शहीदों ने यहां बिताए थे तीन साल
करनैल सिंह के बेटे की बहू मनजीत कौर बताती हैं कि चंद्रशेखर आजाद, राजगुरु, सुखदेव व भगत सिंह जैसे महान क्रांतिकारियों ने नलगढ़ा में पनाह ली थी। यहां रहने वाले सिंधु परिवार के करनैल सिंह ने शहीदों का साथ दिया था। करनैल सिंह कर्नल थे। इसके साथ ही वह सुभाष चंद्र बोष की स्पीच भी पढ़ते थे। उनका परिवार आज भी यहां रहता है। उनके बेटे की पत्नी मनजीत कौर का कहना है कि चंद्रशेखर आजाद, राजगुरु आैर सुखदेव यहां तीन वर्ष तक छुपकर रहे थे। यहां अंग्रेज सेना पर हमला करने की रणनीति बनाने के अलावा आंदोलन को सही रास्ता देने की भी योजना बनार्इ गर्इ थी। बम बनाने के लिए बारूद व अन्य सामग्रियों को जिस पत्थर पर रखकर मिलाया जाता था, वह आज भी गांव में मौजूद है। पत्थर में दो गड्ढे हैं, जिसमें बारूद को मिलाया जाता था। अब इस पत्थर को लोगों ने गांव के बीच मौजूद गुरुद्वारे में रखा है।