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Jobs: सारनी में औद्योगिक विकास को रफ्तार की उम्मीद, 660 मेगावॉट यूनिट और तवा-3 खदान से खुलेंगे रोजगार के नए रास्ते

Jobs : सारनी में 660 मेगावॉट की नई बिजली इकाई और तवा-3 कोयला खदान से जुड़ी योजनाओं पर काम आगे बढ़ने से औद्योगिक विकास और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। हालांकि, दो अन्य बड़ी परियोजनाओं की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। नई इकाई का काम शुरू होने से क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां बढ़ने और स्थानीय लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद जगी है। पढ़िए घनश्याम राठौर की रिपोर्ट।
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भारत

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Swatantra Mishra

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घनश्याम राठौर

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Updated: 26 Oct 2026, 3:56 PM IST

Tawa-3

तवा-3 खदान से खुलेंगे रोजगार के नए रास्ते (Photo: ChatGpt)

औद्योगिक नगरी सारनी में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए बिजली यूनिट और कोयला खदानों से जुड़ी परियोजनाओं पर काम आगे बढ़ गया है, लेकिन सीमेंट फैक्ट्री और नए रेलवे स्टेशन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। सतपुड़ा ताप विद्युत गृह में 660 मेगावॉट की नई यूनिट के लिए ठेका हो चुका है और काम भी शुरू हो गया हैं। वहीं तवा-3 खदान का काम लगभग पूरा होने वाला है। गांधीग्राम खदान का काम भी शुरू होने की तैयारी है। दूसरी ओर, 37 एकड़ में प्रस्तावित सीमेंट फैक्ट्री के लिए जमीन उपलब्ध कराने के बाद भी निर्माण शुरू नहीं हुआ है। करीब 125 करोड़ रुपए की लागत से प्रस्तावित रेलवे स्टेशन का भी पता नहीं है।

दूसरी यूनिट का डीपीआर तैयार

सतपुड़ा ताप विद्युत गृह में 660 मेगावॉट की दो नई यूनिट प्रस्तावित हैं। इनमें 12 नंबर यूनिट के निर्माण का ठेका भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) को दिया गया है। 13 हजार करोड़ की लागत से काम भी शुरू हो गया हैं। दूसरी यूनिट की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार हो गई है, लेकिन उसके निर्माण की प्रक्रिया अभी आगे बढ़ना बाकी है। जरूरी अनुमति नहीं मिल पाई है। बिजली यूनिट, कोयला खदान और सीमेंट फैक्ट्री सहित विभिन्न परियोजनाओं से करीब 10 हजार लोगों को रोजगार मिलने का अनुमान जताया जा रहा है, लेकिन इसका इंतजार बाकी है।

तवा-3 खदान का काम लगभग पूरा

कोयला उत्पादन के मोर्चे पर तवा-3 खदान का काम लगभग पूरा हो गया है। यहां कुछ महीनों में उत्पादन शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है। गांधीग्राम खदान का निर्माण कार्य शुरू होने की तैयारी है। खदानों के लिए परासिया और तानसी क्षेत्र से कर्मचारी भी आ चुके हैं। कर्मचारियों के रहने के लिए आवास बनाने की योजना है। इसके साथ ही एबी टाइप के पुराने सरकारी आवासों का रिनोवेशन भी किया जा रहा है। खदानों से उत्पादन शुरू होने पर रोजगार और परिवहन गतिविधियों में बढ़ोतरी हो सकती है।

जमीन मिली, लेकिन सीमेंट फैक्ट्री का निर्माण शुरू नहीं

अडानी समूह की अंबुजा सीमेंट कंपनी को सारनी में 37 एकड़ जमीन उपलब्ध कराई गई है। यहां सालाना 20 लाख टन सीमेंट उत्पादन क्षमता वाला प्लांट प्रस्तावित है। मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड के साथ हुए अनुबंध के अनुसार, बिजली घर से प्रतिदिन करीब 2200 टन फ्लाई ऐश उपलब्ध कराई जानी है। इसके बावजूद फैक्ट्री का निर्माण शुरू होने की स्थिति स्पष्ट नहीं है।

125 करोड़ के रेलवे स्टेशन पर भी स्थिति साफ नहीं

सारनी और घोड़ाडोंगरी के बीच 16 किलोमीटर रेल लाइन है। इसके बीच करीब आठ किलोमीटर की दूरी पर नया रेलवे स्टेशन बनाने की योजना तैयार की गई है। इसके लिए करीब 125 करोड़ रुपए की परियोजना बनाई गई है। प्रस्ताव में एक मुख्य लाइन और दोनों ओर लूप लाइन बनाने की योजना है। स्टेशन बनने से माल परिवहन को लाभ मिलने की संभावना है, लेकिन फिलहाल इसके निर्माण की स्थिति स्पष्ट नहीं है।

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