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सीतलामाता बाजार विवाद, साध्वी प्रज्ञा का बयान… बदलते सामाजिक ताने-बाने की चुभती हकीकत

Sitlamata Bazar Controversy: लोकतांत्रिक देश के नाते हमें सोचना होगा कि भारत की विविधता में एकता ही उसकी साझी संस्कृति है, त्योहार, व्यापार...यहां तक कि इतिहास गवाह है... कौमी एकता सदियों से भारतीय समाज की ताकत बनी है... लेकिन ताकत की ये दीवार अचानक दरारें झेलने से दरक जाएगी... आप और हम ही इसे मजबूती दे सकते हैं... सवाल ये करिए हमें बिखरना ही क्यों है?
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भोपाल

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Sanjana Kumar

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Updated: 30 Sep 2025, 4:17 PM IST

Indore News

Indore News: मुस्लिम सेल्समैन को सीतलामाता बाजार की दुकानों से हटाने का मामला गरमाया था, दिग्विजय सिंह विरोध के बीच पैदल चलकर ही पहुंचे थे सराफा थाना। आखिर अचानक क्यों दिखा ये बदलाव ...

Sitlamata Bazar Controversy Indore: भारत एक ऐसा देश रहा है, जिसे हमेशा से उसकी साझी संस्कृति (composite culture) पर गर्व महसूस होता रहा है। मंदिरों की घंटियों के साथ मस्जिदों की अजान की गूंज को साथ लेकर हमने सदियों तक यही जीवन जिया है। गली-कूचों में मिठाइयों की दुकानें हों, कपड़ों के शोरूम, सब्जी मंडियों और चाय की टपरियों पर धर्म से बड़ा केवल एक ही स्वाद चखा है, मिठास में डूबे रिश्तों का। लेकिन हाल ही में इंदौर के कपड़ा बाज़ार से मुस्लिम व्यापारियों को हटाने की कोशिश और उसके बाद राजनीतिक बयानों ने इस साझेपन की मिठास में जहर घोलना शुरू कर दिया है।

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