
International market for Indian jewellery
International market for Indian jewellry: भारत की गहनों की कला और व्यापार ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी एक खास पहचान बनाई है। यह लेख आपको बताएगा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारतीय आभूषणों की स्थिति क्या है, भविष्य में यह कैसे बदल सकती है और इसका आपके जीवन पर क्या असर हो सकता है।
विश्व स्तर पर भारत का हिस्सा सीमित लेकिन महत्वपूर्ण है। 2024 में भारत का वैश्विक रत्न और आभूषण निर्यात (HS कोड 71) में हिस्सा लगभग 2.9% था। सोने या अन्य कीमती धातुओं से बने आभूषणों (HS 7113) में भारत का निर्यात लगभग 11.1 अरब डॉलर था, जो वैश्विक मांग का करीब 9.8% है। हीरे (अनवर्क्ड और अनमाउंटेड डायमंड्स) में भारत का हिस्सा 16.9% था, जो वैश्विक मांग में एक मजबूत स्थिति दर्शाता है।
निर्यात के प्रमुख गंतव्य देशों में यूएई, अमेरिका और हांगकांग शामिल हैं, जो भारत के कुल निर्यात का लगभग 73% हिस्सा बनाते हैं। FY26 में, भारत के रत्न और आभूषण निर्यात का कुल मूल्य लगभग 27.71 अरब डॉलर था, जिसमें यूएई (8.68 अरब), हांगकांग (6.12 अरब), अमेरिका (5.11 अरब) प्रमुख थे।
भारत घरेलू बाजार में भी तेजी से बढ़ रहा है। Technopak के अनुमान के अनुसार, भारतीय आभूषण खुदरा बाजार 2028 तक 145 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। Redseer Research के अनुसार, 2024 में भारत वैश्विक आभूषण बाजार में दूसरे स्थान पर था और 2029 तक यह 130–140 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना है।
हालिया तिमाहियों में, सोने की ऊंची कीमतों के बावजूद भारतीय उपभोक्ता खर्च में मजबूती बनी रही। Q2 2026 में, भारत में आभूषण की मात्रा में 15% की गिरावट आई, लेकिन मूल्य में 26% की वृद्धि हुई। इससे पता चलता है कि लोग कम मात्रा में लेकिन अधिक मूल्य वाले आभूषण खरीद रहे हैं। Q1 2026 में भी, स्थानीय सोने की कीमतों में वृद्धि के बावजूद, मूल्य के हिसाब से मांग रिकॉर्ड 10 अरब डॉलर रही।
सरकार ने ‘Chintan Shivir – 2040 Roadmap for Gems & Jewellery’ नामक एक रणनीति शुरू की है, जिसका लक्ष्य 2040 तक रत्न और आभूषण निर्यात को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। यह योजना नवाचार, डिजाइन, वैश्विक ब्रांडिंग और मूल्य संवर्धन पर जोर देती है।
इसके अलावा, GJEPC (Gem & Jewellery Export Promotion Council) “ब्रांड इंडिया” रणनीति पर काम कर रहा है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में भागीदारी, बाजार विविधीकरण और डिजिटल ट्रेड प्लेटफॉर्म का उपयोग शामिल है। नीति आयोग ने भी मेगा कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) जैसे उपायों का प्रस्ताव रखा है, जो छोटे निर्माताओं को आधुनिक तकनीक और संसाधन उपलब्ध कराएगा।
भारत हीरों के कटाई और पॉलिशिंग में विश्व का प्रमुख केंद्र है—यह दुनिया में कटे और पॉलिश किए गए हीरों का 90% से अधिक हिस्सा संभालता है। इसके अलावा, भारत की डिजाइन क्षमता, निर्माण पैमाना और प्रक्रिया परिपक्वता ने अंतरराष्ट्रीय खरीदारों का ध्यान आकर्षित किया है।
हालांकि, वैश्विक ब्रांडिंग की कमी और निर्यात विविधीकरण की कमी चुनौतियां हैं। नीति आयोग के आंकड़ों के अनुसार, भारत का निर्यात बहुत ही सीमित देशों पर निर्भर है, और कई उत्पाद श्रेणियां अभी भी कम हिस्सेदारी रखती हैं।
भारत की वैश्विक स्थिति मजबूत करने के लिए कुछ प्रमुख कदम हैं:
ये कदम न केवल निर्यात को बढ़ाएंगे, बल्कि घरेलू उद्योग को भी आधुनिक बनाएंगे और रोजगार बढ़ाएंगे।
यदि आप छात्र, पेशेवर हैं तो यह जानना जरूरी है कि भारतीय आभूषण उद्योग में नई नौकरियां, डिजाइन और तकनीकी अवसर बढ़ रहे हैं। वैश्विक ब्रांडिंग और डिजिटल व्यापार से जुड़े कौशल, जैसे डिजाइन, ई-कॉमर्स, अंतरराष्ट्रीय व्यापार, आपके लिए नए करियर रास्ते खोल सकते हैं। साथ ही, यदि आप निवेश या व्यापार के बारे में सोच रहे हैं, तो यह क्षेत्र आने वाले वर्षों में आकर्षक अवसर प्रस्तुत कर सकता है।
कहना होगा कि भारतीय आभूषण उद्योग वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। निर्यात में विविधीकरण, डिजाइन नवाचार और ब्रांडिंग पर ध्यान देने से यह क्षेत्र 2040 तक 100 अरब डॉलर के लक्ष्य को हासिल कर सकता है। यह न केवल अर्थव्यवस्था के लिए, बल्कि आपके लिए भी एक सकारात्मक और संभावनाओं भरा भविष्य है।
Updated on:
28 Aug 2026 04:33 pm
Published on:
28 Aug 2026 04:33 pm
