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मेक इन इंडिया के 12 साल: इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 7 गुना बढ़ा, PM मोदी और क्रेंद्रीय मंत्री ने गिनाईं योजना की उपलब्धियां

भारत की ‘मेक इन इंडिया’ पहल के 12 साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने और केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने उपलब्धियां गिनाईं हैं। पीएम मोदी ने कहा कि अब भारत पूरी दुनिया के लिए उत्पाद बना रहा है। वहीं, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि मेक इन इंडिया की असली कहानी आंकड़ों से आगे जाती है।
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भारत

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Vinay Shakya

•

Sep 25, 2026

Make in India initiative

सांकेतिक इमेज (सोर्स- chatgpt)

देश की 'मेक इन इंडिया' पहल के 12 साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को इस योजना की उपलब्धियां गिनाईं हैं। पीएम मोदी और केंद्रीय मंत्री ने योजना की उपब्धियां गिनाते हुए कहा कि भारत अब सिर्फ अपनी जरूरतों के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए उत्पाद बना रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच 'X' पर लिखा कि भारत में उत्पादन, निवेश और निर्यात तीनों में इजाफा हुआ है।

'मेक इन इंडिया' पहल से बड़ा बदलाव

PM मोदी ने कहा- भारत में उत्पादन, निवेश और निर्यात तीनों में इजाफा हुआ है। हर सेक्टर में यह बदलाव साफ नजर आ रहा है। उन्होंने कहा कि इस पहल से देश के कई क्षेत्रों की तस्वीर बदली है। 25 सितंबर 2014 को शुरू हुई 'मेक इन इंडिया' का मकसद भारत को मैन्युफैक्चरिंग, डिजाइन और इनोवेशन के लिए वैश्विक हब बनाना था। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, आज यह पहल 27 सेक्टर तक फैल चुकी है, जिनमें 15 मैन्युफैक्चरिंग और 12 सर्विस क्षेत्र शामिल हैं।

इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन बढ़ा

'मेक इन इंडिया' पहल से इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन बढ़ा है। इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 2014-15 के 1.9 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 2025-26 में 13.11 लाख करोड़ रुपए हो गया है। इसमें मोबाइल फोन उत्पादन ने सबसे तेज छलांग लगाई है। इसका उत्पादन 18,000 करोड़ रुपए से बढ़कर 6.27 लाख करोड़ रुपए हो गया है। इस बढ़ोतरी के दम पर भारत अब वॉल्यूम के हिसाब से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता देश बन चुका है। रक्षा उत्पादन में भी बड़ी छलांग दर्ज हुई है। घरेलू रक्षा उत्पादों की वैल्यू 2014-15 के 46,429 करोड़ रुपए से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई।

वाहन उत्पादन में वृद्धि

2024-25 में वाहन उत्पादन 31.03 मिलियन यूनिट तक पहुंचा, जो 2014-15 के मुकाबले 33 प्रतिशत ज्यादा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कच्चे स्टील का उत्पादन 2014-15 के 81.7 मिलियन टन से बढ़कर 2025-26 में 170 मिलियन टन हो गया है। रेलवे ने 2014 से 2024 के बीच कुल 54,809 कोच बनाए, जबकि सालाना औसत उत्पादन 2004-14 के करीब 3,300 कोच से बढ़कर 2014-24 में 5,481 कोच तक पहुंच गया। 2025-26 में भारतीय रेलवे ने 1,674 लोकोमोटिव बनाए और नई राष्ट्रीय लेखा श्रृंखला के तहत मैन्युफैक्चरिंग जीवीए ने 2022-23 से 2025-26 के बीच 10.88 प्रतिशत की सालाना दर से वृद्धि दर्ज की।

स्थापित हो रहे ग्रीनफील्ड औद्योगिक स्मार्ट शहर

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा- 2014 में भारत की विनिर्माण क्षमता को लेकर संदेह के दौर थे, जब कई जरूरी उत्पाद आयात करने पड़ते थे, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने इस स्थिति को स्वीकार करने से इनकार किया और भारत को गुणवत्ता के लिए पहचाने जाने वाला विनिर्माण केंद्र बनाने का सपना देखा। निवेश के मोर्चे पर आंकड़े इस भरोसे की पुष्टि करते हैं।

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत में अब तक का सबसे अधिक 94.53 अरब डॉलर का वार्षिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आया, जबकि 2014-15 से 2025-26 तक कुल एफडीआई प्रवाह 843 अरब डॉलर तक पहुंच गया। गोयल ने बताया कि प्रतिस्पर्धी विनिर्माण के लिए राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास कार्यक्रम के तहत देशभर में ग्रीनफील्ड औद्योगिक स्मार्ट शहर बनाए जा रहे हैं, और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' सुधारों ने नियम-कायदे आसान बनाकर अनुपालन का बोझ घटाया है। उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं ने भी रफ्तार दी है। 31 मार्च 2026 तक इन योजनाओं के तहत 2.40 लाख करोड़ रुपए का वास्तविक निवेश हुआ, 23.8 लाख करोड़ रुपए का उत्पादन-बिक्री दर्ज हुई और 15.2 लाख करोड़ रुपए का निर्यात हुआ, जिससे 14.6 लाख से ज्यादा प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा हुए। हालांकि, स्वतंत्र विश्लेषणों के मुताबिक पीएलआई योजनाओं का प्रदर्शन मिला-जुला रहा है। कुल स्वीकृत आउटले करीब 1.97 लाख करोड़ रुपए में से सितंबर 2025 तक सरकार ने वास्तव में सिर्फ 23,946 करोड़ रुपए ही वितरित किए थे और कुछ लक्ष्य अब तक पूरे नहीं हो पाए हैं।

केंद्रीय मंत्री ने बताया भारत का नया लक्ष्य

गोयल ने इलेक्ट्रॉनिक्स-दूरसंचार, फार्मास्यूटिकल्स, मेडिकल डिवाइस, ऑटोमोबाइल, आईटी हार्डवेयर और स्पेशियलिटी स्टील जैसे क्षेत्रों को PLI का प्रमुख लाभार्थी बताया। साथ ही, ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी) के जरिए अब तक 470 करोड़ से ज्यादा ऑर्डर हो चुके हैं, जो छोटे उद्यमों को बड़ा सहारा दे रहा है।

केंद्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि 'मेक इन इंडिया' की असली उपलब्धि सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि स्टार्टअप संस्थापकों, उद्यमियों, निर्माताओं और आम लोगों में पैदा हुआ यह भरोसा है कि भारत बना सकता है। भारत, नवाचार कर सकता है और दुनिया से मुकाबला कर सकता है। अब लक्ष्य और बड़ा है- भारत को वैश्विक विनिर्माण महाशक्ति बनाना, जो 2047 तक विकसित भारत के विजन को भी मजबूत करेगा।