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डॉक्टरों के इलाज की पहली कड़ी हैं रेडियोग्राफर, MRI-CT से खोलते हैं बीमारी का राज, जानिए क्यों अहम है इनकी भूमिका

Role of Radiographers: किसी भी बीमारी का सही इलाज शुरू करने से पहले उसकी सटीक पहचान जरूरी होती है। MRI, CT स्कैन और एक्सरे जैसी जांचों में रेडियोग्राफर अहम भूमिका निभाते हैं।
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रायपुर

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Khyati Parihar

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पीलूराम साहू

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Updated: 8 Nov 2026, 10:52 AM IST

Chhattisgarh News

विश्व रेडियोग्राफी दिवस (फोटो सोर्स- magnific)

रायपुर@पीलूराम साहू। World Radiography Day: किसी भी बीमारी की सटीक पहचान के लिए एमआरआई, सीटी स्कैन व एक्सरे कराने की जरूरत पड़ती है। इसे करने वाले रेडियोग्राफर होते हैं। ये एक कमरे में विकिरण के बीच खड़े होकर शरीर के अंदर की तस्वीर उतारता है। इस तस्वीर के आधार पर रेडियोलॉजिस्ट रिपोर्ट तैयार करते हैं और रिपोर्ट देखकर डॉक्टर इलाज करते हैं।

8 नवंबर को विश्व रेडियोग्राफी दिवस ऐसे ही रेडियोग्राफरों व रेडियोलॉजिकल टेक्नोलॉजिस्टों को समर्पित है। राजधानी में एम्स, आंबेडकर अस्पताल, डीकेएस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल प्रदेश के सबसे बड़े रेफरल सेंटर हैं। आंबेडकर अस्पताल में भी रोजाना 25 से 30 एमआरआई और 100 के आसपास सीटी स्कैन किए जाते हैं। यहां एमआरआई का जांच शुल्क 2000 रुपए और सीटी स्कैन का 1000 रुपए है। इसका फायदा मरीजों को मिल रहा है। हालांकि जांच की संख्या बढ़ने के साथ ही रेडियोग्राफरों पर काम का दबाव भी बढ़ा है।

जिलों में मशीनें आईं, विशेषज्ञ अब भी कम

प्रदेश के जिलों में बीते दो सालों में जांच सुविधाओं का विस्तार हुआ है। चिरमिरी जिला अस्पताल में करीब 8 करोड़ रुपए की लागत से सीटी स्कैन सुविधा शुरू हुई है। मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी जिले में नया मेडिकल कॉलेज व 220 बिस्तरीय अस्पताल शुरू हुआ है। राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज अस्पताल में करीब 25 करोड़ रुपए की लागत से थ्री टेस्ला एमआरआई मशीन लगाने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। वहां नवंबर 2025 से सीटी स्कैन भी शुरू हो चुका है।

रेडियोग्राफरों पर काम का दबाव क्योंकि ज्यादातर पद खाली

कई जिलों में रेडियोग्राफर के पद खाली हैं। महासमुंद में रेडियोग्राफर के 6 स्वीकृत पदों में से 4 ही कार्यरत हैं। किसी एक के छुट्टी पर जाने से पूरी व्यवस्था प्रभावित हो जाती है। कई जगह डिजिटल एक्सरे मशीन खराब होने से मरीजों को मैनुअल मशीन से काम चलाना पड़ता है। या निजी डायग्नोस्टिक सेंटर में 500 से 700 रुपए खर्च करने पड़ते हैं। प्रदेश में बीएससी मेडिकल रेडियोलॉजी एंड इमेजिंग टेक्नोलॉजी जैसे कोर्स एम्स रायपुर समेत कुछ संस्थानों में ही उपलब्ध हैं।

विकिरण से सुरक्षा भी बड़ा मुद्दा

रेडियोग्राफरों के लिए सबसे बड़ा मुद्दा विकिरण सुरक्षा भी है। रेडियोग्राफर रोज विकिरण के संपर्क में रहते हैं। इसलिए लेड एप्रन, थायरॉयड शील्ड, डोसीमीटर और सही प्रोटोकॉल का पालन उनकी सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। मरीजों के लिए भी अनावश्यक एक्सरे से बचना जरूरी है। खासकर गर्भवती महिलाओं और बच्चों में बिना जरूरत के जांच नहीं की जानी चाहिए। प्रदेश में टेली रेडियोलॉजी ने इस कमी को कुछ हद तक कम किया है। बैकुंठपुर जैसे दूरस्थ जिला अस्पताल में सीटी स्कैन की रिपोर्टिंग टेली-रेडियोलॉजी के माध्यम से कराई जा रही है। लेकिन टेली-रेडियोलॉजी तभी सफल होगी, जब मौके पर जांच करने वाला रेडियोग्राफर कुशल होगा।

टॉपिक एक्सपर्ट

डॉ. विष्णु दत्त, सीनियर रेडियोलॉजिस्ट व पूर्व डीएमई के मुताबिक, किसी भी जांच जैसे एमआरआई, सीटी स्कैन व एक्सरे के लिए कुशल रेडियोग्राफर का होना जरूरी है। जब इमेज अच्छी आएगी, तभी रिपोर्टिंग में आसानी होती है और बीमारी को समझना भी आसान है। रेडिएशन सुरक्षा भी गंभीर मुद्दा है। इसके लिए जरूरी उपाय उठाए गए हैं।