
आपकी बात : समाज में जातीय और धार्मिक सौहार्द कैसे बढ़ सकता है ?
मीडिया को आगे आना होगा
हमारे देश की संस्कृति सभी धर्मों, जातियों, रीति-रिवाजों, संस्कारों को अपने में समाहित कर विश्व में अपनी अलग पहचान रखती है। हमारा संविधान भी सभी धर्मों को समान रूप से संरक्षित और महत्त्वपूर्ण मानता है। जब से इस देश की राजनीति में जाति-धर्म ने घुसपैठ की है, तब से पूरा देश धार्मिक और जातीय रूप से असहिष्णु और कट्टरता की ओर बढ़ रहा है। यह जगजाहिर है कि राजनीतिक दलों को सिर्फ अपने वोट बैंक की सुरक्षा की चिंता है और इसके लिए जाति-सम्प्रदायों को ही बकरा बनाया जाता है। इन राजनीतिक षड्यंत्रों को जब तक देश का युवा और आम आदमी नहीं समझ लेता, तब तक देश में धार्मिक और राजनीतिक सौहाद्र्र नहीं आ सकता। मीडिया और सोशल मीडिया की भूमिका आज सिर्फ 'आग लगाकर तमाशा देखने वाली' हो गई हैं, उसे बदलना होगा।
-पवन कुमार वैष्णव, सलूम्बर, राजस्थान
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संकीर्ण मानसिकता का परित्याग
सामाजिक, धार्मिक सौहार्द तभी बढ़ेगा जब हम सभी अपनी ओछी मानसिकता और निम्न सोच से ऊपर उठेगें। आज सोशल मीडिया ने एक स्वस्थ व्यक्ति का मस्तिष्क भी संकीर्ण और संकुचित कर दिया है। यदि हर इंसान स्वयं से यह प्रश्न करे कि इस सामाजिक, धार्मिक सौहार्द को कौन बिगाड़ रहा है? इससे किसको फायदा और किसको नुकसान होगा? तो शायद उसे समझ आ जाएगा कि क्यों हमें इन सबसे ऊपर उठना है? समाज के प्रबुद्ध व्यक्तियों का भी यह दायित्व बनता है कि वे अपने आसपास और परिवार में सामाजिक धार्मिक सौहार्द को बढ़ाने का प्रयत्न करें। सभी नदियां अंत में एक ही सागर में पहुंचती है। वैसे ही सभी धर्मों का सार एक ही है।
-एकता शर्मा, गरियाबंद, छत्तीसगढ़
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वसुधैव कुटुंबकम् को रखें याद
समाज में विद्वेष फैलाने वालों संगठनों पर प्रतिबंध लगाना आवश्यक है। सोशल मीडिया पर भी संयमित बातें करें। जातियों में भेदभाव मिटाया जाना चाहिए। जातिगत आरक्षण बंद कर आर्थिक रूप से पिछड़ों को लाभ मिलना चाहिए। जाति का उल्लेख नहीं करें। भारतीय संस्कृति के प्राणवाक्य 'वसुधैव कुटुंबकम्' को आत्मसात करना चाहिए।
-प्रहलाद यादव, महू, मध्यप्रदेश
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वाणी-व्यवहार पर संयम रखें
वाणी पर संयम रखें। हमारे देश के नेता जातीय व धार्मिक सौहार्द को बिगाड़ते हैं, उन्हें अपने वोट बैंक की चिंता रहती है। कुछ असामाजिक तत्व भी दूसरों के धर्म व जाति पर टिप्पणी कर माहौल खराब करते रहते हैं। अगर सोच-समझ कर बोलें और वाणी पर संयम रखें तो सामाजिक सौहार्द बढ़ सकता है।
-लता अग्रवाल, चित्तौडग़ढ़, राजस्थान
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साम्प्रदायिकता से ऊपर उठें
भारत विविधताओं का देश है। यहां जातीय और धार्मिक सौहार्द्र बढ़ाने के लिए एक सुगठित समुदाय की आवश्यकता है, जो सामाजिक स्तरीकरण को बढ़ावा दे और क्षेत्रीय साम्प्रदायिकता से ऊपर उठकर सोचे। राजनीति में भी धर्म और जातीय उन्माद को बढ़ावा देने की बजाय जन-कल्याण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
-रजनी वर्मा, श्रीगंगानगर, राजस्थान
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संविधान की अक्षरश: पालना हो
