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अंडर 50 की महिलाएं ध्यान दें! बिस्कुट, चिप्स… जैसी चीजों को इतनी बार खाने से Colorectal Cancer का खतरा!

Colorectal Cancer Risk In Women : चिप्स, बिस्कुट खाने वाली महिलाओं पर एक शोध किया गया है। इसमें पाया गया कि इस तरह की चीजों को खाने वाली महिलाओं में कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा अधिक है।

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कोलोरेक्टल कैंसर की प्रतीकात्मक तस्वीर | Photo- Grok AI

Colorectal Cancer Risk In Women : अगर आपकी उम्र 50 या उससे कम है और आपको चिप्स, बिस्कुट, नूडल्स जैसी चीजों को खूब खाना पसंद है तो "पत्रिका स्पेशल" की ये स्टोरी ध्यान से पढ़िए। एक शोध के मुताबिक, कोलोरेक्टल कैंसर होने का रिस्क ऐसी महिलाओं में अधिक होता है। यहां पर जानेंगे कि दिनभर में कितनी बार अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स को खाना इस तरह के कैंसर का रिस्क बढ़ा देता है। साथ ही इससे जुड़ी और जरूरी बातों को जानेंगे जो शोध में सामने आई है।

इस नए अध्ययन के अनुसार, रोज अधिक अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स खाने वाली 50 साल की उम्र से पहले वाली महिलाओं में कोलोरेक्टल पॉलीप्स होने का खतरा उन महिलाओं की तुलना में ज्यादा होता है जो बहुत कम इस तरह की चीजों का सेवन करती हैं।

हालांकि, हर कोलन पॉलीप्स कैंसर में नहीं बदलता। लेकिन ये निष्कर्ष 50 साल से कम उम्र की महिलाओं में कोलोरेक्टल कैंसर की बढ़ती दर का एक संभावित कारण बताते हैं। अल्ट्रा प्रोसेस्ड पदार्थों में अक्सर साबुत फूड की तुलना में कम फाइबर और अधिक चीनी, साल्ट, फैट और एडिटिव्स होते हैं।

आप कितनी बार खाती हैं अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स?

स्टडी में पाया गया कि जिन महिलाओं ने बताया कि वे प्रतिदिन नौ से दस बार अल्ट्रा-प्रोसेस्ड पदार्थों को खाती हैं, उनमें 50 साल की उम्र से पहले कोलन पॉलीप्स होने की संभावना 45 प्रतिशत अधिक थी। वहीं, उन महिलाओं में यह संभावना कम थी जो दिन में औसतन तीन बार अल्ट्रा-प्रोसेस्ड पदार्थ खाती थीं।

ब्रिघम कैंसर संस्थान के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. एंड्रयू टी चैन ने कहा कि अध्ययन के नतीजे एक जुड़ाव को सामने लाने का काम किए हैं। बता दें, ये अध्ययन के सीनियर राइटर भी हैं।

शुरुआती कोलोरेक्टल कैंसर के घाव का कारण

चैन ने बताया, "इससे हमें शुरुआती कोलोरेक्टल कैंसर के घावों के विकास में मदद करने वाली आहार की संभावित भूमिका के बारे में कुछ सुराग मिलते हैं। साथ ही मुझे लगता है कि यह अब तक का सबसे अच्छा उपलब्ध डेटा है।"

चैन ने कहा कि लगभग 5 प्रतिशत रिस्क है कि एक औसत कोलन पॉलीप समय के साथ कैंसर में विकसित हो सकता है। साथ ही ये बड़ा होने पर कैंसर के जोखिम को बढ़ाने का काम करता है। इसलिए, इनका इलाज छोटे होने पर किया जाना जरूरी है।

Photo- ये हैं अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स

अध्ययन में क्या पाया गया

डॉ. चैन ने कहा, हाल के दशकों में 50 वर्ष से कम उम्र के लोगों में कोलोरेक्टल कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं। साथ ही मोटापा, धूम्रपान या निष्क्रिय व्यवहार जैसे रिस्क फैक्टर्स इस प्रवृत्ति को पूरी तरह से स्पष्ट नहीं करते हैं।

इस बीच, अमेरिकी फूड्स में अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स की मात्रा में उल्लेखनीय वृद्धि भी हुई है। अमेरिकियों द्वारा उपभोग की जाने वाली आधी से अधिक कैलोरी अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स के सेवन से आती है। यह अध्ययन यह पता लगाने के लिए एक विश्वस्तरीय वैज्ञानिक प्रयास का हिस्सा है कि अधिक युवा लोगों को कोलन कैंसर क्यों हो रहा है।

चैन ने सवाल उठाते हुए कहा, "हम जानना चाहते थे कि क्या ये बातें आपस में जुड़ी हुई हैं। क्या यह संभव है कि शुरुआती अवस्था में कोलोरेक्टल कैंसर की बढ़ती घटनाओं का कारण अल्ट्रा प्रोसेस्ड पदार्थों का बढ़ता सेवन हो?"

