रूप में ये ग्रह हमारी सहायता करते हैं। वहीं अपयश या घरेलू व व्यवसायिक समस्या ही नहीं ये ग्रह हमें होने वाले रोगों का भी कारण बनते हैं।

इस संबंध में पंडित सुनील शर्मा सहित ज्योतिष के जानकार वीडी श्रीवास्तव सहित कई ज्योतिष से जुड़े लोगों का कहना है कि व्यक्ति के शरीर का संचालन ग्रहों के अनुसार ही होता है। इसके तहत जहां सूर्य आंखों, चंद्रमा मन, मंगल रक्त संचार, बुध हृदय, बृहस्पति बुद्धि, शुक्र भाग्य और शनि, राहू व केतु उदर का स्वामी है।

ऐसे में यदि कुंडली में शनि अगर बलवान है तो नौकरी और व्यापार में विशेष लाभ होता है। गृहस्थ जीवन सुचारु चलता है। लेकिन अगर शनि का प्रकोप है तो व्यक्ति को बात-बात पर क्रोध आता है। निर्णय शक्ति काम नहीं करती,इसके अलावा गृहस्थी में कलह और व्यापार में तबाही होती है।

यहां तक की कई वैदिक ज्योतिष के जानकार तक पर्याप्त कर्म के बावजूद अपेक्षित फल न मिल पाना, वह ग्रहों का कुप्रभाव मानते हैं। उनके अनुसार घरेलू क्लेश, संपत्ति विवाद, व्यवसाय व नौकरी में अड़चनें ही नहीं, ब्लडप्रेशर, कफ, खांसी आदि भी ग्रहों का ही प्रभाव है।

खास बात: समस्याओं के चलते कई बार लोग ग्रहों के रत्नों को अपने हिसाब से धारण कर लेते हैं, लेकिन पंडित सुनील शर्मा के अनुसार रत्नों को कभी भी अपनी इच्छा या सोच से धारण नहीं करना चाहिए। यदि आपको किसी ग्रह से जुड़ी समस्या है तो भी रत्न धारण करने से पहले किसी ज्योतिष में रत्नों के जानकार से अवश्य सलाह ले लेनी चाहिए।

इसके अलावा कई बार ग्रह की दशा निकल जाने के बाद भी लोग इसे धारण करे रखते हैं, जिसके कारण ये रत्न आपकी तरक्की में भी बाधा पहुंचाना शुरू कर देते हैं।

जानिये कौन सा ग्रह क्या करता है...

1. सूर्य :

सूर्य मानव स्वभाव में तेजी लाता है। यह ग्रह कमजोर होने पर सिर में दर्द, आंखों का रोग तथा टाइफाइड आदि रोग होते हैं। किन्तु अगर सूर्य उच्च राशि में है तो सत्तासुख, पदार्थ और वैभव दिलाता है।


उपाय: अगर सूर्य के गलत प्रभाव सामने आ रहे हों, तो सूर्य के दिन यानि रविवार को उपवास और माणिक्य लालड़ी तामड़ा या महसूरी रत्न को धारण किया जा सकता है।

वहीं आप सूर्य को अनुकूल करने के लिए मंत्र-'ॐ हाम्‌ हौम्‌ सः सूर्याय नमः' का एक लाख 47 हजार बार विधिवत जाप करना चाहिए। यह पाठ थोड़ा-थोड़ा करके कई दिन में पूरा किया जा सकता है।

2. चंद्रमा :
चंद्रमा एक शीतल ग्रह है लेकिन उसका फल अशुभ भी होता है। यदि चंद्रमा उच्च है तो व्यक्ति को अपार यश और ऐश्वर्य मिलता है। लेकिन अगर नीच का है तो व्यक्ति खांसी, नजला, जुकाम जैसे रोगों से घिरा रहता है।


उपाय: चंद्रमा के प्रभाव को अनुकूल करने के लिए सोमवार का व्रत तथा सफेद खाद्य वस्तुओं का सेवन करना चाहिए। पुखराज और मोती पहना जा सकता है। लेकिन रत्न धारण करने से पहले किसी जानकार से सलाह जरूरी है।

इसके अलावा आप मंत्र 'ॐ श्राम्‌ श्रीम्‌ श्रौम्‌ सः चंद्राय नमः' का 2 लाख 31 हजार बार जप कर सकते हैं।

