IANS से बात करते हुए सुनील पाल ने कहा, "आजकल अश्लीलता के नाम पर कॉमेडी करना एक आम चलन बन गया है। कई लड़के-लड़कियां माइक लेकर दर्शकों या 'जेन-जी' (Gen Z) के सामने परफॉर्म करते दिखते हैं. इससे भले ही उनकी कमाई होती हो, लेकिन यह हमारे युवाओं को बिगाड़ भी रहा है। इसीलिए मैं ऐसे लोगों को हमेशा 'सोशल टेररिस्ट' कहता हूं, क्योंकि जो बात समझ में न आए, उसका समाज में कोई स्थान नहीं है। लड़के-लड़कियां गाली-गलौज वाली भाषा का इस्तेमाल करके बार-बार ऐसे प्रोग्राम कर रहे हैं। वेन्यू (कार्यक्रम स्थल) वालों को भी ऐसे नियम और कानून बनाने चाहिए कि यहां ऐसे किसी भी प्रोग्राम की इजाजत नहीं होगी और गाली-गलौज का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा…"