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वाल्मीकि समाज सामूहिक विवाह सम्मेलन 15 जोड़े बंधे परिणय सूत्र में

अग्नि को साक्षी मानकर थामा एक-दूजे का हाथ  

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पाली

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Rajeev Dave

Nov 24, 2017

Marriage news

पाली.

अखिल भारतीय वाल्मीकि महासभा की ओर से गुरुवार को सामूहिक विवाह सम्मेलन बांडी नदी स्थित समाज भवन में हुआ। इसमें 15 जोड़ों ने एक-दूसरे का हाथ थामकर जीवन भर साथ निभाने का वादा किया। वर-वधु को समाजबंधुओं के साथ जनप्रतिनिधियों व संतों ने आशीर्वाद दिया। विवाह समारोह को लेकर जिले व प्रदेश के साथ गुजरात से बारातियों व घरातियों के पहुंचने का क्रम शुरू हो गया। विवाह स्थल पर सभी बारातियों व घरातियों के पहुंचने के बाद मस्तान बाबा स्थित अपना घर से बैण्ड बाजों की मधुर धुन व ढोल थाली की थाप पर बंदोली निकाली गई। इसमें घोड़ी पर बैठकर इठलाते दूल्हों व ट्रैक्टर ट्रोलियों में बैठी दुल्हनों के साथ बाराती व घराती नाचते गाते विवाह स्थल पहुंचे। वहां दूल्हों ने तोरण की रस्म अदा की।

सात फेरे लेकर दिए वचन

सम्मेलन स्थल पर बारातियों व घरातियों के पहुंचने के बाद चवरी में पं. भगवती प्रसाद के मंत्रोच्चार करने के साथ वधु के परिजनों ने कन्यादान किया। वर-वधु के फेरे लेते ही विवाह समारोह स्थल जयकारों से गूंज उठा। बारातियों व घरातियों ने एक-दूसरे को बधाई दी।

संस्था व सहयोगियों ने किया कन्यादान

संस्था व सहयोगियों की ओर से कन्याओं को विभिन्न सामग्री देकर कन्यादान किया गया। कन्याओं को गृहस्थी बसाने के लिए सोने के टॉपस, फिणी, पायजेब, अलमारी, रजाई, गद्दे, टेबल-कुर्सी, घरेलू बर्तन के साथ अन्य सामग्री भेंट की गई। नगर परिषद की ओर से नवविवाहितों को हाथों-हाथ विवाह प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।

शिक्षा को बढ़ाने देने को कहा

समारोह में उज्जैन से आए संत उमेशनाथ ने समाजबंधुओं से उच्च शिक्षा प्राप्त करने को कहा। उन्होंने कहा कि समाज हित में कार्य करने के साथ विकास के लिए शिक्षा प्राप्त करना व कुरीतियों का त्याग करना जरूरी है। इसके साथ ही संत ने समाज का भवन बनाने को कहा। इस मौके संत चरणदास, नगर परिषद सभापति महेन्द्र बोहरा, सांसद प्रतिनिधि राकेश भाटी, पार्षद किशोर सोमनानी, विकास बुबकिया, संत जीवाराम, मदनलाल ढंजा आदि मौूजद थे। अतिथियों का जिलाध्यक्ष द्वारकाप्रसाद जावा के साथ संस्था सदस्यों व पदाधिकारियों ने स्वागत किया।

विदाई में नम हुई आंखें

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विवाह समारोह में पूरे दिन हंसी-ठिठोली का दौर चला, लेकिन जैसी ही अपराह्न में विदाई की वेला आई। घरातियों की आंखें नम हो गई। वर के परिजनों ने वधु के माता-पिता व सम्बन्धियों को बहू को बेटी के समान रखने का कहते हुए खुशी से बेटी को विदा करने को कहा।