
bihar tender scam: रिशु रंजन सिन्हा उर्फ रिशु श्री (फाइल फोटो)
Bihar Tender Scam: बिहार टेंडर घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) का शिकंजा उन IAS अधिकारियों पर कसता जा रहा है, जिनकी छत्रछाया में यह पूरा सिंडिकेट फल-फूल रहा था। जांच एजेंसियों के रडार पर 5 आईएएस अधिकारी आ गए हैं। इनमें से दो एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (ACS) रैंक के हैं, जबकि एक प्रिंसिपल सेक्रेटरी रैंक का सीनियर IAS अधिकारी है। सरकार भ्रष्टाचार के इस जाल में शामिल होने के गंभीर आरोपों के कारण पहले ही दो IAS अधिकारियों को सस्पेंड कर चुकी है और कई अन्य सीनियर अधिकारियों के बैकग्राउंड और कामकाज की भी जांच की जा रही है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, NIT पटना से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद रिशु श्री ने 2013-14 में एक साधारण नौकरी से अपना करियर शुरू किया था। हालांकि, जैसे ही उन्हें सचिवालय के गलियारों तक पहुंच मिली, उन्होंने कुछ ही वर्षों में करोड़ों की अवैध संपत्ति जमा कर ली। सरकारी टेंडरों का प्रबंधन करके और अधिकारियों को फायदा पहुंचाकर रिशु श्री ने कुछ ही वर्षों में 263.73 करोड़ रुपये की संपत्ति जमा कर ली।
बिहार में 'नमामि गंगे' योजना के तहत लगभग 3,705 करोड़ रुपये की बड़ी परियोजनाएं लागू की गईं। ED की जांच से पता चला है कि रिशु श्री ने इस परियोजना में भी अहम भूमिका निभाई थी। उन्हें कुल परियोजना मूल्य का पांच से सात प्रतिशत तक भारी कमीशन मिला। पांच प्रतिशत की न्यूनतम दर के आधार पर भी गणना करने पर रिशु श्री ने अकेले 'नमामि गंगे' जैसी राष्ट्रीय महत्व की योजना से 185.25 करोड़ रुपये का अवैध मुनाफा कमाया। इस अपराध से अर्जित बेहिसाब संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा उन्होंने बिहार सरकार के विभिन्न लोक सेवकों को रिश्वत देने में इस्तेमाल किया।
ED को रिशु श्री के व्हाट्सएप चैट से भी कई चौंकाने वाले सबूत मिले हैं, जिनमें से कुछ में गुजराती भाषा में लिखे संदेश शामिल हैं। इन चैट से जांच एजेंसियों को पता चला हैं कि रिशु श्री और उनके मुख्य सहयोगी जितेंद्र कुमार (उर्फ अरुण) सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देने के लिए बड़ी मात्रा में नकदी की व्यवस्था करने में सक्रिय रूप से शामिल थे। रिशु के बही-खातों में 'अरुण भाई पटना फॉर एडमिनिस्ट्रेशन' और 'कैश करवाने का खर्चा' जैसी गुप्त एंट्रीज मिलीं हैं।
पटना हाई कोर्ट में ईडी द्वारा जमा किए गए हलफनामे से स्पष्ट होता है कि रिशु श्री ने ऊंचे स्तर पर संबंध बनाकर गुजरात और मुंबई की बड़ी कॉन्ट्रैक्टिंग फर्मों को अपने प्रभाव में ले लिया था। वह इन एजेंसियों के लिए सरकारी कॉन्ट्रैक्ट हासिल करता था और बदले में मिलने वाले भारी कमीशन को उन अधिकारियों के बीच बांट देता था जिन्होंने ये डील कराने में मदद की थी।
रिशु श्री के कहने पर इन अधिकारियों और उनके परिवारों के लिए महंगी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्राओं का इंतज़ाम करने के कारण तीन बड़ी ट्रैवल एजेंसियां भी जांच के दायरे में आ गई हैं। इनमें गुजरात की लैंबो जी टूर्स, पानीपत के राकेश शर्मा और पटना का शानवी कॉर्पोरेशन शामिल हैं। साथ ही जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या भ्रष्ट अधिकारियों ने विदेश में संपत्ति जमा की है और किन तरीकों से फंड को विदेश भेजा गया।
गौरतलब है कि स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) ने टेंडर में गड़बड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में 28 मई 2026 को मीठापुर स्थित उनके घर से रिशु श्री को गिरफ्तार किया। मंगलवार को कोर्ट ने SVU को रिशु श्री की पांच दिन की रिमांड दे दी। बुधवार को तीन DSP की अगुवाई वाली एक टीम ने उनसे 15 घंटे से ज़्यादा समय तक पूछताछ की। इस पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं।
Updated on:
18 Jun 2026 01:01 pm
Published on:
18 Jun 2026 01:01 pm
