प्रस्तावित कानून का सीधा असर उन विद्यार्थियों और अभिभावकों पर पड़ेगा, जो प्रतियोगी परीक्षाओं और प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग संस्थानों पर निर्भर हैं। अभी फीस, रिफंड, पढ़ाई के घंटे, मानसिक दबाव और संस्थानों की जवाबदेही को लेकर कई तरह की शिकायतें सामने आती हैं। नए कानून में इन विषयों को नियमन के दायरे में लाने की तैयारी है।