यहां 9 को एक साथ मौत के इंजेक्शन देने का फरमान सुनाया तो कांप गई लोगों की रूह

9 को एक साथ मौत के इंजेक्शन देने का फरमान सुनाया तो कांप गई लोगों की रूह

By: lokesh verma

Published: 16 May 2018, 09:58 AM IST

बागपत. जब अधिकारियों ने मौत के इंजेक्शन देने का फरमान सुनाया तो लाेगों की रूह कांप गई। परिवार के सभी लोग सहम गए और अधिकारियों से फरियाद लगाते हुए कहा कि जब उनकी रोजी-रोटी चलाने वालों को ही जहर देकर मार दिया जाएगा तो उनका क्या होगा। लेकिन, जिला प्रशासन ने लोगों की बात मानने से साफ इनकार कर दिया है और 9 को मौत का इंजेक्शन देने का फरमान सुनाया गया। दरअसल, हम बात कर रहे भयंकर बीमारी ग्लैंडर्स की, जिसने उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि सात राज्यों को चपेट में ले लिया है। वहीं बागपत में 9 घोड़े ग्लैंडर्स से पीड़ित पाए गए हैं, जिन्हें मौत के इजेक्शन दिए जाएंगे।

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बता दें कि देश में केवल एक ही अश्व प्रजाति अनुसंधान केद्र हिसार में है, जिसके वैज्ञानिकों की आजकल नींद उडी हुई। बताया जा रहा है कि एक माह के अंदर यूपी में 30 पशु इस बिमारी की चपेट में है। बागपत जिले के भी कुछ अश्वों का सैंपल अनुसांधान केंद्र भेजे गए थे, जिसमें बीमारी की पुष्टि हो चुकी है। बागपत के 9 घोड़ों को जहर का इंजक्शन देने का फरमान सुनाया है। यह सुनते ही अश्व रखने वाले लोग सहम गए। दरअसल, मुख्य चिकित्सा अधिकारी राजपाल सिंह के नेतृत्व में पशु चिकित्सकों की टीम नौरोजपुर रोड पर स्थिति ईंट भटटे पर जाकर जांच की थी। हिसार के वैज्ञानिक हरिशंकर सिंघला, डाॅ. सुंदरम तथा सीसीएस नेशनल इस्टीटयूट आॅफ एनिमल हेल्थ बागपत के डारेक्टर प्रवीण मलिक की निगरानी में बीमार पशुओं के सीरम सैंपल लिए गए। जो घोड़े बीमार थे उनमें से एक को जहर का इंजक्शन दिया गया तो घोड़े के मालिक रो पड़े और परिवार सहम गया।

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परिजनों का कहना था कि उनके घर को चलाने वाला घोड़ा नहीं बल्कि वह घर का सदस्य है। जब अन्य घोड़ों को भी जहर का इंजेक्शन देने के लिए टीम ने कहा तो अश्व मालिकों ने इसका विरोध किया और इलाज कराने की मांग की। जिस पर टीम द्वारा एक बार फिर बीमारी ग्रस्त घोड़ों के सैम्पल लिए गए हैं। उसके बाद ही आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा। आपको जानकारी के लिए बता दें कि ग्लैंडर्स एक फारसी रोग बल्कोलडेरिया बैक्टीरिया होता है। इसमें पशु के फेफड़ों और नाक में गांठें तथा श्वसन तंत्र की म्यूकस मेब्रेन पर घाव तथा खांसी हो जाती है। इस रोग का वायरस इतना प्रबल है कि यह मनुष्यों में हो सकता है, जिसकी रोकथाम के लिए अश्वों में इस बीमारी को रोका जाना बेहद जरूरी है।

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