
बाजार में भीड़ (फोटो सोर्स- पत्रिका)
रायपुर@ राकेश टेंभुरकर।Swadeshi Products: इस बार दीपावली का बाजार केवल समृद्धि का पर्व नहीं, बल्कि स्वदेशी स्वाभिमान का उत्सव बनकर उभरा है। बाजारों में चाइनीज सामान की चमक पूरी तरह फीकी पड़ चुकी है और उसकी जगह लोकल कारीगरों के हुनर व स्वदेशी उत्पादों ने ले ली है। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट), छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स और स्वदेशी जागरण मंच के अनुसार, 'मेक इन इंडिया' और 'वोकल फॉर लोकल' का असर धरातल पर साफ दिख रहा है। व्यापारियों ने अगस्त के बाद से ही चाइनीज सामानों का ऑर्डर पूरी तरह बंद कर दिया था, जिसके चलते इस बार बाजार में 70 से 90 प्रतिशत उत्पाद पूरी तरह स्वदेशी हैं।
प्रदेश में 13000 करोड़ से 14500 करोड़ रुपए के रिकॉर्ड कारोबार की उम्मीद है, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को अभूतपूर्व गति मिलेगी। कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी के अनुसार, जीएसटी दरों के युक्तियुक्तकरण और स्वदेशी की बढ़ती मांग ने घरेलू अर्थव्यवस्था को वास्तविक मजबूती दी है। देशभर में इस साल दिवाली का कुल व्यापार करीब 5.50 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। स्वदेशी जागरण मंच के संयोजक जगदीश पटेल ने बताया कि त्योहार के दौरान आयोजनों की भरमार से होटल, कैटरिंग, इवेंट मैनेजमेंट, ट्रैवल और स्थानीय कलाकारों को भी व्यापक रोजगार मिला है। त्योहार पर खर्च होने वाला हर रुपया भारतीय उद्यमिता और आत्मनिर्भर भारत को मजबूत कर रहा है।
छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष सतीश थौरानी के अनुसार, केवल स्वदेशी उत्पादों का कारोबार ही 4000 करोड़ से अधिक का रहेगा। कारीगरों और महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार दीये, सजावटी वस्तुएं और पारंपरिक उत्पाद सी-मार्ट, संजीवनी, जेल एंपोरियम, हाथकरघा निगम और खादी भंडारों के माध्यम से सीधे ग्राहकों तक पहुंच रहे हैं। कारोबारी लक्ष्मण नायडू और कैट के वरिष्ठ उपाध्यक्ष विमल बाफना ने बताया कि खरीदार खुद स्थानीय सामानों की मांग कर रहे हैं, जिससे बिचौलियों के बिना कारीगरों को उनकी मेहनत का पूरा मूल्य मिल रहा है।
उद्योग विभाग और बस्तर चैंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा जगदलपुर के लालबाग में 10 दिवसीय राष्ट्रीय स्वदेशी मेला लगाया गया है। 200 से अधिक स्टॉल्स पर 10 से 30 प्रतिशत सरकारी सब्सिडी के साथ कारीगर सीधे उत्पाद बेच रहे हैं। बस्तर की प्रसिद्ध कॉफी, महुआ कुकीज, इमली कैंडी, साल बीज का तेल-साबुन, बांस के लैपटॉप स्टैंड व बोतलें और ढोकरा-बेलमेटल शिल्प आदि थे। कश्मीर की पश्मीना शॉल व केसर, राजस्थान की ब्लू पॉटरी व लाख की चूड़ियां, गुजरात का कच्छ वर्क, तमिलनाडु की कांजीवरम साड़ियां और नागालैंड के बांस हस्तशिल्प आदि की डिमांड रहीं।
दुर्ग में महिला स्वावलंबन और स्थानीय उत्पादों को बाजार से जोड़ने की दिशा में एक बड़ी पहल की जा रही है। कैट की महिला इकाई द्वारा 25 अक्टूबर को फरिश्ता कॉम्प्लेक्स के पास स्थित सिटी सेंटर मॉल में 'दिवाली एग्जीबिशन' का आयोजन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य उन महिलाओं के हुनर को ग्राहकों तक पहुंचाना है, जो घरों में उत्पाद तैयार करती हैं लेकिन स्थायी दुकान या पर्याप्त संसाधन नहीं रखतीं। इसमें 47 स्टॉल और 4 महिला समूह भाग ले रहे हैं।
इसमें 1500 से 2000 लोगों की भागीदारी और करीब 5 लाख के कारोबार का अनुमान है। कैट महिला इकाई की जिला अध्यक्ष पायल जैन के नेतृत्व में स्वावलंबी भारत अभियान और कैट युवा विंग सहयोगी के रूप में जुड़े हैं। कैट महिला इकाई पिछले पांच वर्षों से यह आयोजन कर रही है।
सेक्टर / उत्पाद हिस्सेदारी
अमर पारवानी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, कैट के मुताबिक, जीएसटी दरों के युक्तियुक्तकरण और स्वदेशी उत्पादों की बढ़ती मांग ने घरेलू अर्थव्यवस्था को वास्तविक मजबूती दी है।
सतीश थौरानी, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स के मुताबिक, केवल स्वदेशी उत्पादों का कारोबार ही 4000 करोड़ से अधिक का रहेगा। स्थानीय कारीगरों के उत्पाद विभिन्न सरकारी एम्पोरियम और सी-मार्ट के जरिए सीधे ग्राहकों तक पहुंच रहे हैं।
Updated on:
25 Oct 2026, 10:33 AM IST
Published on:
25 Oct 2026, 10:32 AM IST
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