
नोएडा। (bans ki bottle) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) द्वारा सिंगल यूज प्लास्टिक (Single Use Plastic) पर प्रतिबंध लगाए जाने का ऐलान किया गया है। इसके बाद से ही नोएडा समेत देशभर के अन्य शहरों में प्लास्टिक वेस्ट (Plastic Waste) की रोकथाम के लिए तरह-तरह के अभियान चलाए जा रहे हैं। इस कड़ी में गत दो अक्टूबर को नोएडा प्राधिकरण (Noida Authority) द्वारा बड़े स्तर पर प्लास्टिक के लिए खिलाफ अभियान चलाया गया। साथ ही सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल करने वालों पर जुर्माना करने का भी प्रावधान बनाया गया है।
नोएडावासी कर रहे तारीफ (bans ki bottle price)
इस सबके बीच मोदी सरकार प्लास्टिक की बोतलों (Plastic bottle) को इस्तेमाल से बाहर करने के लिए एक विकल्प लेकर आई है। जिसे लेकर नोएडावासी खासे उत्साहित हैं और सरकार के इस कदम की जमकर तारीफ भी कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि सरकार के प्लास्टिक पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए उसके विकल्प भी लाने होंगे। तभी लोग इसका इस्तेमाल पूरी तरह खत्म करेंगे। दरअसल, एमएसएमई मंत्रालय के अधीन कार्यरत खादी ग्रामोद्योग आयोग द्वारा बांस की बोतल (bans ki bottle) को बाजार में उतारा गया है। एक अक्टूबर को केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी द्वारा ये बांस की बोतलें लॉन्च की गई।
खादी स्टोर से खरीद सकते हैं बांस की बोतल
दो अक्टूबर से बांस की बोतलों को की बिक्री शुरू हो चुकी हैं। इन बोतलों की क्षमता कम से कम 750 एमएल की है और इसकी शुरूआती कीमत 300 रुपए है। बताया जा रहा है कि कुछ समय बाद ये ऑनलाइन भी उपलब्ध होंगी। दावा है कि यह बोतल पर्यावरण अनुकूल होने के साथ-साथ टिकाऊ भी होगी। नोएडा में रहने वाले उद्योगपति रविंद्र राठी का कहना है कि इन बांस की बोतलों को भालुका किस्म के बांस से तैयार किया गया है। इसे एक बोतल को बनाने में करीब पांच घंटे का समय लगता है।
18 महीने तक चल सकती है बोतल
उन्होंने बताया कि बांस से बनाई गई ये बोतल कम से कम 18 महीने चल सकती हैं। इसे बनाने से पहले बांच को गर्म पानी में उबाला जाता है। जिससे की बांस के अंदर मौजूद गंदगी साफ हो जाती है। फिर बांस को सुखाकर इन्हें आकार दिया जाता है और फिनिशिंग की जाती है। इसके बाद जरूरत के हिसाब से इन पर कोटिंग चढ़ाई जाती है। इनका ढक्कन भी बांस से ही तैयार किया गया है। गर्मी में भी बोतल पानी को ठंडा रखती है।
बांस की बोतल के पौषक तत्व (Bamboo Bottle Nutrients)
-पोटेशियम 640 मिलीग्राम (13.62%)
-कॉपर 0.098 mg (10.89%)
-विटामिन बी 6 (पाइरिडोक्सीन) 0.118 मिली ग्राम (9.08%)
-मैंगनीज, एमएन 0.136 मिलीग्राम (5.91%)
-विटामिन बी 2 (राइबोफ्लेविन) 0.06 मिलीग्राम (4.62%)
-ट्रिप्टोफैन 0.019 ग्राम (4.32%)
-प्रोटीन 1.84 ग्राम (3.68%)
-आइसोल्युसिन 0.061 ग्राम (3.65%)
-आयरन Fe 0.29 मिलीग्राम (3.63%)
क्या होती है सिंगल यूज प्लास्टिक
सिंगल यूज प्लास्टिक एक ही बार इस्तेमाल की जानें वाली प्लास्टिक है। इस कैटेगिरी में थैलियां, प्याले, प्लेट, छोटी बोतलें, स्ट्रॉ और कुछ पाउच आदि शामिल हैं। ये सभी चीजें दोबारा इस्तेमाल के लायक नहीं होती हैं। इनको एक बार इस्तेमाल के बाद फेंक देना चाहिए। आधी से ज्यादा इस तरह की प्लास्टिक पेट्रोलियम आधारित उत्पाद होते हैं। जिनके उत्पादन पर खर्च बहुत कम आता है। लेकिन इनसे प्रदूषण बढ़ता है।
Updated on:
03 Oct 2019 03:12 pm
Published on:
03 Oct 2019 03:11 pm
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