3. मंगल :
यह महापराक्रमी और देवताओं का सेनापति ग्रह है। कर्क, वृश्चिक, मीन तीनों राशियों पर उसका अधिकार है। यह लड़ाई-झगड़ा, दंगाफसाद यानि कुल मिलाकर रक्त का प्रेरक है। इससे पित्त, वायु, रक्तचाप, कर्णरोग, खुजली, उदर, रज, बवासीर आदि रोग होते हैं।

माना जाता है अगर कुंडली में मंगल नीच का है तो तबाही कर देता है। वहीं इसी के कारण बार बार चोट लगना और उससे रक्त आना भी माना गया है। वहीं विवाह में भी मंगल की अड़चनों को प्रमुख माना गया है।

बड़ी-बड़ी दुर्घटनाएं, भूकंप, सूखा भी मंगल के कुप्रभावों के प्रतीक माने जाते हैं। लेकिन अगर मंगल उच्च का है तो वह व्यक्ति कामक्रीड़ा में चंचल, तमोगुणी तथा व्यक्तित्व का धनी होता है। वे अथाह संपत्ति भी खरीदते हैं।

उपाय: मंगल का प्रभाव अनुकूल करने के लिए मूंगा धारण किया जा सकता है। रत्न किसी जानकार से सलाह के बाद ही धारण करें।

इसके अलावा तांबे के बर्तन में खाद्य वस्तु दान करने और मंत्र' ॐ क्रम्‌ क्रीम्‌ क्रौम सः भौमाय नमः' का जाप 2 लाख 10 हजार बार करने से लाभ हो सकता है।

पंडित सुनील शर्मा के अनुसार कोई भी ग्रह शरीर के जिस अंग का प्रतिनिधित्व करता है उसी के अनुसार रोग देता है।

4. शुक्र:

शुक्र काम कला का प्रतीक है तो समस्त यौन रोग शुक्र की अशुभता से ही होते हैं। इसके अलावा शुक्र कमर से नीचे के भी कई रोग देता है।

उपाय: शुक्र का रत्न हीरा माना गया है। वहीं इससे संबंधित रोग या अन्य समस्या से जुड़े मामलों में जहां पूजा को सर्वाधिक महत्व दिया गया है। ऐसे में आप मां दुर्गा के दुर्गा सप्तशती का पाठ प्रतिदिन कर सकते हैं।

5. बुध :

बुध की अशुभता हृदय रोग देती है।

उपाय: बुध का रत्न पन्ना माना जाता है। इस ग्रह से जुड़ी समस्याओं से निवारण के लिए श्रीगणेश का जप फायदेमंद माना गया है।

6. बृहस्पति:

बृहस्पति बुद्धि से संबंधित परेशानी देता है।

उपाय: बृहस्पति यानि गुरु का रत्न पुखराज माना जाता है। इस ग्रह से जुड़ी समस्याओं के लिए आप श्रीरामरक्षास्त्रोतम का पाठ कर सकते हैं।

अन्य ग्रह: शनि, राहू और केतु उदर के स्वामी हैं अत: इनकी अशुभता पेट के विकारों को पैदा करती है। ज्योतिष में ये तीनों ग्रह दुख के कारक माने गए हैं।

- शनि:
शनि का रत्न नीलम है, लेकिन इसे भूलकर भी मनमर्जी से धारण नहीं करना चाहिए। इसके लिए किसी जानकार के बिना तो इसे केवल जेब में रखने तक की मनाही है। वहीं शनि से जुड़ी समस्याओं के लिए हनुमान जी की स्तुति श्रेष्ठ मानी गई है।

- राहू :
राहू का रत्न गोमेद है। वहीं राहू की समस्या से निपटने के लिए सबसे अच्छा उपाय दान का माना गया है। ऐसे में आप किसी जानकार से बात कर बुधवार की सुबह राहू का दान कर सकते हैं।

- केतु :
इसका रत्न मुख्य रूप से लहसुनिया माना गया है। लेकिन केतु की किसी भी समस्या से निदान के लिए आप हर बुधवार किसी नाग मंदिर का दर्शन कर वहां आरती कर सकते हैं।