7 नवंबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

100 साल के जवान ने ध्‍वस्‍त किया तैराकी का विश्‍व कीर्तिमान, जानें चैम्पियन के बारे में

जॉर्ज कोरोनेस ने ब्रिटिश तैराक जॉन हैरिसन की ओर से 2014 में बनाए गए रिकॉर्ड को 35 सेकेंड के अंतर से तोड़ दिया। एक महीने बाद वह 100 साल के हो जाएंगे।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

नई दिल्ली

•

image

Mazkoor Alam

•

Updated: 4 Mar 2018, 4:46 PM IST

swimmmer

क्वींसलैंड : आस्‍ट्रेलिया के तैराक जॉर्ज कोरोनेस ने ऐसा कीर्तिमान रचा है, जिस पर सहज विश्‍वास करना आसान नहीं। लेकिन यह सच है। जार्ज की उम्र तकरीबन 100 साल है। इस साल अप्रैल में वह अपना 100वां जन्‍मदिन मनाएंगे। यह उम्र ऐसी होती है, जब व्‍यक्ति चलने फिरने में खुद को लाचार समझता है, वहीं जॉर्ज ने अपने अदम्‍य इच्‍छाशक्ति की बदौलत 50 मीटर की फ्रीस्टाइल तैराकी में विश्‍व कीर्तिमान बना कर नया इतिहास रच दिया है। उन्होंने 104 वर्ष की आयु वर्ग में 50 मीटर फ्रीस्टाइल तैराकी 56.12 सेकेंड में पूरी कर ली।

जार्ज थे अकेले प्रतिभागी
आस्‍ट्रेलिया के क्वींसलैंड में आधिकारिक रूप से मास्टर्स तैराकी स्पर्धा आयोजित की गई थी। इसमें 100 से 104 वर्ष वर्ग में 50 मीटर फ्रीस्टाइल तैराकी स्पर्धा में जॉर्ज ने हिस्सा लिया। इस आयु वर्ग की प्रतियोगिता में उनको टक्‍कर देने के लिए कोई उम्‍मीदवार नहीं था। वह अकेले प्रतिभागी थे। लेकिन उनके दावे के मद्देनजर आयोजकों ने खास तौर पर रिकॉर्ड तोड़ने के लिए इसका आयोजन किया। इससे पहले इस आयुवर्ग में ये रिकॉर्ड ब्रिटिश तैराक जॉन हैरिसन के नाम पर था। उन्होंने 2014 में रिकॉर्ड बनाया था। जॉर्ज कोरोनेस ने ये रिकॉर्ड 35 सेकेंड के अंतर से तोड़ दिया। खेल आयोजकों ने प्रशासनिक निकाय को रिकॉर्ड की सारी जानकारियां भेज दी है। जहां इस रिकॉर्ड को आधिकारिक मान्यता दी जाएगी।

द्वितीय विश्‍व युद्ध के बाद जवानी में ही छोड़ दी थी तैराकी
जॉर्ज आस्‍ट्रेलिया के बिस्‍बेन के रहने वाले हैं। उन्‍होंने बताया कि उन्‍हें बचपन से ही तैराकी से लगाव था। लेकिन काम की व्‍यस्‍तता की वजह से वह इसके लिए समय नहीं निकाल पाते थे। तकरीबन 60 साल पहले द्वितीय विश्‍व के बाद उन्‍होंने तैराकी पूरी तरह बंद कर दी थी। रिटायरमेंट के बाद 80 साल की उम्र से गंभीरता से लिया। तब किसी प्रतियोगिता में शामिल होना मेरा उद्देश्‍य नहीं था। खुद को फिट के मकसद से यह शुरू किया था। अब भी सप्ताह में तीन दिन तैराकी करते हैं और जिम जाते हैं। प्रतियोगिता में अच्छा प्रदर्शन इसलिए कर सके, क्योंकि उनकी तकनीक अच्‍छी थी। हालांकि आखिरी 10 मीटर के दौरान वे बुरी तरह थक गए थे, लेकिन रुके नहीं, आगे बढ़ते रहे और इसी के साथ इतिहास रच दिया।