
Failure IVF
Failed IVF: बदला हुआ नाम 'नेहा', उम्र करीब 34 साल। शादी को छह साल हो चुके थे और पिछले दो साल से वह और उसके पति बच्चे के लिए इलाज करा रहे थे। जब पहली बार IVF शुरू हुआ तो घर में उम्मीद थी। इस बार शायद सब बदल जाएगा। इंजेक्शन, दवाइयां, बार-बार होने वाले टेस्ट, अस्पताल के चक्कर और फिर वह दिन जब भ्रूण ट्रांसफर हुआ। नेहा ने उस दिन खुद को समझाया था कि अब जिंदगी में एक नई शुरुआत होने वाली है।
लेकिन कुछ दिनों बाद pregnancy test ने उम्मीद तोड़ दी। डॉक्टर ने कहा, 'अभी एक असफल प्रयास से निष्कर्ष मत निकालिए।' नेहा ने दोबारा कोशिश की। दूसरी बार भी प्रेग्नेंसी नहीं ठहरी।
इस बार सवाल सिर्फ डॉक्टर से नहीं था। सवाल उसके मन में था, “आखिर मुझसे क्या गलती हो रही है?” यही वह मोड़ है जहां बहुत से IVF करवा रहे कपल पहुंचते हैं। लेकिन चिकित्सा विज्ञान का जवाब यह है कि हर असफल IVF को महिला की गलती मानना सही नहीं है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक इनफर्टिलिटी पुरुष, महिला, दोनों या कभी-कभी ऐसे कारणों से जुड़ी हो सकती है, जिनकी स्पष्ट वजह पता नहीं चल पाती। WHO की 2025 की fact sheet के मुताबिक, दुनिया में लगभग हर छह में से एक व्यक्ति अपने जीवनकाल में इन्फर्टिलिटी का अनुभव करता है। IVF में भी सफलता केवल एक चीज पर निर्भर नहीं करती। अंडों की गुणवत्ता, स्पर्म क्वालिटी, भ्रूण विकास की क्षमता, उम्र, यूट्रस की स्थिति और कई दूसरे क्लिनिकल फैक्टर भी IVF नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं।
इसलिए दो असफल अटैम्प्ट्स के बाद सबसे पहला सवाल यह नहीं होना चाहिए कि “गलती किसकी है?”, बल्कि यह होना चाहिए कि, “अब तक मिले medical evidence से हमें क्या पता चला?”
यह सवाल सबसे ज्यादा परेशान करता है। भ्रूण ट्रांसफर के बाद भ्रूण को यूट्रस लाइनिंग अंतर्गर्भाशयकला (endometrium) में इम्प्लांट होना होता है। American Society for Reproductive Medicine (ASRM) की 2026 की कमेटी ओपीनियन के मुताबिक implantation वह प्रक्रिया है जिसमें ब्लास्टोसिस्ट एंडोमेट्रियम से जुड़कर उसमें आगे स्थापित होता है।
लेकिन इम्प्लांटेशन एक बेहद जटिल बायलॉजिकल प्रक्रिया है। कभी भ्रूण में ऐसी जेनेटिक या विकास संबंधित समस्या हो सकती है, जो बाहर से दिखाई नहीं देती। कभी uterine cavity या endometrium से जुड़े फैक्टर्स महत्वपूर्ण हो सकते हैं। कुछ मामलों में मेल फैक्टर भी भूमिका निभाता है। यानी IVF की असफलता को सिर्फ महिला के यूट्रस से जोड़ देना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है।
दरअसल, यह कहना सही नहीं होगा। पहले कई जगह दो-तीन असफल भ्रूण ट्रांसफर्स के बाद recurrent implantation failure यानी RIF शब्द इस्तेमाल किया जाता था। लेकिन European Society of Human Reproduction and Embryology (ESHRE) ने इस क्षेत्र में स्पष्ट किया है कि RIF की कोई ऐसी एक निश्चित परिभाषा नहीं है, जो हर मरीज पर समान रूप से लागू की जा सके। उम्र, भ्रूण की संख्या और गुणवत्ता तथा individual prognosis जैसे फैक्टर्स को ध्यान में रखना जरूरी है।