इस प्रश्न का उत्तर देने के लिए, शोधकर्ताओं ने अमेरिका में महिला नर्सों पर दशकों से चल रहे एक अध्ययन में शामिल 50 वर्ष से कम आयु की 29,105 महिलाओं के 24 वर्षों के स्वास्थ्य और आहार संबंधी रिकार्ड की जांच की। ध्यान देने वाली बात ये है कि जिन महिलाओं को पहले से ही कैंसर, कोलोरेक्टल पॉलिप्स या सूजन, आंत रोग का इतिहास था, उन्हें अध्ययन से बाहर रखा गया।

हर चार साल (1991 से 2015 तक) में रिसर्च के लिए चयनित नर्सों ने एक शोध के लिए तैयार की गई प्रश्नावली का उत्तर दिया कि वे क्या खाती हैं और कितनी बार; और शोधकर्ताओं ने उन उत्तरों का उपयोग प्रतिभागियों द्वारा नियमित रूप से खाए जाने वाले अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स का निर्धारण करने के लिए किया।

औसतन, अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स ग्रुप में कुल डेली कैलोरी का 35 प्रतिशत हिस्सा थे। सबसे आम थी ये चीजें- ब्रेड जैसे ब्रेकफास्ट फूड्स, सॉस और मसाले, और शुगर या आर्टिफिशियल शुगर वाले ड्रिंक्स। चैन ने कहा, लेकिन शोधकर्ताओं को अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स में कोई इकलौता खाद्य पदार्थ नहीं मिला जिसे "दोषी" माना जाए।

इतना ही नहीं, शोधकर्ताओं ने नर्सों के आहार पैटर्न की जांच प्रतिभागियों के 50 वर्ष की आयु से पहले ली गई एंडोस्कोपी के परिणामों के साथ की। इस दौरान 24 वर्षों में, पारंपरिक एडेनोमा नामक कोलन पॉलीप्स के 1,189 दर्ज मामले सामने आए।

चैन ने कहा कि शोधकर्ताओं ने पाया कि अति-प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन महिलाओं के 50 वर्ष की आयु से पहले इन कोलन पॉलीप्स की संभावना को बढ़ाता है। और यह संबंध तब भी बना रहा जब शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों के बीएमआई, टाइप 2 मधुमेह के मामलों और प्रतिभागियों के आहार की अन्य गुणवत्ता (जैसे कि उनके द्वारा खाए गए फाइबर की मात्रा) को समायोजित किया।

डॉ. चैन ने बताया, "हम लोगों को डराने की कोशिश नहीं कर रहे हैं। और हम लोगों को यह नहीं बता रहे हैं कि कोई भी अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स खाने से कोलन कैंसर हो सकता है। हमें लगता है कि यह इस पहेली का एक पहलू मात्र है; ऐसी कई चीजें हैं जो कोलन कैंसर के जोखिम को बढ़ाती हैं और साथ ही यह एक ऐसी चीज है जिसके बारे में जागरूक होना जरूरी है।"

"सभी प्रोसेस्ड खाने से कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा नहीं"

किंग्स कॉलेज लंदन में प्रोफेसर और इस अध्ययन की सह-लेखिका सारा बेरी ने कहा कि ये निष्कर्ष "इस बात के बढ़ते प्रमाणों में इजाफा करते हैं कि कई पुरानी बीमारियों के लिए संतुलित, स्वस्थ आहार का पालन करना जरूरी है।"

बेरी ने कहा कि अल्ट्रा प्रोसेस्ड पदार्थों में फाइबर और पॉलीफेनॉल (जिनमें सूजन-रोधी गुण होते हैं) कम होते हैं, लेकिन नमक और सैचुरेटेड फैस अधिक होते हैं। ये आपके आंत के माइक्रोबायोम को प्रभावित कर सकते हैं।

साथ ही बेरी ने कहा कि "अल्ट्रा प्रोसेस्ड" शब्द कई तरह के उत्पादों को संदर्भित करता है- "जिनमें से कुछ अनहेल्दी होते हैं, और कुछ हेल्दी भी हो सकते हैं।" उन्होंने ये भी कहा, "हर खाने को अलग तरीके से प्रोसेस किया जाता है।" इसलिए, हम यह नहीं मान सकते कि सभी प्रोसेस्ड खाने से किसी व्यक्ति में कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

अन्य शोधकर्ताओं की राय क्या है?

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की शोध आहार विशेषज्ञ डालिया पेरेलमैन ने कहा कि यह एक ऐसा अध्ययन है जो "इस प्रमाण को पुष्ट करता है" कि अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स "रोग बढ़ाने की प्रक्रिया में" भूमिका निभा सकते हैं।

येल स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ में महामारी विज्ञान की सहायक प्रोफेसर लीह फेरुची ने कहा, "ऐसे बहुत कम विज्ञान अध्ययन मौजूद हैं जिनमें हम प्रारंभिक अवस्था में होने वाले कैंसर की जांच कर सकते हैं, क्योंकि वे अभी भी अपेक्षाकृत दुर्लभ हैं।"

विशेषज्ञों का ये भी कहना था कि बहुत अधिक अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स को खाने से बेहतर है कि कम सेवन करें। साथ ही कुछ हेल्दी ऑप्शन का चयन करें।

(वाशिंगटन पोस्ट का यह आलेख पत्रिका.कॉम पर दोनों समूहों के बीच विशेष अनुबंध के तहत पोस्ट किया गया है)