
पाली। प्रदूषण पर अंकुश लगाने में अब तक विफल रही कपड़ा इंडस्ट्री के लिए एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) [ National Green Tribunal ] ने तीन माह का अल्टीमेटम दिया है। तीन माह बाद भी हालात में सुधार नहीं हुआ तो सभी इकाइयों पर गाज गिरनी तय है। एनजीटी ने केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण मंडल [ Central Pollution Control Board ] और राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल [ State pollution control board ] को प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों [ Pollution Spreading Units ] को तीन माह के भीतर बंद कराने को कहा है। साथ ही ऐसी इकाइयों से क्षतिपूर्ति राशि वसूलने के भी आदेश दिए हैं, जिन्होंने प्रदूषण फैलाया। पाली की सभी 569 इकाइयां इस आदेश के दायरे में आ रही है।
एनजीटी ने अपने आदेश [ NGT instructions ] में कहा है कि व्यापक पर्यावरण प्रदूषण सूचकांक (कांप्रेन्सिव एनवायरमेंटल पॉल्यूशन इंडेक्स)में पाली देश में 15वें स्थान [ polluted pali city in the country ] पर है। प्रदूषण की यह स्थिति भयावह है। इसलिए केन्द्रीय और राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल जल, वायु और पर्यावरण संरक्षण के अधिनियम की शक्तियों का उपयोग करते हुए अगले तीन माह में प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों को बंद कराए। एनजीटी ने कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी है।
नए उद्योगों की स्थापना पर भी रोक
एनजीटी ने रेड एवं ऑरेंज कैटेगरी का नया उद्योग लगाने पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। पुराने उद्योगों के विस्तार पर रोक लगा दी है।
ये मामला, जिसमें मिला अल्टीमेटम
किसान पर्यावरण संघर्ष समिति की ओर से एनजीटी में दायर किया गया मामला ही अब तक प्रकाश में आया था। इसमें एनजीटी अब तक कई निर्देश दे चुकी है। यह प्रकरण इससे भिन्न है। दरअसल, पर्यावरण प्रदूषण इंडेक्स के आधार पर देश में 100 शहरों को वर्ष 2009 में सर्वाधिक प्रदूषित शहरों के रूप में चिह्नित किया गया था। इस पर एनजीटी ने केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को प्रदूषण पर अंकुश लगाने के निर्देश दिए। तत्कालीन समय में कुछ योजना बनाई गई, लेकिन मामला ठंडे बस्ते में चला गया। वर्ष 2018 में संजय काव नामक व्यक्ति ने एनजीटी में एक याचिका लगाई। इस मामले में सुनवाई करते हुए एनजीटी ने पाली समेत सभी 100 प्रदूषित शहरों (क्लस्टर) में अगले तीन माह में प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयां सुधार नहीं होने पर बंद कराने के आदेश दिए।
इधर, दूसरे मामले की सुनवाई 26 को
पर्यावरण संघर्ष समिति की ओर से दायर याचिका पर 26 जुलाई को एनजीटी में सुनवाई होगी। इस बार प्रदूषण नियंत्रण मंडल की सदस्य सचिव को शपथ पत्र पेश करने के लिए उपस्थिति देनी होगी। प्रदूषण नियंत्रण मंडल इसकी तैयारियों में जुटा हुआ है। इधर, लाख हिदायतों के बावजूद सीइटीपी नियमों में नहीं चल रहा। प्रदूषण फैलाने जैसी कई गतिविधियां सामने आ चुकी है। ऐसे में एनजीटी का रवैया और सख्त हो सकता है।