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ड्रग्स के खिलाफ रणनीति: देश के हर जिले में बनेंगे क्लस्टर, एंट्री प्वाइंट, ट्रांजिट कॉरिडोर और खपत वाले जिले होंगे चिन्हित

केंद्र सरकार ने ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई के लिए बड़ा प्लान तैयार किया है। अब देश में ड्रग्स के खिलाफ अभियान को जब्ती और मुकदमे दर्ज करने तक सीमित रखने के बजाय पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने पर केंद्रित किया जाएगा।
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भारत

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Vinay Shakya

•

Sep 25, 2026

Government strategy to take action against drug traffickers

सांकेतिक इमेज (सोर्स- chatgpt)

देश में ड्रग्स के खिलाफ चल रहे अभियान को अब सिर्फ जब्ती और मुकदमों तक सीमित न रखकर पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करने पर केंद्रित किया जाएगा। केंद्र सरकार ने अगले तीन साल के लिए एक नया मॉडल तैयार किया है, जिसके तहत जिलों को ड्रग्स नेटवर्क में उनकी भूमिका के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाएगा और हर श्रेणी के लिए अलग रणनीति बनाई जाएगी।

क्या है सरकार का प्लान?

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने यह जानकारी 22 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) प्रमुखों के तीसरे राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए दी। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) द्वारा आयोजित इस दो-दिवसीय सम्मेलन में 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के ANTF प्रमुखों के साथ संबंधित विभागों और अन्य हितधारकों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

कार्यक्रम में अमित शाह ने कहा कि जिलों को 3 क्लस्टर में बांटा जाएगा। ड्रग्स बनाने या देश में उनके प्रवेश से जुड़े जिले, परिवहन कॉरिडोर वाले जिले और खपत वाले जिलों को अलग-अलग चिन्हित किया जाएगा। जिलों को क्लस्टर में बांटने से पुलिस, एएनटीएफ और अन्य एजेंसियों को यह तय करने में मदद मिलेगी कि किस जिले में किस तरह की कार्रवाई प्राथमिकता पर होनी चाहिए, ताकि कार्रवाई ड्रग्स के स्रोत से लेकर अंतिम उपभोक्ता तक पूरे रास्ते पर हो सके।

गृह मंत्री ने दोहराया कि सरकार का लक्ष्य 31 दिसंबर 2029 तक भारत से ड्रग्स के कारोबार को पूरी तरह उखाड़ फेंकना है। उन्होंने कहा कि न एक ग्राम ड्रग्स भारत में आएगा, न भारत के रास्ते बाहर जाएगा। इस लक्ष्य के लिए सरकार ने विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029 भी तैयार किया है, जिसमें अभियान से जुड़े लक्ष्य, समयसीमा और जवाबदेही स्पष्ट रूप से तय की जाएगी।

ड्रग्स के खिलाफ हर मोर्चे पर सख्ती

अमित शाह के मुताबिक, अब बैठकों से मिशन तक, रिपोर्टिंग से नतीजों तक, महज जब्ती से नेटवर्क के पूर्ण खात्मे तक और मुकदमे से सजा दिलाने तक, हर स्तर पर काम आगे बढ़ाना होगा। एक अन्य कार्यक्रम में गृह मंत्री ने कहा कि जिले को नशे के खिलाफ लड़ाई की मूल इकाई बनाना होगा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीते 5 साल से नशामुक्त भारत के इस कठिन लक्ष्य को हासिल करने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।

राज्यों में नई तकनीकों के इस्तेमाल और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से निपटने के लिए विशेषज्ञ टीमें बनाने की भी योजना है। इसके साथ ही, ड्रग तस्करी में शामिल विदेशी नागरिकों को ब्लैकलिस्ट कर वापस भेजने और विदेशों में छिपे भगोड़ों को भारतीय अदालतों के सामने लाने के लिए ठोस कार्रवाई की जाएगी। दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में गृह मंत्री ने मादक पदार्थों के खिलाफ जागरूकता फैलाने वाले टेलीविजन कमर्शियल का लॉन्च किया और लखनऊ व देहरादून में एनसीबी के नए जोनल कॉम्प्लेक्स की आधारशिला रखी।

अमित शाह ने एनसीबी की नई वेबसाइट का भी शुभारंभ किया। कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले एएनटीएफ को सम्मानित भी किया गया। गौरतलब है कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की स्थापना 1986 में हुई थी और यह गृह मंत्रालय के अधीन काम करने वाली केंद्रीय एजेंसी है, जो देशभर में नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने और उससे जुड़े कानूनों को लागू कराने के लिए जिम्मेदार है। सरकार की नई क्लस्टर-आधारित रणनीति को इसी एजेंसी के नेतृत्व में राज्यों की एएनटीएफ इकाइयों के साथ मिलकर लागू किया जाएगा।