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शनि जयंती 2020 : सालों बाद बन रहा है ये दुर्लभ संयोग, जानिये क्या करें क्या नहीं

राशिनुसार क्या करें व क्या नहीं...
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भोपाल

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Deepesh Tiwari

•

Updated: 21 May 2020, 10:35 AM IST

Shani Jayanti 2020: puja vidhi,timing and what to do what don't

Shani Jayanti 2020: puja vidhi,timing and what to do what don't

ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि पर शनि देव का जन्म हुआ था, इसलिए ज्येष्ठ अमावस्या वाले दिन शनि जयंती मनाई जाती है। ऐसे में इस बार 22 मई,2020 शुक्रवार को शनि जयंती मनाई जाएगी। वहीं इसी दिन वट सावित्री व्रत 2020 भी मनाया जाएगा।

शनि जयंती पर बन रहा दुर्लभ संयोग
पंडित सुनील शर्मा के अनुसार शनि जयंती 2020 पर यानि इस साल ग्रहों की विशेष स्थिति रहेगी, जिसके कारण सालों बाद बेहद दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस बार शनि जयंती पर चार ग्रह एक ही राशि में स्थित होंगे और इस दिन शनि मकर जो कि उनकी स्वराशि है, उसमें बृहस्पति के साथ रहेंगे। ग्रहों की ऐसी स्थिति सालों पहले बनी थी, और माना जा रहा है कि अब ऐसा संयोग अगले कई सालों तक बनेगा भी नहीं।

शनि जयंती पर सूर्य देव, चंद्र, बुध और शुक्र एक साथ वृषभ राशि में विराजमान रहेंगे। इन 4 ग्रहों के एक साथ उपस्थित होने से जन-जीवन और देश की अर्थव्यवस्था के ऊपर काफ़ी प्रभाव पड़ेगा। हमारे ज्योतिषाचार्य के अनुसार इस स्थिति के कारण देश में न्याय और धार्मिक गतिविधियों में बढ़ोतरी होगी।

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साथ ही देश की कानून व्यवस्था व व्यापारिक नीतियों में भी बदलाव होगा और प्राकृतिक आपदाओं और महामारी से राहत पाने की दिशा में हमारे प्रयासों की सराहना होगी। इस संयोग के कारण खेती को बढ़ावा मिलेगा और चीजों के उत्पादन की गति भी तेज़ हो जाएगी।

2020 : कब है शनि जयंती?
पंचांग के अनुसार शनि जयंती ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है।

शनि जयंती तिथि – 22 मई 2020

अमावस्या तिथि आरंभ – 21:38 बजे (21 मई 2020)

अमावस्या तिथि समाप्त – 23:10 बजे (22 मई 2020)

ऐसे हुआ शनि देव का जन्म?
शनि देव के जन्म को लेकर लोगों में अलग-अलग मान्‍यताएं हैं। एक पौराणिक कथा के अनुसार शनि महाराज, भगवान सूर्य और उनकी पत्नी छाया के पुत्र हैं। सूर्य देव का विवाह राजा दक्ष की पुत्री संध्या से हुआ था। विवाह के कुछ सालों तक संध्या उनके साथ ही रहीं, लेकिन सूर्य देव का तेज बहुत अधिक था, जिसे वो अधिक समय तक सहन नहीं कर पाईं। इसलिए संध्या ने अपनी छाया को सूर्य देव की सेवा में छोड़ दिया और खुद तपस्या करने चली गयी। कुछ समय बाद छाया ने शनि देव को जन्म दिया।

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शनि जयंती : ऐसे करें पूजा
शनि जयंती के दिन विधि-विधान से शनिदेव की पूजा और व्रत किया जाता है। इस दिन दान-पुण्य और पूजा करने से शनि से संबंधित सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।शनि जयंती के दिन की जाने वाली विशेष पूजा को ऐसे समझें -

: शनि जयंती के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करें।
: उसके बाद एक लकड़ी के पाट पर काला कपड़ा बिछाकर शनिदेव की मूर्ति या फोटो को स्थापित करें।
: शनिदेव की मूर्ति या फोटो को सरसों या तिल के तेल से स्नान कराए और उनकी पूजा करें।
: शनि देव को प्रसन्न करने के लिए हनुमान जी की भी पूजा करनी चाहिए।
: पूजा में शनि मंत्र “ॐ शं शनिश्चराय नम:” का उच्चारण ज़रूर करें।
: इस दिन शनिदेव से संबंधित वस्तुओं जैसे कि काले कपड़े, जामुन, काली उड़द, काले जूते, तिल, लोहा, तेल, आदि का दान करें।
: शनि जयंती के दिन पूजा के बाद दिन भर उपवास रहें।

