
सांकेतिक इमेज (सोर्स- chatgpt)
भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था की धुरी बनने की ओर अग्रसर नजर आ रहा है। हाल ही जारी 'ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स ग्लोबल सिटीज इंडेक्स 2026' रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के 1,000 सबसे बड़े शहरों में से 57 शहरों को 'इमर्जिंग स्टैंडआउट्स' (उभरते सितारे) की श्रेणी में रखा गया है और इनमें से 46 शहर भारत के हैं। यानी हर 5 में से 4 उभरते शहर भारतीय हैं।
ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स इंडेक्स लिस्ट में शामिल 46 भारतीय शहरों में मध्यप्रदेश के 3 शहर- भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर एवं राजस्थान के 2 शहर जयपुर और उदयपुर शामिल हैं। सूची में तमिलनाडु सबसे आगे है, जिसके 7 शहर- चेन्नई, कोयंबटूर,मदुरई, सेलम, तिरुचिरापल्ली, तिरुपुर और वेल्लोर जगह बना चुके हैं। कर्नाटक के 6 शहर (बेंगलूरु, बेलगावी, हुबली-धारवाड़, कलबुर्गी, मंगलुरु, मैसूरु) और महाराष्ट्र व गुजरात के 5-5 शहर भी इस सूची का हिस्सा हैं।
'इमर्जिंग स्टैंडआउट्स' श्रेणी उन विकासशील देशों के शहरों को दी जाती है, जो अपने देश के औसत से ज्यादा तेज प्रोडक्टिविटी ग्रोथ और अधिक प्रति-व्यक्ति आय दिखा रहे हैं। ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स ग्लोबल सिटीज इंडेक्स 2026' रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के 1,000 सबसे बड़े शहरों को 'इमर्जिंग स्टैंडआउट्स' की श्रेणी में रखा गया है। इसी श्रेणी में कुल 57 शहर हैं, जिनमें से 46 भारत के हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, बेंगलूरु ग्लोबल टेक हब बनकर उभरा है। इस उभार की सबसे बड़ी वजह भारतीय शहरों का तेजी से हाई-प्रोडक्टिविटी सेक्टरों, जैसे- टेक्नोलॉजी, फाइनेंशियल और बिजनेस सर्विसेज की ओर बढ़ना है। ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स ने बेंगलूरु को खासतौर पर रेखांकित किया है और बताया है कि IT सेक्टर के दम पर तेजी से आगे बढ़ रहा यह शहर अब AI जैसे अधिक उन्नत क्षेत्रों की ओर रुख करने की स्थिति में है, जिससे यह 'ग्लोबल टेक हब' के रूप में उभर रहा है।
रिपोर्ट में हैदराबाद, मुंबई और चेन्नई को भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताया गया है। हैदराबाद को प्रोजेक्टेड जीडीपी ग्रोथ के मामले में वैश्विक स्तर पर 15वां स्थान मिला है। अनुमान है कि यह 2050 तक एक बड़ी आर्थिक ताकत बनकर इंडेक्स में 58वें स्थान तक पहुंच सकता है। रिपोर्ट के अनुसार दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली शहरी अर्थव्यवस्थाओं में शीर्ष 100 में 55 भारतीय शहरों ने जगह बनाई है, जिनमें तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के हैदराबाद, विजयवाड़ा और विशाखापत्तनम भी शामिल हैं।
दिल्ली की बात करें तो वह ह्यूमन कैपिटल श्रेणी में टोरंटो, सियोल और बीजिंग जैसे शहरों को पछाड़ते हुए वैश्विक स्तर पर 13वें स्थान पर रही। समग्र इंडेक्स में दिल्ली 1,000 शहरों में 268वें स्थान पर है, यानी शीर्ष आधे में जगह बनाने में कामयाब रही। हालांकि, हवा की गुणवत्ता के मामले में तस्वीर उलट है। दिल्ली की स्थिति वैश्विक स्तर पर सबसे खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों में दूसरे नंबर पर आंकी गई है।
रिपोर्ट में यह भी साफ किया गया है कि ज्यादातर भारतीय शहर समग्र रैंकिंग में 250वें स्थान से नीचे क्यों हैं। इसकी मुख्य वजह पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर और जीवन की गुणवत्ता की कमी बताई गई है। आय असमानता के मामले में भी भारतीय शहरों की रैंकिंग काफी नीचे है। गौरतलब है कि 21 'ग्लोबल लीडर्स' शहरों की सूची में कोई भी भारतीय शहर जगह नहीं बना सका और सस्टेनेबल सिटीज, लेगेसी सिटीज या कल्चरल कैपिटल्स की सूचियों में भी भारत का कोई शहर शामिल नहीं है।
ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स ने यह रिपोर्ट दुनिया के 1,000 सबसे बड़े शहरों का इकोनॉमिक्स, ह्यूमन कैपिटल, क्वालिटी ऑफ लाइफ, एनवायरनमेंट और गवर्नेंस, इन 5 श्रेणियों के आधार पर मूल्यांकन कर तैयार की है। समग्र वैश्विक रैंकिंग में न्यूयॉर्क पहले, लंदन दूसरे और पेरिस तीसरे स्थान पर बना हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले वर्षों में चीन और भारत के शहर बड़ी आबादी और उत्पादकता में लगातार सुधार के दम पर वैश्विक विकास की अगुआई करते नजर आएंगे।
Updated on:
25 Sept 2026 06:51 pm
Published on:
25 Sept 2026 06:51 pm
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