मां बहुत पैशनेट रही हैं
कॉपीराइटर और एंटरप्रेन्योर अनामिका कहती हैं कि ए.आर.रहमान और जस्टिन बीबर के इंडिया टूर के लिए हम मर्चेंडाइज बना चुके हैं। एक कॉपीराइटर के तौर पर मैं शब्दों से पिछले ११ साल से रूबरू हो रही हूं। २७ अप्रैल को मैंने यह कविता अगले दिन होने वाले इवेंट में परफॉर्मेंस के लिए लिखी थी और महज १५ मिनट ही इसे पूरा कर लिया था और लिखते ही सबसे पहले मां को सुनाई, तो वे रोने लगीं। मैं भी सुबक पड़ी, फिर मुझे पता चल गया कि यह कविता कहां तक जाने वाली है। दरअसल, मैंने नौ साल पहले मां के बर्थडे पर सबसे पहले कविता लिखी थी। मेरी मां प्रोफेशन को लेकर बहुत पैशनेट रही हैं, लेकिन हमारी तरफ से उन्हें हमेशा ना ही मिली। यहां तक कि एक बार उन्हें विदेश घूमने तक का मौका मिला, लेकिन उन्होंने हमारे लिए अपना पैशन सेक्रिफाइस कर दिया। कई बार हमने उन्हें रोका, लेकिन अब लगता है कि यदि हमने उन्हें उनकी फ्रीडम दे दी होती, तो शायद आज वे बहुत बड़े मुकाम पर होतीं।