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शनि देव : ज्योतिष में न्यायाधीश
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार शनि देव न्यायाधीश की भूमिका निभाते हैं, जिनका न्याय निष्पक्ष होता है। ये व्यक्ति के अच्छे कर्मों का फल अच्छा और बुरे कर्मों का फल बुरा देते हैं। शनि देव मकर और कुंभ राशियों के स्वामी हैं।

क्रूर कहे जाने वाले शनि देव का रंग काला है और इनकी सवारी गिद्ध भी है, वैसे शनिदेव के कुल 9 सवारी हैं, जिनमें गिद्ध, घोड़ा, गधा, कुत्ता, शेर, सियार, हाथी, मोर और हिरण शमिल हैं। ऐसा कहा जाता है कि जो भी व्यक्ति शनि जयंती के दिन सच्चे मन से पूजा करता है, उसे शनि देव की कृपा बहुत जल्द प्राप्त होती है।

शनि को प्रसन्न करने के अचूक उपाय
पंडित सुनील शर्मा के अनुसार शनि देव की पूजा के लिए सप्ताह में शनिवार का दिन निर्धारित किया गया है। हिन्दू धर्म में शनि देव को प्रसन्न करने के लिए लोगों द्वारा ढेरों उपाय किए जाते हैं। ये हैं शनि देव को प्रसन्न करने के अचूक उपाय-

: काली गाय की सेवा करने से शनि का दुष्प्रभाव समाप्त हो जाता है। ऐसा हर रोज़ करने से शनिदेव की कृपा बनी रहती है।
: जीवन को सुखमय बनाने के लिए सबसे पहली रोटी काली गाय को खिलाकर, उन्हें सिंदूर का तिलक लगाएं।

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: शनि देव को प्रसन्न करने के लिए हर शनिवार को पीपल के वृक्ष की पूजा करें या पीपल के पेड़ पर जल या दूध चढ़ाएं।
: पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दिया जलाने से भी शनि की कृपा सदैव रहती है।
: हर रोज़ शनि की पूजा करने से और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से शनि देव के दुष्प्रभावों से व्यक्ति को मुक्ति मिलती है।
: शनि का आशीर्वाद पाने के लिए अपने भोजन में काला नमक और काली मिर्च का इस्तेमाल ज़रूर करें।

शनि जयंती को क्या न करें...
शनि जयंती का दिन शनि देव की पूजा का होता है। इस दिन मांस- मंदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति इस दिन मांस- मंदिरा का सेवन करता है उस पर शनि की बुरी नजर पड़ती है। इस दिन शनि देव की पूजा करें और सात्विक भोजन का ही सेवन करें।
यह दिन शनि देव की पूजा का होता है। इस दिन शारीरिक संबंध नहीं बनाने चाहिए, यानि ब्रह्मचर्य का पालन करें।

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शनि जयंती 2020 : राशिनुसार क्या करें और क्या नहीं...

1. मेष राशि - भूल से भी दूसरों को परेशान न करें।
सुंदरकांड या हनुमान चालीसा का पाठ करें।

2. वृषभ राशि - अपने स्वार्थ के लिए अन्य लोगों को नुकसान न पहुंचाएं।
शनि के नामों का जाप करें।

3. मिथुन राशि - माता-पिता के प्रणाम करके दिन की शुरुआत करें।
शनिदेव को काली उड़द चढ़ाएं।

4. कर्क राशि - झूठ बोलने से बचें।
राजा दशरथ कृत शनि स्त्रोत का पाठ करें।

5. सिंह राशि - व्यापार में किसी का अनुचित लाभ न उठाएं।
हनुमानजी को चोला चढ़ाएं।

6. कन्या राशि - इस राशि के लोग क्रोध से बचें।
उपवास रखें और शनिदेव के मंत्रों का जाप करें।

7. तुला राशि - इन लोगों को निस्वार्थ भाव से जरूरतमंद लोगों की सेवा करनी चाहिए।
शनिदेव का अभिषेक सरसों के तेल से करें।

8. वृश्चिक राशि - आलस्य से बचें और मेहनत में कमी न करें।
हनुमान चालीसा का पाठ करें और चींटियों को आटा डालें।

9. धनु राशि - अत्यधिक उत्साह से बचें। मन शांत रखकर काम करें।
पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाएं।

10. मकर राशि - ये लोग घर में शांति बनाए रखें।
शनिदेव के वैदिक मंत्रों का जाप करें।

11. कुंभ राशि - किसी भी तरह की लापरवाही से बचें।
हनुमानजी की उपासना करें और किसी जानकार की सलाह पर नीलम रत्न धारण करें।

12. मीन राशि - अनाज का दान करें।
बजरंग बाण का पाठ करें और गरीबों की हर संभव मदद करें।

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