ASRM की 2026 committee opinion भी कई असफल भ्रूण ट्रांसफर के बाद संभावित इम्प्लांटेशन से संबंधित हालत की साक्ष्य आधारित मूल्यांकन की बात करती है। इसका सीधा मतलब है, दो बार IVF असफल होना गंभीरता से समीक्षा करने का कारण हो सकता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि अगली कोशिश भी असफल ही होगी।
यह फैसला हर couple के लिए अलग हो सकता है। डॉक्टर आमतौर पर पिछले cycle की पूरी कहानी देखते हैं। कितने eggs मिले, फर्टिलाइजेशन कैसा रहा, भ्रूण का विकास कैसा रहा, कौन-सा भ्रूण ट्रांसफर हुआ, uterus और endometrium की स्थिति कैसी थी और pregnancy क्यों नहीं बनी। जरूरत के अनुसार मेडिकल मूल्यांकन की दिशा तय की जा सकती है।
यहीं एक और महत्वपूर्ण बात सामने आती है। IVF के बाद निराशा में कई कपल्स ऐसे “add-on” treatments की तरफ चले जाते हैं जिन्हें सफलता बढ़ाने के नाम पर पेश किया जाता है। लेकिन ESHRE की recommendations बताती हैं कि fertility treatment में इस्तेमाल होने वाले सभी टेस्ट और add-ons के लिए समान स्तर का वैज्ञानिक विश्लेषण उपलब्ध नहीं है। कई इंटरवेंशन्स के लिए अभी और गुणवत्तापूर्ण व्यापक शोध की जरूरत है।
इसलिए कोई भी महंगा अतिरिक्त टेस्ट या ट्रीटमेंट शुरू करने से पहले यह पूछना जरूरी है, “इससे live birth की संभावना बढ़ने का मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण क्या है?” IVF सिर्फ मेडिकल नहीं, आर्थिक और भावनात्मक यात्रा भी है। WHO ने 2025 की अपनी पहली global infertility guideline में फर्टिलिटी ट्रीटमेंट की सामर्थ्य को भी बड़ी चुनौती माना। WHO के अनुसार कई देशों में इन्फर्टिलिटी ट्रीटमेंट का खर्च लोगों को आर्थिक संकट की स्थिति तक पहुंचा सकता है।
भारत में भी ART treatment को regulate करने के लिए Assisted Reproductive Technology (Regulation) Act, 2021 लागू है और National ART & Surrogacy Registry के जरिए clinics और banks के registration की व्यवस्था की गई है।
अगस्त 2026 में सरकारी National ART & Surrogacy Registry पर 4,558 ART clinics registered दिख रहे थे।
लेकिन किसी registered clinic का होना और किसी particular patient के लिए treatment का सफल होना, दोनों ही अलग बातें हैं।
दूसरी असफलता के बाद नेहा ने तीसरी बार तुरंत ट्रीटमेंट शुरू करने के बजाय डॉक्टर से पूरा साइकल रिव्यू करवाने का फैसला किया। इस बार उसका सवाल अलग था। “मुझे सिर्फ यह मत बताइए कि अगली बार क्या करना है। मुझे यह समझाइए कि पिछली बार क्या हुआ था।”
यही शायद IVF journey में सबसे जरूरी बदलाव है। असफल IVF के बाद अगला कदम सिर्फ एक और cycle शुरू करना नहीं, बल्कि पिछली कोशिश से मिले सबूतों को समझना भी है।
किसी दूसरे व्यक्ति की सफलता या असफलता को अपनी कहानी का भविष्य मान लेना भी सही नहीं है। फर्टिलिटी ट्रीटमेंट में prognosis व्यक्तिगत होता है।
और सबसे जरूरी बात IVF असफल होने पर खुद को दोष देना बंद करना चाहिए। क्योंकि बच्चा न ठहर पाने की पूरी जिम्मेदारी किसी एक व्यक्ति की “गलती” नहीं होती। कभी biology हमारे अनुमान से कहीं ज्यादा जटिल होती है। और कभी-कभी सही सवाल “क्यों नहीं हुआ?”से आगे बढ़कर यह होता है, “अब उपलब्ध वैज्ञानिक जानकारी के आधार पर मेरे लिए सबसे समझदारी वाला अगला कदम क्या है?”
Updated on:
28 Aug 2026 11:04 am
Published on:
28 Aug 2026 11:04 am
