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एप्पल मैनेजर की हत्या के बाद यूपी पुलिस के ‘प्रशांत चौधरी’ ने फेसबुक पर शेयर की पोस्ट, उठाए बड़े सवाल

एप्पल मैनेजर को उत्तर प्रदेश पुलिस के कांस्टेबल प्रशांत चौधरी द्वारा गोली मारने का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है।
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नोएडा

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Rahul Chauhan

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Updated: 3 Oct 2018, 2:29 PM IST

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एप्पल मैनेजर की हत्या के बाद यूपी पुलिस के ‘प्रशांत चौधरी’ ने फेसबुक पर शेयर की पोस्ट, उठाए बड़े सवाल

नोएडा। एप्पल मैनेजर को उत्तर प्रदेश पुलिस के कांस्टेबल प्रशांत चौधरी द्वारा गोली मारने का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। जहां एक तरफ पीड़ित परिवार व विपक्षी पार्टी के नेता आरोपी कांस्टेबल को कड़ी सजा दिलाने की मांग कर रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ पुलिसकर्मी प्रशांत चौधरी के पक्ष में खड़े नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर पुलिसकर्मियों द्वारा मुहिम भी चलाई जा रही है जिसके तहत आरोपी की पत्नी की सहायता के लिए राशि जमा करने की अपील की जा रही है।

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इसी बीच अब एक पोस्ट भी वायरल हो रही है। जो प्रशांत चौधरी नाम की फेसबुक आईडी की वॉल पर शेयर हुई है। इस फेसबुक अकाउंट पर वर्क एट यूपी पुलिस मेंशन किया गया है और यह पोस्ट लखनऊ में विवेक तिवारी को गोली मारने की वारदात के बाद डाली गई है। जिसमें आरोपी के बचाव में कई सवाल उठाए जा रहे हैं।

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क्या लिखा पोस्ट में

दरअसल, प्रशांत चौधरी नामक फेसबकु अकाउंट पर बरेली के एक घटना क्रम का जिक्र करते हुए 1 अक्टूबर 2018 को एक पोस्ट लिखी गई है। पढ़िए इसमें क्या लिखा है।

‘#अगर सिपाही गोली चला देता तो आज जिंदा होता!!

लखनऊ में कार चालक को रोकने पर गाड़ी चढाने से कुपित सिपाही प्रशांत चौधरी ने संयम खोकर गोली चला दी, जिससे विवेक तिवारी की मृत्यु हो गयी, प्रशांत के साथ ड्यूटी पर मौजूद निर्दोष संदीप भी हत्या के मामले में जेल चला गया! मीडिया, सभी नेतागण, अधिकारी, और प्रबुद्ध जन सिपाही को ही दोषी ठहरा रहे हैं, जबकि सिपाही का कहना है कि उसने कार चालक को बदमाश समझकर आत्मरक्षा में गोली चलाई, गोली जान से मारने की नीयत से नहीं चलाई। सिपाही ने अपनी FIR भी न लिखने का आरोप लगाया।

मैं मानता हूं कि एसी परिस्थिति नहीं थी कि गोली चलाई जाती। लेकिन परिस्थिति एसी थी कि सिपाही को सोचने का समय भी नहीं था। अगर विवेक तिवारी के स्थान पर कोई बदमाश होता और सिपाही सोचने में कुछ समय ले लेता तो वह निश्चित ही कुचल दिया जाता।

यहां मैं दो दिन पूर्व बरेली में घटित उस घटना का वर्णन कर रहा हूं जिसमें सिपाही द्वारा गोली चलाने में संयम का परिचय दिया गया, उसने सोचने में समय लिया और कुचल दिया गया, उसकी मौत हो गयी, उसका परिवार अनाथ हो गया। मीडिया और सोसल मीडिया पर उसकी शहादत कोई सुर्खी न बटोर सकी। काश अगर उसने भी गोली चला दी होती तो जिंदा होता, फिर शायद एसा ही कुछ हंगामा होता जो आज हो रहा है, लेकिन परिवार तो अनाथ नहीं होता!!’’