सर्वप्रथम संविधान को सख्ती से लागू किया जाए। राजनीतिक पार्टियों व नेताओं को वोट बैंक की राजनीति बंद करनी चाहिए। चुनाव आयोग को ऐसे राजनीतिक दलों व नेताओं से सख्ती से निपटना चाहिए। जिम्मेदारों को यह ध्यान में रखना होगा कि संविधान से ऊपर ना कोई धर्म है, न ही कोई जाति। प्रशासन को तटस्थ उत्तरदायी एवं सख्त रहना होगा। धार्मिक और जातीय सद्भाव बढ़ाने वाले कार्यक्रमों का आयोजन हो।
-शेरसिंह बारठ, देशनोक, राजस्थान
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नयी दिशा की जरूरत
किसी भी धर्म को अपनाने की स्वतंत्रता मिले और जाति-धर्म का राजनीतिकरण न हो। समाज में समानता और सांप्रदायिक हिंसा के खिलाफ मजबूत कानून ही समाज में शांति और सद्भाव स्थापित कर सकता है। इसके अलावा मीडिया, गैर राजनीतिक संगठन और सामाजिक कार्यकर्ता सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं।
-शशांक गहलोत, ब्यावर, राजस्थान
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सर्व धर्म समभाव की भावना
भारत में विभिन्न धर्मों और समाज में आपसी सौहार्द और प्रेम भाव बनायें रखने के सर्व धर्म सम भाव की नीति का पालन करना होगा क्योंकि कोई धर्म छोटा-बड़ा नहीं होता और सभी धर्म आपसी प्रेम और सौहार्द की शिक्षा देते हैं।
- कैलाश चन्द्र मोदी, सादुलपुर (चूरू), राजस्थान
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अंतराजातीय विवाह को बढ़ावा
देश में जातीय और धार्मिक प्रेम बढ़ाने के लिए अंतरजातीय विवाहों को बढ़ावा दिया जाए। देश का संविधान हर युवा को पढऩा चाहिए। सर्व जातीय सम्मेलन आयोजित होने चाहिए।
-अक्षय माही
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सभी धर्मों का आदर हो
समाज में सभी धर्मों का सम्मान हो। मूल कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए सोशल मीडिया पर भड़काऊ सामग्री से परहेज करना होगा। हर प्रकार का भेदभाव खत्म हो व संविधान अनुरूप व्यवस्था से ही जातीय ओर धार्मिक सौहार्द बढ़ाया जा सकता है।
-विरेन्द्र टेलर, पीपलखूंट (प्रतापगढ़), राजस्थान
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वर्गों में बढ़े सहयोग
समाज में सभी वर्ग एक-दूसरे का सहयोग करें। जातिवाद को बढ़ावा नहीं दें। किसी भी जाति वर्ग के प्रति असामाजिक व्यवहार नहीं करें। धार्मिक त्योहार मिलजुलकर बनाएं। भारत एक लोकतांत्रिक देश है जिसमें विभिन्न धार्मिक व जाति वर्ग के लोग निवास करते हैं सभी एक-दूसरे का सहयोग करें हम सब भारतीय हैं!
-शिवपाल सिंह, मेड़ता सिटी, राजस्थान
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सही विचारधारा मिले
प्रत्येक समाज को सही विचारधारा की ओर ले जाना चाहिए। अपने समाज या धर्म को सर्वश्रेष्ठ बोलने वाले कुछ धर्मगुरु काल्पनिक कथाएं सुनाकर भ्रमित करते हैं। इनकी जगह सर्वधर्म समभाव का संदेश देने वाले धर्मगुरु आगे आएं।
-सोम कुमार नायर, सामाजिक कार्यकर्ता
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भारतीय संस्कृति का मर्म समझें
भारतीय संस्कृति वसुधैव कुटुम्बकम का पाठ पढ़ाती है, यह सोच विकसित हो। जाति, धर्म, नस्ल के आधार पर किसी के बारे में राय न बने। हेट स्पीच पर लगाम लगे, विद्वेष फैलाने वाले संगठनों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। कानूनों व सरकारी दस्तावेजों में धर्म, जाति का उल्लेख न हो। संविधान की धर्मनिरपेक्षता का सब सम्मान करें, समाजकंटकों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो तथा मानवीय मूल्यों पर जोर देने की बातें सामाजिक सौहार्द व सद्भाव बनाए रखने में मददगार बनेंगे।
-शिवजीलाल मीना, जयपुर, राजस्थान
Published on:
04 Apr 2022 03:39 pm
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