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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में PIL दाखिल, जानिए क्या है पूरा विवाद?

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है। यह याचिका मीडिया रिपोर्टों को आधार बनाकर दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि SIR से जुड़े कई अहम फैसले अन्य दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए थे।
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भारत

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Vinay Shakya

•

Sep 25, 2026

PIL filed in supreme court against CEC gyanesh kumar

सांकेतिक इमेज (सोर्स- chatgpt)

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है। अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से दायर यह याचिका मीडिया रिपोर्टों को आधार बनाकर दायर की गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़े कई अहम फैसले अन्य दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए।

क्या है पूरा विवाद और आरोप?

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR से जुड़े फैसले, जिनमें फॉर्म-6 में बदलाव और मतदाता सूची डेटा के प्रबंधन से जुड़ी बातें शामिल हैं। उन फैसलों पर कम से कम 14 बार चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी द्वारा आपत्ति दर्ज कराई थी। यह जानकारी 'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट में सामने आने के कुछ दिनों बाद याचिका दाखिल की गई।

याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत यह याचिका दाखिल करते हुए मांग की है कि ज्ञानेश कुमार द्वारा बिना सहमति लिए गए सभी फैसलों, दिशा-निर्देशों और सॉफ्टवेयर बदलावों को असंवैधानिक और अमान्य घोषित किया जाए, तथा मूल फॉर्म-6 को दोबारा लागू किया जाए।

13 करोड़ वोटरों के नाम हटाने पर SIT जांच की मांग

कोर्ट में याचिका में यह भी मांग की गई है कि 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SIR के दौरान करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से कैसे हटाए गए। इसकी विशेष जांच दल (SIT) से जांच कराई जाए। याचिकाकर्ता ने ECINet और ERONet डेटाबेस की फोरेंसिक जांच की भी मांग रखी है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल में मतदाताओं को सूची में शामिल किए जाने को चुनौती देते हुए कथित तौर पर 16.10 लाख अपीलें दाखिल किए जाने की भी जांच की मांग की गई है।

किन अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग?

जनहित याचिका में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (आरपी एक्ट) की धारा 32 के तहत ड्यूटी के दौरान कथित उल्लंघन के लिए कई अधिकारियों पर मुकदमा चलाने की मांग की गई है। इनमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ-साथ वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग और ECI की IT महानिदेशक सीमा खन्ना के नाम शामिल हैं। धारा 32 मतदाता सूचियों की तैयारी, संशोधन और सुधार से जुड़े ड्यूटी उल्लंघन से संबंधित है।

कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन और सियासी घमासान

यह याचिका ऐसे समय में आई है जब SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाईकोर्ट में पहले से कई याचिकाएं लंबित हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी पहले ही चुनाव आयोग की मतदाता सूची प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग कर चुके हैं। खबरों के मुताबिक, चंडीगढ़ में भी कांग्रेस ने सीईसी के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें पार्टी कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे।

कांग्रेस का आरोप है कि मौजूदा सीईसी के कार्यकाल में लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। इसके साथ ही मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जा रहे हैं। कांग्रेस पार्टी ने कहा है कि जब तक CEC इस्तीफा नहीं देते हैं, विरोध जारी रहेगा। हालांकि इस विशेष प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारियों के स्वतंत्र सोर्स से पूर्ण विवरण की पुष्टि अभी उपलब्ध रिपोर्टों में स्पष्ट रूप से नहीं मिल पाई है।

बिहार में SIR प्रक्रिया पर लग चुके आरोप

गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब SIR के तहत नाम हटाए जाने पर विवाद हुआ हो। बिहार में सुप्रीम कोर्ट के 14 अगस्त के आदेश के बाद चुनाव आयोग ने बूथ-वार सूची जारी की थी, जिसमें बताया गया था कि करीब 65 लाख मतदाताओं के फॉर्म ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल नहीं किए गए, जिससे कुल पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 7.9 करोड़ से घटकर 7.24 करोड़ रह गई थी। इस पर सफाई देते हुए सीईसी ज्ञानेश कुमार ने कहा था कि बड़ी संख्या में हटाए गए नाम पिछले 20 साल की अवधि से जुड़े हैं, क्योंकि बिहार में इससे पहले 2003 में SIR हुआ था।

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